इच्छा मृत्यु क्या है?

दिसम्बर 25, 2017

जीवन को बेहतर तरीके से जीने के लिए स्वस्थ शरीर एक आवश्यक साधन होता है जबकि कमज़ोर और गंभीर बीमारी से ग्रस्त शरीर इंसान को निराश और असहाय बना देता है और आपने ऐसे कुछ मामलों के बारे में सुना भी होगा जिनमें मरीज या उनके परिजनों द्वारा इच्छा मृत्यु दिए जाने की गुहार लगायी गयी हो। ऐसे में ये समझना ज़रूरी है कि इच्छा मृत्यु क्या होती है। आइये आज जानते हैं इच्छा मृत्यु के बारे में–

जब कोई व्यक्ति किसी लाइलाज या गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है तो उसे दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए डॉक्टर की मदद से उसके जीवन का अंत करना इच्छा मृत्यु कहलाता है। इसको को दो श्रेणियों में बाँटा गया है – सक्रिय और निष्क्रिय।

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सक्रिय इच्छा मृत्यु में लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के जीवन का अंत, डॉक्टर की सहायता से जहर का इंजेक्शन देने जैसे कदम उठाकर किया जाता है। इच्छा मृत्यु के इस रूप को भारत सहित दुनिया के अधिकतर देशों में क्राइम माना जाता है जबकि कुछ देश ऐसे भी है जहाँ कानून की अनुमति से सक्रिय इच्छा मृत्यु देने का प्रावधान मौजूद है जैसे – फ्रांस और नीदरलैण्ड्स।

निष्क्रिय इच्छा मृत्यु का तरीका सक्रिय से थोड़ा अलग है। ऐसा व्यक्ति जो लाइलाज बीमारी से पीड़ित है और लम्बे समय से कोमा में है, उसके रिश्तेदारों की सहमति पर डॉक्टरों द्वारा जीवन रक्षक उपकरण बंद कर दिए जाने से होने वाली मृत्यु निष्क्रिय इच्छा मृत्यु कहलाती है।

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7 मार्च 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत में निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी थी। ये फैसला मुंबई की नर्स अरुणा शोनबाग को इच्छा मृत्यु दिए जाने के लिए दायर याचिका के बाद दिया गया। अरुणा 42 साल तक कोमा में रही। कोर्ट ने ये याचिका तो ख़ारिज कर दी थी लेकिन निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी थी लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों द्वारा इसे असंगत करार दिया गया, उसके बाद से ये मामला संवैधानिक पीठ के पास लंबित है। अक्टूबर 2017 में भी इच्छा मृत्यु के लिए दायर याचिका के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुयी।

सक्रिय और निष्क्रिय इच्छा मृत्यु में फर्क – सक्रिय इच्छा मृत्यु मरीज की इच्छा से दी जाती है, जब लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खुद के लिए मौत का रास्ता चुनता है जबकि निष्क्रिय इच्छा मृत्यु ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जो कोमा में हो या अपनी इच्छा व्यक्त करने में असमर्थ हो। ऐसे व्यक्ति के रिश्तेदारों और डॉक्टरों की मर्जी से मौत दी जाती है।

इच्छा मृत्यु का प्रकार भले ही कोई सा भी हो, लेकिन इसके लिए अभी तक स्पष्ट राय नहीं बन पायी है। कुछ तर्क इस तरह की मृत्यु का समर्थन करते हैं तो इसका विरोध करने वाले भी कम नहीं है।

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