एंटीबायोटिक क्या होती हैं और ये हमारे शरीर पर कैसे काम करती हैं?

बीमार पड़ने पर एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल आप भी करते होंगे और बहुत से लोगों की तरह आप भी डॉक्टर से पूछे बिना ही कई बार एंटीबायोटिक ले लिया करते होंगे। लेकिन हर बीमारी में एंटीबायोटिक फायदा पहुंचाए ये ज़रूरी नहीं है और इसे ज़्यादा लेने से शरीर को काफी नुकसान भी पहुँच सकता है। ऐसे में ये जान लेना बेहतर होगा कि एंटीबायोटिक क्या होती हैं और ये हमारे शरीर पर कैसे काम करती हैं और इनका सेवन करने से पहले क्या सावधानियां रखी जानी चाहिए। तो चलिए, आज जानते हैं एंटीबायोटिक के बारे में –

एंटीबायोटिक्स किस तरह काम करती हैं – एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टिरियल भी कहा जाता है। जब भी हमारे शरीर पर बैक्टीरिया का आक्रमण होता है तो सामान्य तौर पर हमारा रोग प्रतिरोधक तंत्र उस बैक्टीरिया और उसके इन्फेक्शन को नष्ट कर देता हैं। ये काम हमारे ब्लड में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स करती हैं। लेकिन जब बैक्टीरिया का इन्फेक्शन बहुत गंभीर हो जाता है तो अकेले प्रतिरोधक तंत्र के लिए उससे लड़ना आसान नहीं रह जाता। ऐसे में एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है जो बैक्टीरिया को समाप्त कर देते हैं या फिर उनकी ग्रोथ को धीमा कर देते हैं।

एंटीबायोटिक्स के उपयोग से पहले ध्यान देने योग्य बातें –

  • डॉक्टर की सलाह के बाद ही एंटीबायोटिक्स का सेवन करना चाहिए क्योंकि डॉक्टर हर बीमारी के अनुसार एंटीबायोटिक्स बताते हैं और उनकी बताई मात्रा और समय का ध्यान नहीं रखने की स्थिति में शरीर को नुकसान पहुँच सकता है।
  • एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स लेना चाहिए, तबियत ठीक लगने की स्थिति में इनका सेवन बीच में बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कुछ बैक्टीरिया जीवित रह जाएंगे जो शरीर को दोबारा संक्रमित कर देंगे।
  • इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि हर व्यक्ति को उसके शरीर के अनुसार एंटीबायोटिक्स का लाभ मिलता है इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को दी गयी एंटीबायोटिक्स का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • इन्हें लेने का समय भी महत्वपूर्ण होता है यानि इनका सेवन या तो खाना खाने से एक घंटे पहले या दो घंटे बाद करना चाहिए।

antibiotic1 एंटीबायोटिक क्या होती हैं और ये हमारे शरीर पर कैसे काम करती हैं?

एंटीबायोटिक्स के साइड इफेक्ट्स –

सबसे गंभीर इन्फेक्शन के ली जाने वाली क्लिंडामाइसिन एंटीबायोटिक दवा लेने पर ज़्यादा साइड इफेक्ट्स दिखाई देते हैं लेकिन पेनिसिलीन, सेफैलोस्पोरिन और इरिथ्रोमाइसिन लेने पर भी ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

  • असामान्य ब्लड क्लोटिंग
  • किडनी में स्टोन बनना
  • मुँह, पाचन मार्ग और योनि में फंगल इन्फेक्शन
  • एलर्जिक रिएक्शन होना
  • सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशीलता
  • बड़ी आंत में सूजन से डायरिया हो जाना
  • ज़्यादा मात्रा में सेवन से मोटापा बढ़ना
  • रोग प्रतिरोधक तंत्र पर विपरीत प्रभाव क्योंकि एंटीबायोटिक दवाएं आँतों के लाभदायक बैक्टीरिया को मार देती है।

एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल ना करें –

  • प्रेगनेंसी में
  • स्तनपान कराने वाली महिलाएं
  • किडनी या लीवर की किसी समस्या से ग्रस्त लोग
  • दूसरी दवाओं का सेवन करते समय क्योंकि एंटीबायोटिक्स दूसरी दवाओं से रिएक्शन कर लेती हैं।

एंटीबायोटिक दवाएं तब तक आपकी सेहत को सुधारने में आपकी मदद कर सकती हैं जब तक आप उन्हें उचित मात्रा और उचित समय पर,डॉक्टर से सलाह लेकर लें और अब आप ये भी जान चुके हैं कि एंटीबायोटिक हमारे शरीर को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए किस तरह से कार्य करती है और इनके सेवन के दौरान हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसलिए अब एंटीबायोटिक के नुकसान से बचना काफी आसान हो गया है इसलिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करने से पहले इन सारी बातों का ध्यान रखें और अपने शरीर को स्वस्थ और सेहतमंद बनाये रखें।

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