भूकंप क्यों आता है और इसे कैसे मापा जाता है?

भूकंप एक ऐसी त्रासदी है जो हमारे सामान्य जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है और अगर भूकंप की तीव्रता ज़्यादा हो तो भारी नुकसान के अलावा बहुत सी जानें भी चली जाती हैं। देश के किसी ना किसी कोने में भूकंप आते ही रहते हैं जिनसे जन-धन की भारी हानि होती है। ये ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसे रोकने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किये जा सकते, सिवाय अपना बचाव करने के। ऐसे में ये जानना-समझना ज़रूरी है कि आखिर भूकंप क्यों आता है। तो चलिए, आज जानते हैं भूकंप आने के कारण को –

हमारी धरती मुख्य तौर पर 4 परतों से बनी हुयी है – इनर कोर, आउटर कोर, मैन्टल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल परत लिथोस्फेयर कहलाती है। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जो टैक्टोनिक प्लेट्स कहलाती हैं। सामान्य रूप से ये टैक्टोनिक प्लेट्स अपने स्थान पर हिलती रहती हैं और विस्थापित होती रहती हैं। इस सिद्धांत को प्लेट टैक्टोनिक सिद्धांत कहते हैं। लेकिन जब ये प्लेट्स ज़्यादा हिलने-डुलने लगती है तो धरती पर भूकंप आ जाता है।

भूकंप कितनी तीव्रता का है, इसका मापन रिक्टर स्केल के पैमाने से किया जाता है जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहते हैं। इस पैमाने की खोज 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से की थी।

इस स्केल से मापन के दौरान प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुना बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान निकलने वाली ऊर्जा प्रति स्केल 32 गुना बढ़ जाती है। इसका अर्थ ये हुआ कि “3 रिक्टर स्केल” पर भूकंप की जो तीव्रता आएगी, वो तीव्रता “4 रिक्टर स्केल” पर 10 गुना बढ़ जायेगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप के भयावह रूप का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि जब ‘8 रिक्टर पैमाने’ पर भूकंप आता है तो 60 लाख टन विस्फोटक से निकलने वाली ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है।

भूकंप को मापने के लिए मरकेली स्केल भी इस्तेमाल की जाती है लेकिन इस स्केल में भूकंप को तीव्रता की बजाये ताकत के आधार पर मापा जाता है। इस स्केल का प्रयोग कम किया जाता है।

भूकंप के केंद्र यानी एपिसेंटर से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों से भूकंप की तीव्रता का अंदाज़ा लगाया जाता है। ये लहर सैंकड़ों किलोमीटर तक फैली होती है और इससे होने वाला कम्पन धरती में दरारें डाल देता है।

अगर भूकंप धरती की गहराई में आता है तो धरती की सतह पर ज़्यादा नुकसान नहीं होता है लेकिन अगर भूकंप की गहराई उथली होती है तो इससे बाहर निकलने वाली ऊर्जा सतह के काफी करीब होने के कारण भयंकर तबाही और जन-धन की भारी क्षति पहुँचाती है।

भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंप का खतरा हर स्थान पर अलग-अलग है। भूकंप के क्षेत्र के आधार पर भारत को 4 हिस्सों में बांटा गया है – जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5, जिनमें जोन-2 सबसे कम खतरे वाला जोन है जबकि जोन 5 सबसे ज़्यादा खतरनाक जोन माना जाता है। उत्तर-पूर्व के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन-5 में ही आते हैं जबकि दक्षिण के ज़्यादातर हिस्से जोन-2 में आते हैं जहाँ भूकंप का सीमित खतरा रहता है।

इंडोनेशिया और फिलीपींस के समुद्र में आये भूकंप ने सुनामी का रूप ले लिया और भारत, श्रीलंका और अफ्रीका तक लाखों लोगों की जान ले ली। इसी तरह भारत में महाराष्ट्र के लातूर, गुजरात के कच्छ और जम्मू-कश्मीर में भी भयंकर भूकंप आ चुके हैं।

आपको यह लेख कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“सर्दियों में मुंह से भाप क्यों निकलती है?”

अगर ये जानकारी आपको अच्छी लगी तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

शेयर करें

रोचक जानकारियों के लिए सब्सक्राइब करें

Add a comment