कैसे करे निराशा दूर और खुद को मोटिवेट

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निराशा!! यह शब्द आज हर किसी के लिए परेशानी की बहुत बड़ी वजह है. आज के समय में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो यह कह सके की हम निराशा से बचे हुए है. निराशा, एक ऐसी बीमारी है जिसकी चपेट में एक बार कोई आ गया तो उसका उभरना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. इसलिए इसे अपने आप पर और अपने काम पर हावी ना होने दे. निराशा से मुक्ति पाने का सबसे जरूरी उपाय यह है कि आप अपने व्यस्त समय में छुट्टियां अवश्य ले और अपने परिवार या दोस्तों के साथ एक अच्छी यात्रा पर जाएं. इससे आपको काम से तो आराम मिलेगा ही, साथ ही जब आप लंबी यात्रा से लौटेंगे तो अपने काम में पूरे जोर-शोर से मन लगा पाएँगे. वैसे यह विकल्प बहुत ही कारगर है. आजमा के देखिए. अपने लक्ष्य को हमेशा अपने साथ रखे. कहने का तात्पर्य यह है कि आपके दिमाग में हमेशा चलता रहना चाहिए की आपको यह कार्य अच्छे से ख़त्म करना है या इसमें मुझे पूर्ण सफलता हासिल करनी है. इस तरह के संकल्प को पूरा करने के लिए आप के अंदर की आग हमेशा जलती रहनी चाहिए. खुद को मोटिवेट करना कोई मुश्किल नहीं बस आपको सबसे पहले अपने मन की निराशा को त्यागना पड़ेगा.

अक्सर यह देखा जाता है अधिकांश लोग नये काम की शुरुआत तो बहुत उत्साह के साथ करते है. लेकिन अपने द्वारा तय समय सीमा में अगर सफलता हासिल नहीं होती तो कुछ समय बाद ही सारा उत्साह खत्म होने लगता है. नतिजनन वह काम ठीक से नहीं करते या फिर अधूरा छोड़ देते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण होता है उदासीनता यानी खुद में मोटिवेशन की कमी. काम चाहे छोटा हो या बड़ा उसे अच्छे से पूरा करने के लिए मोटिवेशन की बहुत जरूरत होती है. बिना मोटिवेशन के अगर हम कोई काम कर भी लें तो उस काम में ना मज़ा आएगा और ना ही वह काम ढंग से होगा. परिस्थितियाँ कभी-कभी बहुत मोटीवेट फील करवाती हैं तो कभी-कभी बहुत डिमोटीवेट. कभी-कभी तो जीवन इतना निराश हो जाता है कि सकारात्मकता क्या होती है यह सोच भी नहीं पाते. लेकिन आप घबराएं नही यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है क्योंकि यह स्थायी नहीं होता है. कई ऐसे तरीके है जिसे अपनाकर आप खुद का मोटिवेशन लेवेल बढ़ा सकते हैं. लेकिन इससे पहले हम निराशा के कुछ आम कारणों को जानें.

निराशा के मुख्य कारण

* जब हमारी कोई इच्छा पूरी नहीं होती या अधूरी रह जाती है
* जब मेहनत के हिसाब से फल नहीं मिलता
* जब हमारे लाभ में कमी आने लगती है
* जब हमारी जरूरत चाहत बन जाती है
* जब कोई काम हमारे द्वारा निर्धारित तरीके से ना हो
* जब हम जरूरत और चाहत में फर्क नहीं कर पाते
* जब हम दूसरों से खुद की तुलना करते हैं
* जब हम दूसरों से अपेक्षाएँ ज्यादा रखते हैं
* जब परिवार या दोस्तों से मधुर संबंध नहीं रहते
* जब हम खुद को अकेला समझते हैं
* जब खुद में विश्वास की कमी होने लगे

ऐसे ही हजारों ओर भी कई कारण है जो हमे मोटीवेट होने से रोकते है. जीवन है तो आशा और निराशा तो साथ होगी ही. लेकिन हमारी कोशिश यही होनी चाहिए परिस्थिति चाहें कितनी भी विपरीत क्यों ना हो सदा खुद को मोटीवेट करते रहो. जागरूक में हम कुछ ऐसे ही तरीकों का जिक्र करेंगे जो आपके लिए जरूर मोटिवेशनल साबित होंगे.

एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें – जब हम एक ही समय में बहुत कुछ करने की कोशिश करते है तो इसमें हमारी ऊर्जा और एकाग्रता दोनों खत्म होने लगते हैं. इस वजह से हम अपने लक्ष्य से भटक जाते है और खुद को मोटीवेट नहीं कर पाते. शायद यह ही सबसे आम गलती होती है लोगों के जीवन में. एक समय में कई काम करना कभी संभव नहीं. इसलिए आपको अभी के लिए एक बड़े लक्ष्य का चुनाव करना होगा. फिर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इसे छोटे-छोटे लक्ष्यों में बाँटकर समय को निर्धारित करे. फिर सही प्लानिंग और कड़ी मेहनत के साथ उन छोटे-छोटे लक्ष्यों को निर्धारित समय में पूरा करें. जैसे ही छोटे-छोटे लक्ष्यों को आप पूरा करते जायेंगे आपका उत्साह और मोटिवेशन बढ़ता ही जायेगा और एक दिन ऐसा भी आयेगा की आप बिना निराश हुए अपने बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे. एक बार अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लें फिर उसके बाद आप अपने बाकी के लक्ष्यों को प्राप्त करने में क्रम से जुट जाएं.

सोच को बदलिए – जो विचार आपको निराशाजनक बना रहे हैं उन्हें पहचाने. क्योंकि ऐसे विचार आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं. इसलिए ऐसे नकारात्मक विचारो को एक कागज पर लिख लें. फिर धीरे-धीरे इन नकारात्मक विचारों को अपने मन से निकालकर उनको सकारात्मक विचारों में बदल दीजिये. जैसे – ”ये बहुत कठिन है” या ”ये मुझसे कैसे होगा” या ”मैं अकेला क्या कर सकता हूँ” आदि सोच को बदल दीजिए. जैसे – ”ये तो बहुत आसान है” या ”मैं ये कर सकता हूँ” या ”कुछ भी बदलने के लिए अकेले ही बढ़ना पड़ता है” आदि से बदल कर देखिए. खुद को मोटीवेट करने के लिए सबसे पहले आपको अपनी सोच को ही बदलना होगा. क्योंकि हम जैसा सोचते है हमारे साथ वही होना निश्चित हो जाता है.

अपना आदर्श खोजिए – आपके जीवन में भी कई लोग ऐसे होंगे जिन्हें देखकर आप सोचते है ”मुझे भी ऐसा ही बनना है.” इसलिए ऐसे व्यक्ति को खोजिए जिसे देखकर आप स्वयं को मोटीवेट कर सके. अपने आदर्श से प्रेरणा लीजिए और सोचे जब इस क्षेत्र में यह सफल हो सकते है तो मैं क्यों नहीं.” इसमें कोई संदेह नहीं कि ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता हैं लेकिन खुद पर विश्वास कीजिए यह विचार सच में काम करता है. आप अपने क्षेत्र में जिसके जैसा बनना चाहते हैं, उस व्यक्ति को अपना आदर्श बना लीजिए और उसके बारे में सारी जानकारी जुटा लीजिए कि कौन से काम, नियम, बातों का पालन करके वे सफलता तक पहुँचे हैं. फिर मेहनत और लगन के साथ उनका अनुसरण करे. परिस्तिथियाँ शायद आप दोनों की कुछ अलग हों सकती है. लेकिन खुद पर भरोसा कायम रखे और हमेशा यही सोचें कि मुझे भी इनकी तरह ही बनना है और हर कीमत पर इस ऊंचाई को छूना हैं. फिर चाहे मुझे कितनी भी मेहनत क्यों ना करनी पड़े.

अपने लक्ष्य को रोशनी दिखाए – अपने लक्ष्य का एक शीर्षक (जैसे– मुझे बिल गेट्स, वारेन बफ़े, सचिन तेंदुलकर के जैसा बनना है आदि) के रूप में लिखकर या प्रिंट करवा कर इस तरह से चिपका दे जहाँ आप की नजर आसानी से पड़ सके. जैसे– कमरे की दीवार, कार्यालय आदि. अपने लक्ष्य से सम्बन्धित कोई फोटो अपने मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर डेस्कटॉप पर भी लगाना हेल्पफुल हो सकता है. जिससे हर वक्त आपकी आँखों के सामने आपका लक्ष्य होगा. जो आपको मोटीवेट भी करेगा और टारगेट के प्रति समर्पित भी रखेगा.

खुद को उत्साहित कीजिए – अगर आप कोई अच्छा काम कर लेते है या किसी गोल को अचिव कर लेते हैं तो खुद शाबाशी देना ना भूलिए. इस तरह से आप खुद को भविष्य के लिए प्रोत्साहित करेंगे और दिल से कहिए ”मैंने यह कर दिखाया.” आप सोच भी नहीं सकते यह तरीका आपके मोटिवेशन लेवेल को बहुत बढ़ा देगा. आपको दूसरों से प्रेरणा और उत्साह लेकर उसे अपनी ऊर्जा में बदलना होगा. जब तक आप मोटीवेटेड फील नहीं करेंगे तब तक आप उत्साह भी महसूस नहीं कर सकेंगे.

कल्पना कीजिए – दिमाग में कल्पना कीजिए की अगर मैं अपने गोल को अचिव कर लिया तो मुझे कितना लाभ होगा!! मेरा सफल होना कैसा महसूस कराएगा. मेरी समाज में क्या प्रतिष्ठा होगी आदि. फिर सोचिए एक बार जब अपने ऐसा कर लिया तो बस इसी ऊर्जा को आगे निरंतर बढ़ाने में लगा दीजिए. आप जो भी बनना चाह रहे है उस बारे में रोज सोचिए. किसी जमाने में दूर बैठे दो लोगों का आपस में बात करना भी असंभव था लेकिन आज ऐसा नहीं हैं. ये किसी की कल्पना शक्ति का ही परिणाम है. कल्पना आपको कही भी ले जा सकती है. बस जरूरत है सपनें देखने की और उस सपनें को पूरा करने में अपनी ताकत लगाने की.

रोजाना कुछ भी पढ़ने की आदत – इस आदत से आप सदा मोटीवेट रहेंगे. रोजाना पढ़ने की आदत से आपका ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहेगा. रोजाना पसंदीदा विषयो से सम्बन्धित, नयी चीजों के बारे में, प्रेरणादायक जीवनी, मोटिवेशनल ब्लॉग, साहित्य आदि पढ़िए. जब आप निराशा से घिरे हो खासतौर से तब तो ज़रूर पढ़िए. यह आदत आपको प्रेरित और उत्साहित करेंगी जिससे आपका मोटिवेशन लेवेल बढ़ेगा. लेकिन हाँ, अपने लक्ष्य के बारे में जो आपने प्लान बनाया है उसे पढ़ना कभी ना भूले.

सर्किल अच्छा बनाए – हमेशा पॉजिटिव लोगों के बीच अपना सर्किल बनाए. जो खुद भी कुछ करे और आपको भी कुछ करने के लिए मोटीवेट करते रहे. बेकार लोगों से दूरी भली. जो आपके काम में बेवजह कमी निकाले, मजाक बनाए या आपको नीचा दिखाए. दोस्त ऐसे हो जिनका खुद का भी कोई लक्ष्य हो और आपके लक्ष्य में भी वे आपको मदद करे व प्रेरित करे. वो कहावत तो सुनी होगी–”जैसी संगत, वैसी रंगत.”

सहायता लीजिए – जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते है की हमें किसी ना किसी की आवश्यकता पड़ती है. मदद देने में जब हिचक नहीं तो लेने में क्या हिचक. क्योंकि मदद वही करेगा जो आपको अपना समझेगा. मदद किसी भी तरह की हो सकती है पैसे की, फिजिकल सपोर्ट की, मोरल सपोर्ट की. मदद आपकी स्थिति पर निर्भर करता है. परेशानी में सहायता मिलने पर आप निराशाजनक स्थिति से बच जाओगे. इसलिए अपना सपोर्ट नेटवर्क तलाश कीजिए. अपने आस-पास, ऑनलाइन या दोनों जगह. अगर आप खुद पर पूरा विश्वास करते हो की आप किसी की सहायता से अपने गोल को अचिव कर सकते हो तो दूसरों से मदद लेने में कोई बुराई नहीं हैं. क्योंकि अकेले सबकुछ हासिल करना मुश्किल होता है. कुछ बड़ा पाने के लिए छोटे झुकाव आवश्यक है.

चाहे जो हो जायें बस लगे रहो – आपके साथ चाहे जो भी हो जायें, किंतु हार मत मानिए. चलती का नाम जिंदगी है, जहाँ रुके वही ख़तम. हो सकता है आपका यह हफ्ता या महीना आपको बिल्कुल भी उत्साहित नहीं किया, लेकिन फिर भी खुद को लक्ष्य के प्रति मोटीवेट रखिए. निराशा एक स्पीड-ब्रेकर है जिससे आपको बार-बार निकलना है. क्योंकि सफलता की यात्रा बहुत लंबी होती है. यात्रा को बीच में मत छोड़िए यानी लक्ष्य पर आपकी पकड़ मजबूत होनी चाहिए. दिमाग को यही निर्देश दीजिए चाहे जो हो जायें मैं पीछे मुड़कर नहीं देखूँगा. कीमत चाहे जो हो मुझे मेरी मंजिल को हासिल करना ही है.

दोस्तों, उतार-चढाव तो लगा रहता हैं. ऊपर दिए गए तरीकों को अपनाये और उनका पालन करें. इनके अलावा कुछ और भी तरीके है जैसे- बहुत छोटे काम से शुरुआत कीजिए, छोटी-छोटी सफलता के साथ संतुष्ट होकर बड़े लक्ष्य की ओर बढ़िए, लाभ के बारे में सोचे परेशानियों के बारे में नहीं, गोल के बारे में रोज सोचे, सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये, खुद से निराश कभी ना होइए. खुद को सदा मोटीवेट फील करने में यह कुछ उपाय भी आपकी मदद कर सकते है. आपका फोकस बस इस बात पर होना चाहिए की आप खुद को मोटिवेट कर पाएं. हम जानते है यह कठिन है लेकिन नामुमकिन नहीं. क्योंकि यह हमारा स्वयं का अनुभव है.

आपको हमारा यह लेख कैसा लगा? अगर यह लेख आपकी जरा भी मदद करता है तो हमें इस बात की बेहद खुशी होगी. अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें.

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