कुत्ते रंगों को क्यों नहीं देख पाते है?

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आइये जानते हैं कुत्ते रंगों को क्यों नहीं देख पाते है। इंसान के वफादार जानवरों में सबसे पहले कुत्तों का नाम आता है जो अपने मालिक के लिए जान देने में भी पीछे नहीं रहते। इन कुत्तों में पायी जाने वाली बहुत सी ख़ास बातों में से एक रोचक बात ये है कि कुत्ते रंगों को नहीं देख पाते हैं।

किसी वस्तु या स्थान को पहचानने के लिए रंग उनकी मदद नहीं करता है बल्कि कुत्तों के सूंघने की तीव्र शक्ति ही उनकी मदद करती है। ऐसे में रंगों और कुत्तों के बीच की इस गुत्थी को सुलझाना रोचक रहेगा इसलिए आज जागरूक पर इसी बारे में बात करते हैं।

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कुत्ते रंगों को क्यों नहीं देख पाते है?

इसे समझने के लिए हमारी आँखों से जुड़ी थोड़ी जानकारी लेनी होगी। हमारी आँखों में शंकु (कोन) कोशिकाएं और शलाका (रॉड) कोशिकाएं पायी जाती हैं। जिनमें से शंकु कोशिकाओं का सम्बन्ध रंग को पहचानने और ज्यादा प्रकाश में काम करने से होता है जबकि शलाका कोशिकाओं का सम्बन्ध कम प्रकाश में देखने से होता है।

हमारी आँख में लगभग 70 करोड़ शंकु कोशिकाएं होती हैं जिनकी मदद लेकर हम रंगों को आसानी से पहचान पाते हैं।

इसके विपरीत कुत्तों की आँखों में पायी जाने वाली शंकु कोशिकाओं यानी कोन सेल्स की संख्या काफी कम होती है जिसके कारण कुत्ते के लिए रंग को पहचानना संभव नहीं हो पाता है।

रंग पहचानने की क्षमता का पता लगाने के लिए कुत्तों पर परीक्षण भी किये गये। इसी तरह एक परीक्षण में कुत्तों को पहले ख़ास तरह की आवाजें सुनाई गयी। इन आवाजों के बाद ही उन्हें खाना दिया जाने लगा। कुछ दिन के प्रशिक्षण के बाद देखा गया कि इन आवाजों को बजाते ही कुत्तों के मुँह में लार भर जाती थी।

इसी प्रयोग को बाद में रंगों के साथ किया गया लेकिन इस बार कुत्ते भोजन पाने की इच्छा होने के बावजूद रंगों में अंतर नहीं कर पाए। इससे स्पष्ट है कि कुत्ते रंग नहीं पहचान सकते।

उम्मीद है जागरूक पर कुत्ते रंगों को क्यों नहीं देख पाते है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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