चलिए एक सवाल खुद से पूछें, कितना प्यार करते हैं हम भारत से।!

26 जनवरी अब एक दिन पीछे छूट चुका है हम सभी ने 26 जनवरी को अपने देशभक्त होने का सबूत फेसबुक से लेकर सारे उन सोशल नेटवर्क पर दे दिया जहाँ पर हम अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते थे। पर एक सवाल यही बच जाता है की क्या यही देश प्रेम है ?? क्या मुझे भारतीय होने की ख़ुशी है ??

चलिए आज कुछ ऐसी बातों का विश्लेषण करते हैं जहाँ यह बात कुछ धूमिल सी लगती है।

1. हम सभी लोग अपने द्वारा उत्पन्न होने वाले कचरे के लिए ज़िम्मेदार तो हैं पर उसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेते। कचरा फैलाते तो हैं पर कभी यह नहीं सोचते की इसको हमे ही साफ करना पड़ेगा। फिर वही सवाल आ जाता है की में ही क्योँ ? अगर इसका जवाब दिया जाये तो सिर्फ यह ही दे सकते हैं की देश प्रेम का मतलब सिर्फ सरहद की सुरक्षा नहीं है इसका अर्थ यह भी है की हम जितना हो सके उतना इसे साफ रखें। ज़रा सोचिये क्या आप यह विरासत अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए छोड़ के जाना चाहेंगे।

2. हम भारत माता की जय बोलने में कोई शर्म महसूस नहीं करते पर फिर भी समाज में नारी का वो सम्मान नहीं है जो होना चाहिए ऐसा क्योँ है ? इसका जवाब अगर माँगा जाये तो अधिकांश लोग यही बोलते हैं की हम तो सम्मान करते है, मगर समस्या क्या है आप जानते है ? हम सम्मान करते भी हों मगर यदि हमारे सामने किसी महिला पर अत्याचार हो तो हम चुप रहते हैं। आवाज़ नहीं उठाना भी एक अपराध ही है यह बात हम भी जानते हैं अगर पुरुष बहुल समाज रहेगा तो इस समाज की तरक्क़ी असंभव है।

3. हमारी न्याय पालिका ने हर जगह के लिए कुछ नियम कायदे बनाये हैं, मगर क्या हम सभी नियमों का पालन करते हैं? हमें हर जगह निर्देश की जरुरत ही क्यों पड़ती है की जूतें यहाँ उतारें, गंदगी न फैलाएं, हम खुद से ही ये सब पालन क्योँ नहीं करते। हम में से कई व्यक्ति ऐसे हैं जो सड़क के नियम का भी पालन नहीं करते हैं ऐसा क्योँ है ? किसी के पास कोई जवाब नहीं है। नियम का पालन करना भी एक देश प्रेम है।

4. हमारे देश में भ्रष्टाचार भी एक अहम मुद्दा है जिसे सुन के सबको ऐसा लगता है की हम यह नहीं करते पर आम जीवन में लगभग हर व्यक्ति भ्रष्टाचार करता है। जैसे हमे कोई कार्य जल्दी करना है उसके लिए हमे अगर पैसा भी देना पड़े तो हम दे देते हैं। ऐसी बहुत सारी जगह हैं जहाँ ये सब होता है। सही मायनो में माना जाये तो जब हम रिश्वत देते हैं तो हमारा काम तो जल्दी हो जाता है मगर हम इस प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं।

5. हम कभी भी बदलाव के लिए पहल नहीं करते चर्चा करते हैं पर खुद से कुछ नहीं करते। इसलिए असहाय महसूस करते हैं अगर हम खुद से ही बदलाव की शुरुआत करें तो यह भी एक देश प्रेम ही होगा।

इस लेख को लिखने का उदेश्य सिर्फ यह था की हम किस तरह ऊपरी मन से देश प्रेम का दिखावा कर रहे हैं मगर शायद हम कही ना कहीं इतने स्वार्थी हो गए हैं की हमें अपने सुख और समृद्धि से ऊपर कुछ दिखता ही नहीं है।

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