बच्चों का गुस्सा कैसे कंट्रोल करे

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बच्चे मासूम होते हैं और उनका स्वभाव बेहद सरल होता है, ये तो हम सभी जानते ही हैं लेकिन अगर आपको अपने बच्चे में कुछ अनचाहे बदलाव नज़र आने लगे हैं तो इस दिशा में सोचिये। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा आजकल बेवजह गुस्सा करने लगा है, चीखने-चिल्लाने लगा है और खिलौनों को तोड़ने के अलावा हाथ उठाने और मारने के लिए भी तैयार रहता है तो आपको बिना देरी किये, ये जानने की ज़रूरत है कि ऐसा होने के क्या कारण हो सकते हैं और कितने समय से आपका बच्चा ऐसी उग्रता दिखा रहा है। इन सवालों के जवाबों में ही छिपा है आपकी इस मुश्किल का हल। तो चलिए, आज इसी मुश्किल का हल ढूंढते हैं इन सवालों में और जानें बच्चों का गुस्सा कैसे कंट्रोल करे –

1. क्या आप बच्चों के सामने गुस्सा करते हैं ?
कई बार हम ये भूल जाते हैं कि हमारे सामने बच्चे भी है जो हमारे व्यवहार को बहुत बारीकी से देख रहे हैं और सीख रहे हैं। इससे अनजान रहते हुए, जब कभी आप अपने बच्चे के सामने ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हैं या गुस्सा दिखाते हैं तो इसका सीधा असर आपके बच्चे के स्वभाव पर पड़ता है, भले ही ये गुस्सा आपने बच्चे पर नहीं किया हो, लेकिन आपका अनुसरण वो ज़रूर करता है क्योंकि आप ही तो उसके आदर्श हैं।

2. क्या आप बच्चों पर गुस्सा करते हैं ?
याद करिये, आखिरी बार आपने कब अपने बच्चों पर गुस्सा किया था, किसी छोटी सी बात पर या किसी छोटी सी ग़लती पर। ये याद करते ही आप समझ जाएंगे कि आपका गुस्सैल रवैया बेवजह आपके बच्चों पर गुस्से और डांट के रूप में निकलता है और इसका गहरा असर उनके कोमल मन पर पड़ता है और वो भी धीरे-धीरे उग्र होने लगते हैं।

3. क्या आप बच्चों की हर ज़िद पूरी करते हैं ?
पैरेंट्स की कोशिश हमेशा यही होती है कि वो अपने बच्चे की सारी ख्वाहिशें पूरी कर सके लेकिन ख्वाहिश और ज़िद में फर्क होता है, ये आपको समझना होगा। अगर आप अपने बच्चों की हर छोटी बड़ी, सही-ग़लत, हर तरह की ज़िद पूरी करते आये हैं तो बच्चे का गुस्सैल होना स्वाभाविक ही तो है क्योंकि उसे “ना” सुनने की आदत ही नहीं पड़ी और सही-ग़लत को जानना और ज़रूरत को समझना उसे आया ही नहीं। ऐसे में ज़िद पूरी ना होने पर बच्चे गुस्सा करने लगते हैं और ऐसा होने के पीछे ज़िम्मेदारी पैरेंट्स की ही तो होती है, इसलिए बच्चे की हर ज़िद पूरी ना करें, कभी कभी ‘ना’ भी कहिये।

4. क्या आप बच्चों की पिटाई करते हैं ?
कई बार जब बच्चे बिलकुल कहा नहीं मानते, तो हम उन्हें मारने लगते हैं और ऐसा करके हम उन्हें उग्र बनने में मदद कर रहे होते हैं, साथ ही हम उन्हें ये भी सीखा रहे होते हैं कि शक्तिशाली व्यक्ति कमज़ोर को मार सकता है। बस, अनजाने में दी गयी यही सीख बच्चे को गुस्सैल बनाने और अपने से कमज़ोर बच्चों को मारने के लिए प्रेरित करती है।

5. क्या आप अपने बच्चे से सलीके से बात करते हैं ?
अगर आप अपने बच्चे से उसी लहजे और सलीके में बात करते हैं जैसा आप खुद के लिए चाहते हैं तो आपका बच्चा भी आपसे अच्छी तरह ही पेश आया करेगा लेकिन अगर आपकी अपेक्षा है कि उससे उग्र और रूखे शब्दों में बात करने के बाद भी वो आपसे तमीज़ से पेश आये तो ये होना मुश्किल है क्योंकि वो तो वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा वो आपको करते हुए देखेगा।

6. क्या आप बच्चों के सामने मार-धाड़ की फिल्में देखते हैं?
रोज़ाना अपनी फैमिली के साथ वक़्त बिताते समय, अगर आप टीवी पर लड़ाई से जुड़े सीन देखते हैं तो आपके बच्चे के व्यवहार में उग्रता आना संभव है क्योंकि रोज़ टीवी पर लड़ाई-झगड़ा और मारपीट के दृश्य देखकर बच्चा वही करने के लिए प्रेरित होता जाता है। याद रखिये, बच्चे बहुत जल्दी सीखते हैं और उनमें सही ग़लत की समझ इतनी विकसित नहीं होती है कि वो तय कर सके कि क्या अच्छा है और क्या बुरा। ये सीखाना तो हमारी ज़िम्मेदारी है ना।

7. क्या आप अपने बच्चे की तुलना करते हैं ?
एक ऐसी सामान्य ग़लती है जो लगभग हर पैरेंट्स द्वारा की जाती रही है और वो है अपने बच्चे की तुलना उससे अधिक दक्ष बच्चे से करना। पढ़ाई हो या फिर खेलकूद से जुड़ी उपलब्धियां, अगर आप भी अपने बच्चे के सामने दूसरे होशियार बच्चों के उदाहरण देते आये हैं और अपने बच्चे की क्षमताओं को कम आंकते आये हैं तो इसी वक़्त रुक जाइये। आपकी ये अपेक्षाएं और तुलनाएं आपके बच्चे में हीनभावना भर सकती है और हीनभावना का परिणाम कुंठा और निराशा भी हो सकती है और आक्रामकता और गुस्सैल स्वभाव भी।

8. क्या आप अपने बच्चे के साथ समय बिताते हैं ?
व्यस्तता हर व्यक्ति के जीवन में होती ही है लेकिन अगर इस बहाने के चलते आप अपने बच्चे के साथ समय नहीं बिताते हैं तो ये मान लीजिये कि आपका बच्चा गुस्सैल ही बना रहेगा। हर बच्चा अपने पैरेंट्स के साथ वक़्त बिताना चाहता है, बच्चे की उम्र से इस बात का कोई सम्बन्ध नहीं है। आप अपने बच्चे के साथ कुछ वक़्त रोज़ बिताइए, दिन भर की बातें कीजिये, उसके साथ खेलिए। फिर देखिये कैसे आपका बच्चा गुस्सैल नहीं, बल्कि शांत और सरल बनता जाता है।

9. क्या आप अपने बच्चे के दोस्त हैं ?
दोस्ती के रिश्ते की सबसे ख़ास बात यही है कि इसमें उम्र नहीं देखी जाती, ना ही अपेक्षा रखी जाती है बल्कि अपने दोस्त को हर हाल में समझने और सँभालने की ज़िम्मेदारी ली जाती है। ऐसे में आप पैरेंट्स बने रहने के अलावा अपने बच्चे के दोस्त भी तो बन सकते हैं, जिनसे वो अपनी हर बात शेयर कर सके और अपने गुस्से के कारणों के बारे में भी बात कर सके और कारण पता लगने के बाद हल निकालना तो कितना आसान होता है, ये आप जानते हैं।

10. क्या आपका बच्चा ज़्यादा समय अकेला रहता है ?
आपका बच्चा अगर दिन के ज़्यादातर समय अकेला रहता है तो उसके गुस्सैल होने की सम्भावना बढ़ जाती है। कारण जो भी हो, लेकिन बच्चे के अकेलेपन को भरना और उसे खुश रखने का दायित्व तो आप ही का है ना।

इन सवालों में आपको अपने जवाब मिल ही गए होंगे, लेकिन इसके साथ बच्चों का गुस्सा कैसे कंट्रोल करने के लिए कुछ और बातों पर गौर करना भी ज़रूरी है –

उसके आसपास के माहौल को जानिये – ऐसा अक्सर होता है कि पैरेंट्स बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजकर निश्चिन्त हो जाते हैं जबकि होना ये चाहिए कि बच्चे के स्वभाव में अगर अचानक उग्रता आने लगे तो उसके माहौल को जानना चाहिए। हो सकता है कि उसके स्कूल-कॉलेज का माहौल अच्छा ना हो, उसके साथी उसे अपमानित करते हो या फिर वो किसी मुसीबत में हो। अपने बच्चे के आसपास के माहौल को जानकर ही आप उसकी मदद कर सकेंगे ।

अपने बच्चे की गतिविधियों पर नज़र रखिये – अपने बच्चे पर यकीन करना अच्छी बात है लेकिन ये भी ध्यान रखिये कि उम्र के इस पड़ाव पर उसे जीवन के ज़्यादा अनुभव हासिल नहीं हुए हैं। ऐसे में उससे ग़लतियाँ तो होंगी ही लेकिन ये ग़लतियाँ उसके लिए सजा ना बन जाए, इसका ख़याल तो आप ही को रखना होगा ना। इसलिए अपने बच्चे की दिनभर की गतिविधियों पर नज़र रखिये, वो टीवी पर क्या देखता है, मोबाइल में क्या देखता-सुनता है, कैसे दोस्तों के साथ खेलता है। ऐसी बातों पर ध्यान देकर आप बहुत आसानी से अपने बच्चे की मदद कर सकेंगे।

उसकी ऊर्जा को सही दिशा दीजिये – बच्चों में बहुत ऊर्जा होती है जो अगर सही दिशा में नहीं लग पाए तो ग़लत राह पकड़ लेती है और ऐसे में ये ऊर्जा गुस्सा, हिंसा और आक्रोश के रूप में बाहर निकलती है। इस स्थिति से बचने के लिए अपने बच्चे की ऊर्जा को क्रिएटिव काम में लगाइये। खेलकूद, क्राफ्ट, थिएटर जैसे रचनात्मक कार्यों में, रूचि के अनुसार अपने बच्चे को भी शामिल कराइये और उसे ऐसे क्रिएटिव कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित करिये। ऐसा करने से उसके अंदर की ऊर्जा को सही दिशा मिल जायेगी और गुस्से के लिए कोई स्थान शेष ही नहीं रहेगा।

अब आप जान गए हैं कि बच्चे की उग्रता और गुस्सैल रवैये के पीछे सिर्फ उसकी ग़लती नहीं होती बल्कि आपका व्यवहार और आसपास का माहौल भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए अब से अपने बच्चे को सराहना शुरू कीजिये और अपने व्यवहार से उसके सामने बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कीजिये और ऐसा करके अपने बच्चे को इस गुस्सैल स्वभाव से मुक्त करके उसका सरल स्वभाव लौटाने में उसकी मदद कीजिये क्योंकि हर बच्चा अपने आप में ख़ास होता है और उन ख़ास बच्चों में से एक बच्चा आपका भी है।

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