कुष्ठ रोग या लेप्रोसी एक प्रकार का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो ‘माइकोबैक्टेरियम लेप्री’ बैक्टीरिया के कारण होता है। ये इन्फेक्शन लम्बे समय तक लगातार बढ़ता रहता है और हर उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इस इन्फेक्शन से शरीर की नसें, नाक की परत, ऊपरी श्वसन तंत्र और हाथ-पैर प्रभावित होते हैं। इस रोग में त्वचा में घाव हो जाते हैं और मांसपेशियां भी कमज़ोर हो जाती हैं। ये रोग इतना प्रभावी होता है कि अगर समय रहते इसका इलाज ना किया जाये तो व्यक्ति विकलांग भी हो सकता है।

कुष्ठ रोग के लक्षणों की पहचान करके इसका तुरंत इलाज करना संभव हो सकता है। आइये, जानते हैं इस रोग के लक्षणों को-

  • स्पर्श का अहसास ना होना
  • तापमान में होने वाले बदलाव का अनुभव ना होना
  • सुई जैसी चुभन का अनुभव होना
  • त्वचा पर फफोले, फोड़े और चकत्ते पड़ना
  • पलके झपकना कम होना

कुष्ठ रोग बढ़ने के साथ उँगलियाँ छोटी होने लगती हैं और चेहरे का रूप बिगड़ने लगता है।

कुष्ठ रोग फैलने का कारण – पहले ऐसा माना जाता था कि ये रोग हाथ मिलाने, गले लगने, साथ बैठकर खाना खाने से और गर्भवती माँ से उसके शिशु में फैलता है जबकि ऐसा नहीं होता है बल्कि जब कोई कुष्ठ रोगी खुली हवा में खांसता या छींकता है तो उसके मुँह से निकलने वाले तरल पदार्थ की छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती है जिनमें कुष्ठ रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया होते हैं और जब किसी स्वस्थ व्यक्ति द्वारा इस हवा में सांस लेने के दौरान वो छोटी बूंदें उसके शरीर में प्रवेश कर जाती हैं तो वो व्यक्ति भी इस रोग से ग्रस्त हो जाता है।

इसके अलावा कुपोषण के शिकार होने, लम्बे समय तक कुष्ठ रोग से ग्रस्त व्यक्ति के साथ करीब संपर्क में रहने, भीड़भाड़ के क्षेत्रों में जाने, नदी-तालाब में नहाने और एक ही बिस्तर की चादर का लगातार इस्तेमाल करते रहने से भी कुष्ठ रोग होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि कुष्ठ रोग क्या होता है और ये कैसे फैलता है इसलिए आप अपने आप को सुरक्षित बनाये रखिये और अगर आपके किसी परिचित को ये रोग है तो उनके साथ सद्भाव रखिए और उन्हें और उनके परिवार को कुष्ठ रोग के इलाज के प्रति जागरूक करिये।

उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमन्द भी साबित होगी।

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