नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें?

अक्टूबर 27, 2017

नन्हे से बच्चे का घर पर आना एक बहुत बड़ी खुशी होती है जो घर के माहौल को खुशनुमा बना देती है। नवजात शिशु के साथ घर में किलकारियां और मासूमियत आती है। इस खुशनुमा अहसास के साथ ये ख्याल रखना बहुत ज़रूरी होता है कि आपके इस नन्हे शिशु की देखभाल कैसे की जाये? क्योंकि शुरुआती दिनों में आपको ये अंदाज़ा नहीं हो पाता है कि इनकी नाजुक त्वचा की देखभाल कैसे की जाए और इनकी ज़रूरतों का ख्याल कैसे रखें और इसी वजह से कई बार अनजाने में आप नवजात शिशु की परेशानियों और ज़रूरतों को समझ नहीं पाते हैं और वो मासूम बच्चा अपनी बात सिर्फ रोकर कहना ही जानता है, जिसे समझना शुरुआत में आसान नहीं होता। तो चलिए, आज कुछ ऐसी ज़रूरी बातें जानते हैं जो नवजात शिशु से जुड़ी हैं और जिन्हें जानकर आपकी मुश्किलें थोड़ी आसान भी हो जाएंगी–

नहलाते समय ध्यान रखें – न्यू बोर्न बेबी में अम्बाइकल कॉर्ड पाया जाता है जो जन्म से पहले प्लेसेंटा से जुड़ा रहता है और जन्म के बाद इसे प्लेसेंटा से अलग कर दिया जाता है। इस कॉर्ड को निकलने में 7 से 21 दिन का समय लग सकता है। ऐसे में जब तक आपके बच्चे का अम्बाइकल कॉर्ड ना निकल जाए तब तक नवजात शिशु को नहलाते समय स्पॉन्ज बाथ ही दें और अगर नहलाते समय कॉर्ड गिला हो जाए तो उसे सूखे नरम कपड़े से पोंछ लें।

याद रखिये कि वो नाजुक है – नवजात शिशु के आने से पहले भले ही आप सख्ती से पेश आते रहे हो लेकिन अब इस नन्हे की देखभाल करने में सबसे पहले आपको अपनी सख्ती छोड़नी होगी, खासकर उसे पकड़ते या उठाकर गोद में लेते समय आपको याद रखना होगा कि वो बहुत नाजुक है इसलिए उसे हलके हाथों से उठाने और सहलाने, सँभालने की जरुरत है।

शिशु के रोने का कारण पहचानिये – अक्सर हम सोचते हैं कि छोटे बच्चों का रोना एक सामान्य बात है लेकिन हमें ये समझने की भी जरुरत है कि बच्चे के रोने के पीछे कोई ना कोई कारण ज़रूर होता है। बच्चे भूख लगने की वजह से भी रोते हैं और डायपर गीला हो जाने पर भी। इसके अलावा गोद में आने के लिए भी बच्चे रोते हैं। किस समय बच्चे की क्या जरुरत है, ये समझकर ही उसका पूरा ख़याल रखा जा सकता है।

उसके आहार का ध्यान रखिये – भले ही आपके खाने की टाइमिंग फिक्स हो लेकिन अब आपको अपने बच्चे के खाने की टाइमिंग का भी ध्यान रखना होगा। बढ़ने के साथ बच्चे थोड़ा-थोड़ा आहार लेना शुरू कर देते हैं इसलिए इन्हें हर 2-3 घंटे में इनके लायक आहार देते रहें ताकि इन्हें कोई तकलीफ ना हो और इन्हें भूख के कारण रोना ना पड़े।

बच्चों की नींद – शिशु 1 से 2 घंटे का स्ट्रेच लेकर पूरे दिन में 5 से 10 बार नींद लेते हैं और इनके सोने का कोई निश्चित समय नहीं होता है। शिशु को उसकी पूरी नींद लेने दें लेकिन इस दौरान उसके आहार का भी ख़याल रखें।

शिशु के साथ घर आने वाली नयी रौनक का पूरा आनंद उठाइये लेकिन इसके साथ-साथ अपने रुटीन को भी उसके अनुसार समायोजित कर लीजिये। ऐसा करके आप अपने बच्चे का पूरा ख्याल भी रख पाएंगे और इस बदलाव से थकने की बजाए सब कुछ अच्छे से संभाल भी पाएंगे।

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