लहसुन और प्याज को तामसिक भोजन क्यों माना जाता है?

खाने के ज़ायके को बढ़ाने में लहसुन और प्याज का कितना बड़ा हाथ होता है, ये आप भी बखूबी जानते हैं। इन दोनों सब्ज़ियों को मिलाने के बाद खाना निश्चित रूप से लजीज़ बनता है लेकिन कई बार आपने भी ज़रूर देखा-सुना होगा कि प्याज और लहसुन को खाने से परहेज किया जाता है, विशेषकर ब्राह्मणों और जैनी समुदाय के लोगों द्वारा और ऐसा किये जाने के पीछे तर्क दिया जाता है कि लहसुन और प्याज तामसिक भोजन है जो हमारी प्रवृत्ति को खराब कर सकते हैं।

ऐसे में आप भी सोचा करते होंगे कि आखिर तामसिक भोजन क्या होता है और लहसुन और प्याज जैसी स्वादिष्ट सब्ज़ियों को इस श्रेणी में रखने के पीछे क्या कारण है। ऐसा माना जाता है कि भोजन हमारे मन पर सीधा प्रभाव डालता है और जैसा अन्न हम खाते हैं वैसे ही विचार हमारे बनते जाते हैं। ऐसे में क्यों ना आज, हम इससे जुड़े पौराणिक और सामाजिक कारणों को जानें। तो चलिए, आज आपको बताते हैं लहसुन और प्याज को तामसिक भोजन मानकर इससे परहेज करने के कारणों के बारे में-

आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है – सात्विक, राजसिक और तामसिक। इनमें से सात्विक भोजन करने से शान्ति, संयम, पवित्रता और मन की शांति जैसे गुण विकसित होते हैं वहीँ राजसिक भोजन करने से जूनून और खुशी जैसे गुणों में बढ़ोतरी होती है और तामसिक भोजन क्रोध, जूनून, अहंकार और विनाश जैसे अवगुणों को बढ़ावा देता है।

दूध, घी, आटा, चावल, मूंग, लौकी, परवल, करेला सात्विक पदार्थों में आते हैं वहीँ तीखे, खट्टे, चटपटे खाद्य पदार्थ और मिठाईयां रजोगुण को बढ़ाते हैं और लहसुन-प्याज, मांस-मछली और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ तामसिक श्रेणी में रखे जाते हैं।

आइये, अब आपको बताते हैं प्याज-लहसुन से जुड़ी पौराणिक कथा – ऐसा कहा जाता है कि समुद्रमंथन से निकले अमृत को जब भगवान विष्णु, रूप बदलकर देवताओं में बाँट रहे थे तभी वहां छल से दो राक्षस राहु और केतु भी पहुँच गए और उन्हें भी अमृत की कुछ बूंदें मिल गयीं लेकिन जब भगवान विष्णु को राक्षसों के इस छल का पता चला तो उन्होंने क्रोधित होकर उन दोनों राक्षसों के सिर धड़ से अलग कर दिए।

सिर काटे जाने पर अमृत की कुछ बूंदें जमीन पर भी गिर गयी जिनसे प्याज और लहसुन का जन्म हुआ और अमृत से उपजी होने के कारण इन दोनों ही सब्जियों में रोगों से लड़ने वाले अमृत समान गुण मौजूद हैं लेकिन राक्षसों के मुँह से होकर जमीन पर गिरने के कारण इनमें तेज़ गंध आती है और इन्हें अपवित्र माना जाता है।

सामाजिक कारण – लहसुन और प्याज दोनों की तासीर गर्म होती है यानी इन्हें खाने से शरीर में गर्मी पैदा होकर ऊर्जा उत्पन्न होती है इसलिए इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। शरीर को गर्मी प्रदान करने के कारण इन दोनों के सेवन से काम-वासना की इच्छा में बढ़ोतरी होने लगती है जिसके कारण शरीर और मन में तामसिक और वासना प्रवृत्ति बढ़ने से मन अध्यात्म से भटकने लगता है और उसकी प्रवृत्ति उग्र और असामाजिक होने लगती है।

दोस्तों, हमारे आहार का हमारे तन-मन पर सीधा प्रभाव पड़ता है और आज आपने तामसिक भोजन की प्रकृति के बारे में भी जान लिया है और लहसुन-प्याज को तामसिक भोजन में रखे जाने के कारणों से भी आप परिचित हो चुके हैं।

अब ये आपका चुनाव है कि इन धारणाओं और मान्यताओं को आप किस स्तर तक स्वीकारना चाहते हैं और अपने आहार में लहसुन और प्याज की कितनी मात्रा को शामिल करना चाहते हैं। बस इतना ज़रूर ध्यान रखियेगा कि आप भोजन में जिन चीज़ों को शामिल करें, वो आपके तन-मन को स्वस्थ और संतुलित बनाने में सहयोग करे, ना कि तन-मन से जुड़ी आपकी मुश्किलों को बढ़ाएं।

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“ज्यादा लहसुन खाना हो सकता है बेहद हानिकारक”

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