कुपोषण के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

अक्टूबर 6, 2017

कुपोषण एक ऐसा शब्द है जिसे आपने कभी ना कभी और कहीं ना कहीं सुना ही होगा। यह किसी बीमारी की तरह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इससे पीड़ित बच्चों में एकाग्रता की कमी होती है। इसकी चपेट में आने का मुख्य कारण है शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना। शरीर में विटामिन ए की कमी होने का मतलब है इसे आमत्रंण देना। वहीं आयोडीन की कम से बच्चों के मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ता है। कुपोषण के शिकार बच्चे अपनी उम्र से काफी कम दिखते हैं। वहीं उन्हें चीजें जल्दी समझ में नहीं आती हैं।

कुपोषण के लक्षण – इसकी चपेट में मौजूद लोग हमेशा थके हुए महसूस करते हैं, उनकी आंखे धंसी होती हैं, उनके शरीर की रोग-पतिरोधक क्षमता यानी कि इम्युनिटी सिस्टम कमजोर रहता है। इसके अलावा उनकी त्वचा और बाल रुखे रहते हैं। मसूड़ों में सूजन, दांतो में सड़न, विकास में कमी, पेट फूलना, ज्यादा रोना, चिड़चिड़ापन और मांस पेशियों में दर्द होना भी इसके लक्षण हैं। अगर कुपोषण गंभीर परिस्थिति में पहुंच जाए तो उससे हड्डियों-जोड़ों में दर्द, हड्डियों का दिखना, मांसपेशियों में कमजोरी, नाखूनों का अपने आप टूटना, बालों का झड़ना और अचानक से रंग बदलना, भूख का ना लगना, बच्चों का बिना किसी वजह के रोना जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर आपको किसी में इस तरह के लक्षण नजर आते हैं तो उन्हें नजरअंदाज ना करें।

आइये आपको कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिनकी मदद से आप इस बीमारी को मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं।

कुपोषण से बचने के कुछ घरेलू उपाय-

“कब्ज को दूर करने के असरदार घरेलू उपाय”

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