क्या आप भी रात को दही खाते है, क्या रात में दही खाना सही है?

दही स्वास्थ्य के लिए सेहतमंद है इसमें कोई संदेह नहीं। दही में इतने रोग निवारक गुण होते है की इसकी तुलना कल्पतरु के समान की गई है। दही अच्छे बैक्टीरिया का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है इसके सेवन से पाचन क्रिया को बल मिलता है। दही में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है जिससे दाँत और हड्डियाँ भी मजबूत होती है। अच्छी सेहत के लिए दही को दूध से भी अच्छा विकल्प माना जाता है। दही को आप जिस भी रूप में खाए, बस ताजा दही ही खाए। नियमित एक कटोरी दही खाने से उदर रोग नहीं होते और पेट भी ठंडा रहता है। एक कप दही दैनिक आवश्यकता का लगभग 25% प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है। आपको यह जानकार हैरानी होगी दूध का 32% हिस्सा ही हमारे शरीर के काम आता है जबकि दही का 80% हिस्सा शरीर के काम आ जाता है। इसलिए जिन लोगो को दूध हजम नहीं होता उन्हें भी दही हजम हो जाता है। दही स्वाद में खट्टा, तासीर में गर्म और पचाने में भारी होता है। इसलिए आयुर्वेद एक्सपर्ट रात में दही खाने से मना करते है। उनके अनुसार रात में दही शरीर में कफ को बढ़ावा देता है।

दिन ढलने के साथ शरीर की पाचन शक्ति भी रात को कमजोर हो जाती है और दही को पचाने में समय लगता है। आयुर्वेद के अनुसार दोपहर 2 से 3 बजे तक दही का सेवन उत्तम माना जाता है। अगर आप खाली पेट सुबह दही का सेवन करते है तो अल्सर, एसिडिटी, हाथ-पैरो के दर्द, नेत्र जलन व आंतों के रोगों में आराम मिलता है। रात में दही खाना अगर आपकी मजबूरी या शौक है तो दही में मेथी पावडर या कालीमिर्च मिलाकर खाए, इससे पचने में आसानी होगी।

दही में इतने पौष्टिक गुण होते है जैसे उच्च क़्वालिटी के प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, ज़िंक, पोटेशियम, मैग्नेशियम की प्रचुर मात्रा होती है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन सी- ई, बी 6, बी 12, राइबोफ्लेविन, थाइमिन व पेंटोथेनिक एसिड भी अच्छी मात्रा में होते है। दही में ओमेगा 3 व ओमेगा 6 फैटी एसिड भी होता है। इसलिए शाकाहारी लोगों के लिए तो यह एक अमृत समान है। एक कप दही में लगभग 120 कैलोरी होती है।

अब आपके मन में यह दुविधा होगी जिस दही में इतने सारे गुण है उसे रात में खाने की क्यों मनाही है। आइये पढ़े दही को कब और क्यों नहीं खाना चाहिए।

दही को ना सिर्फ रात में बल्कि बसंत और सर्दी के मौसम में भी नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद धारणा के अनुसार इन मौसम में दही के सेवन से मांसपेशियों व नसों में रुकावट आती है जिससे नर्वस सिस्टम और चेतना कमजोर हो जाती है। जिस कारण शरीर आलस, थकान, अनिद्रा, कमजोरी और विभिन्न रोगों से ग्रस्त हो जाता है।

  • रात में दही के सेवन से फेफड़े में संक्रमण, खाँसी-जुकाम और जोड़ों में दर्द की शिकायत बढ़ती है।
  • पाचन तंत्र कमजोर होता है और उदर रोग की संभावना बढ़ जाती है।
  • आयुर्वेद की माने तो रात के वक्‍त हमारे शरीर में कफ की प्राकृतिक प्रबलता बढ जाती है और रात में दही बलगम को बढ़ावा देता है। जिन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या बनी रहती है उन्हें रात को दही नहीं खाना चाहिए।
  • एलर्जी, उल्टी व खट्टी डकार की समस्या हो सकती है क्योंकि दही में वसा अधिक होता है जिस कारण रात को पच नहीं पाता।
  • वजन बढ़ने का डर भी रहता है। रात को शारीरिक श्रम दिन की तुलना में ना के बराबर होता है। दही रात को हजम नहीं हो पाता और शरीर में फ़ैट जमा होने लगता है।

मांसाहार के साथ दही ना खाए। कब्ज, दमा, श्वास रोग, किसी भी तरह की सूजन, एलर्जी, त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम आदि समस्या में डॉक्टर की सलाह से दही का उचित सेवन करे। खट्टे दही को कभी भी गर्म करके ना खाए। पेट या पेशाब की कोई भी समस्या होने पर दिन में दही के साथ शहद, घी, चीनी और आंवले को मिलाकर खाने से राहत मिलती है। रात के वक्त दही में चीनी मिलाकर बिल्कुल ना खाए। दूध की बनी चीजों के साथ भी दही का सेवन ना करे, वरना अपच की समस्या हो सकती है। अच्छी सेहत के लिए अच्छे खान-पान के साथ यह भी जानना बहुत जरूरी है की कौन सी चीज कब खाई जाए जिससे सेहत को पूरा लाभ मिले। इसलिए रात को दही खाने से बचे क्योंकि यह लापरवाही नुकसान का सौदा भी करा सकती है।

सभी व्यक्ति की तासीर अलग-अलग होती है। इसलिए सभी व्यक्ति को रात में दही खाने से समान समस्या हो यह जरूरी नहीं। अगर आपको कोई भी शारीरिक समस्या हो तो डॉक्टर से संपर्क करके दही की मात्रा और खाने का समय निर्धारित करे। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता क्योंकि आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। हमने जानकारी के आधार पर सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी आपसे साझा की है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल हमेशा करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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