क्या है ब्रेन मैपिंग टेस्ट और कैसे किया जाता है?

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अभी हाल मे मलयालम फिल्म अभिनेता दिलीप, जिन पर अभिनेत्री के यौन शोषण का आरोप लगा है, ने खुद का ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने की बात कही है। पहले भी हम कई बार मीडिया, अख़बार और फिल्मो के माध्यम से ब्रेन मैपिंग की बात सुन चुके हैं। इसका आविष्कार अमेरिकी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. लॉरेंस ए. फार्वेल ने किया था। यह ब्रेन मैपिंग टेस्ट क्यों और कैसे होता है, इसी प्रश्न का उत्तर यहाँ जानने की कोशिश करेंगे।

ब्रेन मैपिंग टेस्ट इस तथ्य पर आधारित है कि परिचित परिस्थितयों, घटनाओं आदि का सामना होने पर मस्तिष्क विशेष तरह की तरंगे उत्सर्जित करता है जिसे वैज्ञानिक P300 कहते हैं। अपराध करते समय अपराधिक साक्ष्य जैसे घटनास्थल और उस दौरान घटी घटनाये तथा वहां मौजूद लोग वस्तुएं आदि मस्तिष्क मे संरक्षित हो जाती हैं और पूरी अपराधिक घटना, घटनास्थल और वहां मौजूद अन्य कारकों की पुनरावृत्ति करने पर तंत्रिका विज्ञान की सहायता से यह पता लगाया जाता है कि ये सारी चीज़ें संदिग्ध व्यक्ति के मस्तिष्क मे पहले से सरंक्षित थी कि नही और अगर संरक्षित होगीं तो उसके मस्तिष्क से विशेष तरंगे P300 निकलेंगी। जो व्यक्ति अपराधी नहीं होगा उसके मस्तिष्क मे ये सारी चीज़ें नही संरक्षित रहेगी और उसके मस्तिष्क से P300 तरंगे नहीं निकलेंगी और इस प्रकार दोषी का पता लगाया जा सकता है।

संदिग्ध व्यक्ति के सिर के चारों तरफ विभिन्न प्रकार के सेंसर लगाये जाते हैं और सामने ही कंप्यूटर स्क्रीन पर मस्तिष्क के चित्र दिखाई देते हैं। प्रश्नकर्ता संदिग्ध व्यक्ति से अपराध से संबधित कुछ साक्ष्यों की फोटो दिखाकर या उससे सम्बन्धित प्रश्न पूछकर यह जानने की कोशिश करता है कि उसका मस्तिष्क इन्हें पहचानता है या नहीं और साथ ही यह भी पूछता है कि क्या वो कोई जानकारी छिपा रहा है और इन सब के आधार पर उसके मस्तिष्क मे मे संरक्षित जानकारी और अपराध की जगह और उस दौरान हुयी घटनाओं से व्यक्ति के मस्तिष्क मे मौजूद जानकारी का मिलान किया जाता है। मिलान होने पर एक खास तरह की तरंगे P300 निकलती है जिसे सामने मौजूद कंप्यूटर स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

इसमे दो तरह की तकनीकों का प्रयोग किया जाता है – 1- EEG( Electro Encephalogram) और 2- ERP(Event Related Potential)
अभी तक के विश्लेषण से लगता है कि जैसे ये कोई जादू की छड़ी है जिसके घुमाते ही हम अपराधी पकड सकते हैं, पर ऐसा नहीं है प्रक्रिया पूर्णरूपेण विश्वसनीय नहीं है यद्दपि अपराधिक जांच मे सहायक जरूर हो सकती है। इसे करते समय आस पास डॉक्टर की एक टीम भी रहती है।

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