कुण्डलिनी शक्ति क्या है?

सितम्बर 24, 2018

योग में कुण्डलिनी शक्ति के बारे में जरूर बात की जाती है और माना जाता है कि योग का निरंतर और सटीक अभ्यास करके कुण्डलिनी शक्ति को जागृत किया जा सकता है। कुंडलिनी की प्रकृति ऐसी होती है कि जब तक ये जागृत नहीं होती है तब तक व्यक्ति को इसके होने का अहसास भी नहीं होता है लेकिन जब ये जागृत हो जाती है तब अंदर की असीम ऊर्जा का ज्ञान होता है।

कुण्डलिनी एक ऐसी दिव्य शक्ति है जो सर्प की तरह साढ़े तीन फेरे लेकर शरीर के सबसे निचले चक्र में स्थित रहती है। कुण्डलिनी शक्ति को सांप के प्रतीक से जाना जाता है और इसका कारण ये माना जाता है कि कुंडली मारकर बैठा हुआ सांप जब तक अपनी जगह से हिलता-डुलता नहीं है तब तक उसे देखना मुश्किल होता है।

हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं और जब कुण्डलिनी सबसे निचले चक्र मूलाधार पर स्थित रहती है तब व्यक्ति सांसारिक विषयों में उलझा रहता है लेकिन कुण्डलिनी जागृत होने की स्थिति में सबसे पहले व्यक्ति को मूलाधार चक्र में कम्पन महसूस होना शुरू हो जाता है।

फिर ये कुण्डलिनी तेजी से ऊपर उठती है और फिर किसी एक चक्र पर जाकर रुकती है। जिस चक्र पर जाकर कुण्डलिनी रूकती है उस चक्र को और उससे नीचे के सभी चक्रों में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को हमेशा के लिए समाप्त कर देती है और चक्र को स्वस्थ बना देती है।

कुण्डलिनी जागृत होने के समय व्यक्ति को देवताओं के दर्शन होने लगते हैं। आँखों के सामने क्रम से काला, पीला और नीला रंग आने लगता है। व्यक्ति को अपना शरीर गुब्बारे की तरह हल्का लगने लगता है। रीढ़ में कम्पन होने लगता है और सिर में सहस्रार चक्र पर चीटियां चलने जैसे कई अनुभव होते हैं।

कुण्डलिनी जागृत होने पर व्यक्ति सांसारिक दुनिया से दूर होने लगता है और अध्यात्म की ओर उसका गहरा रुझान होने लगता है। कुंडली के जागृत होने से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्ति को सिद्धि और शक्ति का अनुभव होने लगता है।

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