क्यों फटते हैं बादल?

बादलों का फटना एक सामान्य घटना है। क्यों फटते हैं बादल आइए जानते हैं। बादल बादल फटने की वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार जब वातावरण में अधिक नमी होती है और हवा का रुख कुछ ऐसा होता है कि जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से मानसूनी बादल हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं और तेज तूफान से बने दबाव के कारण एक जगह पर ही पानी को गिरा देते हैं। बादल इन हवाओं के दबाव के कारण ऊपर की ओर उठने लगते हैं और पहाड़ों से टकराते हैं तब पानी एक साथ बहुत तेज गति से बरसने लगता है।

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पर्यावरण विशेषज्ञों की बात करें तो उनका मानना है कि बादल फटने की घटना उस क्षेत्र में ज्यादा होती है जहां पर जंगल बहुत कम होते हैं। पेड़ों के कटने की वजह से जब सर्द और गर्म हवाएं विपरीत दिशाओं में चल कर टकराती हैं तब बादल फटते हैं और वर्षा की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि वह बाढ़ का रूप ले लेता है। जानकारों का मानना है कि बारिश इतनी तेजी से होती है कि वह जमीन को नम करने के बजाय वहाँ की मिट्टी को ही बहा ले जाती है जिससे पानी को जमीन सोख ही नहीं पाती है।

आमतौर पर यह माना जाता है कि बादलों के फटने की घटना पहाडी क्षेत्रों में ही ज्यादा होती है लेकिन अगर आपको याद हो तो जुलाई 2005 में मुंबई में बादल फटने के कारण काफी नुकसान हुआ था। अगर हम विदेशों की बात करें तो अगस्त 1906 में अमेरिका के गिनी वर्जीनिया में बादल फटने से लगभग 9.2 इंच बारिश हुई थी और ढेरों नुकसान हुआ था। बादलों को फटने से रोकने का कोई ठोस उपाय नहीं है लेकिन अगर पानी के निकलने की जगह सही हो, घरों की बनावट एकदम ठीक हो और इसके साथ ही प्रकृति के साथ सबका संतुलन बढ़िया हो तो इस घटना को रोका तो नहीं जा सकता लेकिन कम जरुर किया जा सकता है जिससे जानमाल का कम से कम नुकसान होगा।

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मौसम विभाग के अनुसार भारत में मानसून के समय बादल उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हैं और हिमालय इनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। ये बादल जरा सी भी गर्मी सहन नहीं कर पाते हैं और जैसे ही गर्म हवाओं के संपर्क में ये आते हैं तो ये फट जाते हैं और भयंकर बारिश होने लगती है।

बादलों के फटने के बारे में जानने से पहले हमें बादलों के बारे में जानना होगा कि वो कौन से बादल हैं जो फटते हैं। दरअसल बादलों को तीन भागों में बांटा गया है पहले पार्ट में क्युमुलोनिम्बस, निम्बोस्ट्रेट्स और स्ट्रेटोक्युमुलस बादल होते हैं, दूसरे भाग में आल्टोस्ट्रेट्स और आल्टोक्युमुलस बादल होते हैं और तीसरे भाग में साइरोक्युमुलस और साइरोस्ट्रेट्स बादल होते हैं। बादल फटने की घटना के लिए क्युमुलोनिंबस बादल विशेषतौर पर जिम्मेदार होते हैं। जब इन बादलों में नमीं पहुँचाना बंद हो जाती है तो ये फट जाते हैं और तेजी से बरसने लगते हैं। क्युमुलोनिंबस बादलों के बरसने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि मानो आसमान से पूरी नदी ही जमीन पर उतर आई हो।

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