लिफ्ट का आविष्कार किसने किया था?

आइये जानते हैं लिफ्ट का आविष्कार किसने किया था। टेक्नोलॉजी के इस दौर में हर काम बटन दबाते ही हो जाता है। फिर चाहे टीवी चलाना हो या ऊँची-ऊँची बिल्डिंग में एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर पहुंचना ही क्यों ना हो।

आज ये काम बड़ी आसानी से हो जाता है तभी तो आज आसमान को छूने वाली इमारतें बनने लगी हैं, लेकिन ज़रा सोचिये कि अगर लिफ्ट ना होती तो क्या ये संभव होता कि हम पहली मंजिल से बीसवीं मंज़िल तक सीढ़ियां चढ़कर जा पाते?

नहीं ना, इसलिए इन भव्य और ऊँची बिल्डिंग्स को सफल बनाने में लिफ्ट के महत्त्व को कम नहीं आंका जा सकता जिसकी बदौलत ही आज ऐसी बिल्डिंग्स में घर और ऑफिस लेने की हिम्मत जुटाई जाती है वरना बार-बार इतनी सीढ़ियां चढ़ने-उतरने का विचार ही हमें उलझन में डाल देता।

ऐसे में हमारी मददगार रहने वाली लिफ्ट के बारे में जानना भी रोचक हो सकता है इसलिए क्यों ना आज, लिफ्ट के आविष्कार के बारे में बात करें। तो चलिए, आज जानते हैं लिफ्ट के आविष्कार के बारे में।

लिफ्ट का आविष्कार

भले ही लिफ्ट एक मॉडर्न इन्वेंशन समझी जाती है लेकिन इसकी जरुरत बहुत पहले ही महसूस कर ली गयी थी और तभी से लिफ्ट के आविष्कार का सफर शुरू हो गया था। सबसे पहले 236 BC में रोमन आर्किटेक्ट Vitruvius ने लिफ्ट का निर्माण किया और इसके बारे में आर्किमिडीज़ को जानकारी दी।

उसके बाद 1743 में फ्रांस के King Louis के लिए लिफ्ट बनायी गयी जिसे flying chair नाम दिया गया। king की बालकनी में रखी गयी इस फ्लाइंग चेयर को मैनुअली ऑपरेट किया जाता था और इसका इस्तेमाल किंग को एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर ले जाने के लिए किया जाता था।

पहली स्क्रू ड्राइव एलीवेटर बनाने का श्रेय Ivan Kulibin को जाता है और उनकी इस खोज ने मॉडर्न एलीवेटर के आविष्कार में काफी सहयोग किया।

साल 1852 में Elisha Otis ने सेफ्टी एलीवेटर का आविष्कार किया इसलिए लिफ्ट/एलिवेटर के आविष्कारक के रुप में Elisha Otis को पहचान मिली। इसके बाद बहुत से प्रयोगों और सुधार के बाद हमें मॉडर्न एलिवेटर की सुविधा मिली।

भारत की पहली लिफ्ट Otis द्वारा 1892 में कोलकाता के राजभवन में स्थापित की गयी थी।

उम्मीद है जागरूक पर लिफ्ट का आविष्कार कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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