पहले विश्व युद्ध की सबसे चर्चित जासूस माता हारी के जीवन का सच

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पहले विश्वयुद्ध की सबसे चर्चित जासूस मानी जाने वाली माता हारी की मौत को इस साल 2017 में 100 साल पूरे हो हो रहे हैं। यूँ तो माता हारी को एक जासूस के तौर पर जाना जाता है लेकिन इनके जासूस होने पर भी विवाद है क्योंकि पूरे तत्वों के साथ अभी तक यह नहीं पता लगाया जा सका है की ये वाकई एक जासूस थीं या नहीं।

आइये जानते हैं माताहारी के जीवन से जुड़ी कुछ अनसुनी और रोचक बातें।

माता हारी का असली नाम

असल में माता हारी का असली नाम था राजकुमारी गीरट्रुइडा मार्गरेटा जेले। 1876 में नीदरलैंड्स में जन्मी मार्गरेटा के पिता टोपियां बनाने का काम किया करते थे और अपनी 14 वर्ष की उम्र में मार्गरेटा की मां की मृत्यु हो गई थी। मार्गरेटा की इच्छा थी कि वह पूरी दुनिया घूमे।

शादी

मार्गरेटा ने इंडोनेशिया में तैनात एक डच अफसर से शादी रचाई। उस समय मार्गरेटा की उम्र सिर्फ 18 साल थी जबकि इनका पति इनसे दुगनी उम्र का था। शादी के बाद मार्गरेटा ज्यादा दिनों तक अपने पति के साथ नहीं रह पाई क्योंकि इनका पति एक शराबी था और इनके साथ दुर्व्यवहार करता था। इस कारण मार्गरेटा ने अपने पति को छोड़ दिया।

तलाक

अपने पति से अलग होने के बाद मार्गरेटा ने जावा डांस सीखना शुरु किया लेकिन कुछ समय बाद इनके पति इन्हें मनाकर वापस घर ले आये और दोनों आपसी सहमति से फिर से साथ में रहने लगे। इनके 2 बच्चे भी हुए लेकिन 1902 में इनमें फिर विवाद हो गया और इन्होंने एक दूसरे को तलाक दे दिया।

डांस कैरियर

अपने पति से तलाक लेने के बाद मार्गरेटा पेरिस आ गई और वहीं इन्होंने अपना डांस कैरियर शुरू किया। फ्रांसीसी सेना के कई अफसर मार्गरेटा की खूबसूरती और इनके डांस के दीवाने हो गए। यूरोप में अपने जबरदस्त स्टेज डांस के चलते मार्गरेटा को नया नाम मिला और वह था “माता हारी”।

पहला विश्व युद्ध

पहले विश्वयुद्ध के दौरान माता हारी अपने डांसिंग कैरियर के चरम पर थीं। उस समय माता हारी काफी चर्चित नाम हो चुकी थी और लोग इनके दीवाने हो गए थे। पहले विश्व युद्ध के दौरान नीदरलैंड्स प्रभावित क्षेत्र से अलग था इसलिए माता-हारी नीदरलैंड्स चली गयी। लेकिन नीदरलैंड्स में माता हारी का मन नहीं लगा और जर्मनी के एक अफसर के आग्रह पर माता हारी वापस पेरिस आ गई। हालांकि फिर इन पर जर्मनी के लिए जासूसी करने के आरोप लगे और यह कहा जाने लगा कि माता हारी फ्रांसीसी अफसरों को लुभा कर उनके राज मालूम किया करती है।

जासूसी के आरोप

माताहारी पर जासूसी का इतना संदेह होने लगा कि 24 जुलाई 1917 को इन्हें जासूसी के आरोप में जेल भी भेज दिया गया था और इसके बाद 15 अक्टूबर को इन्हें गोली मारकर सजा-ए-मौत दी गई थी। कहा जाता है कि जब इन्हें गोली से उड़ाया जा रहा था तो इन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांधने से मना कर दिया था और मरते वक्त तक भी इन्होंने अपना जुर्म नहीं खुद कबूला था। माता हारी वाकई जासूस थी या नहीं इसके लिए अगले 20 सालों तक जर्मनी, इंग्लैंड और नीदरलैंड्स के अधिकारी जाँच करते रहे लेकिन उन्हें कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया।

इनके जीवन पर आधारित उपन्यास

माता हारी के जीवन पर एक मशहूर लेखक पाउलो कोएलो ने एक उपन्यास भी लिखा जिसका नाम था ‘द स्पाई’। कोएलो ने अपने उपन्यास में माता हारी के लिए लिखा की माता हारी एक आजाद खयालों वाली महिला थी जिन्होंने अपने लिए एक आजाद जीवन का चुनाव किया जो किसी भी बंधनों से मुक्त था। कोएलो ने अपने उपन्यास के माध्यम से माता हारी के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा कि माता हारी का जुर्म सिर्फ इतना था कि वह एक आजाद महिला थी।

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