खाते वक्त क्यों नहीं बोलना चाहिए?

आइये जानते हैं खाते वक्त क्यों नहीं बोलना चाहिए। खाना खाने से जुड़े बहुत से नियमों के बारे में आप भी जानते होंगे और उनमें से कुछ नियमों का पालन भी करते होंगे ताकि आपका भोजन अच्छे से पच सके और आपकी सेहत को पूरा फायदा पहुंचा सके।

लेकिन क्या आप भी खाना खाते वक्त बात करने से खुद को रोक नहीं पाते हैं और इस वजह से कई बार आपको अचानक खांसी भी आने लगती है?

अगर आपके साथ ऐसा होता है और आप इसे मामूली बात समझते हैं तो ऐसा मत सोचिये क्योंकि खाते वक्त बोलना बहुत ख़तरनाक भी हो सकता है इसलिए आज जागरूक पर हम इसी बारे में बात करते हैं।

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खाते समय इन ख़ास बातों का ध्यान तो आप रखते ही होंगे-

  • हाथों को अच्छे से धोकर ही खाना शुरू करते होंगे
  • खाना सही समय पर खाया करते होंगे
  • खाना खाने की सही जगह का चुनाव करते होंगे
  • भोजन के प्रति आभार जताते हुए खाना शुरू करते होंगे
  • बहुत ज्यादा तीखा और मीठा भोजन ज्यादा नहीं खाते होंगे
  • खाने को चबा-चबाकर खाते होंगे
  • खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीते होंगे
  • खाने के थोड़ी देर बाद, कुछ समय टहलते होंगे

अगर आप खाने के इन नियमों का पालन भी नहीं कर पाते हैं तो ऐसा करना अभी से शुरू कर दीजिये क्योंकि भोजन को सही तरीके से पचाने और उससे सेहत को दुरुस्त रखने के लिए ये सबसे सामान्य और आसान नियम हैं।

अब बात करते हैं खाने से जुड़े थोड़े से कठिन लगने वाले नियम के बारे में– खाते समय चुप रहना और कुछ ना बोलना किसी मुश्किल चुनौती जैसा लगता है लेकिन इसका कारण जानने के बाद आपको इस नियम का महत्व समझ आ जाएगा।

खाते वक्त क्यों नहीं बोलना चाहिए?

खाना खाते समय भोजन और लार मिलकर खाने को पचाने की क्रिया शुरू करते हैं लेकिन उस दौरान बोलने से मुँह में हवा चली जाती है और डायजेशन की प्रक्रिया ख़राब हो जाती है क्योंकि हवा पाचन क्रिया को बाधित कर देती है इसलिए कहा जाता है कि खाने को चबाने के दौरान मुँह को बंद रखना चाहिए ताकि खाना अच्छे से चब सके और उसका पाचन सही तरह हो सके।

हमारे गले में दो नलियां होती हैं- भोजन नली (oesophagus) और श्वास नली (trachea), इनमें से भोजन नली पेट से जुड़ी होती है और श्वास नली फेफड़ों से जुड़ी रहती है।

जब हम कुछ खाते हैं तब भोजन नली खुलती है और श्वास नली बंद हो जाती है जिससे खाना भोजन नली में ही जाता है। लेकिन खाने के दौरान बात करने से श्वास नली भी खुल जाती है जिससे खाना श्वास नली में फंस सकता है।

इसे चोकिंग या दम घुटना कहा जाता है क्योंकि श्वासनली में खाने का टुकड़ा फंसने से सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और अगर तुरंत मदद ना मिले तो खाने का छोटा सा टुकड़ा भी इंसान की जान ले सकता है।

अब आप समझ गए होंगे कि खाते समय बोलना या हंसना कितनी बड़ी मुश्किल का रुप ले सकता है इसलिए बिना बोले, चबा चबाकर, मुस्कुराते हुए खाने की आदत डाल लीजिये ताकि आये दिन होने वाली डायजेशन से जुड़ी परेशानी काफी हद तक कम हो सके।

उम्मीद है जागरूक पर खाते वक्त क्यों नहीं बोलना चाहिए कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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