लिव-इन रिलेशनशिप में रहने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

आजकल लिव-इन रिलेशनशिप का चलन हमारे देश के बड़े-बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। जब दो वयस्क कपल एक दूसरे की मर्जी से शादी किए बिना एक साथ रहते हैं तो उसे लिव-इन रिलेशनशिप के नाम से जाना जाता है। आज के दौर में लड़के-लड़कियां अपना जीवनसाथी खुद चुनना चाहते हैं और शादी से पहले वे एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझना चाहते हैं। इसलिए लिव-इन रिलेशनशिप कपल को साथ रहकर एक-दूसरे को समझने का अच्छा माध्यम साबित हो रहा है।

हालांकि देखा जाए तो हमारा भारतीय समाज शादी से पहले स्त्री-पुरुष के साथ रहने की प्रथा का विरोध करता आ रहा है। लेकिन अब तो लिव-इन रिलेशनशिप के संबंधों को सुप्रीम कोर्ट से भी मान्यता मिल गई है। कोर्ट के अनुसार अगर दो कपल आपसी सहमति से एक साथ रह रहे हैं तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा। यह लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स के लिए काफी अच्छी खबर है।

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने से पहले इन बातों का ध्यान रखें-

मेंटली और इमोशनली मजबूत हों – ज्यादातर युवा कपल्स एक दूसरे को अच्छे से जानने और समझने के लिए लिव-इन में रहने का रास्ता चुनते हैं। इस दौरान अगर आपमें से किसी को भी एक दूसरे की आदतें नहीं पसंद आती हैं या साथ रहने के बाद आप एक दूसरे की आदतों को एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे हों तो आपको अलग होने की पूरी आजादी होती है। चूंकि लिव-इन पहले एक दूसरे को जानने-समझने का माध्यम है फिर शादी का। इसलिए यदि किसी वजह से आपका रिश्ता टूटता है तो आप इस सदमें को झेलने और इससे बाहर निकलने के लिए मेंटली और इमोशनली रूप से तैयार रहें।

पार्टनर पर विश्वास हो – लिव-इन में रहने से पहले कपल्स एक-दूसरे को पहले से अच्छी तरह से जानते हों और एक दूसरे पर भरोसा करते हों। ऐसी लड़कियां जिन्हें अपने पार्टनर पर जरा भी संदेह हो तो उसके साथ लिव-इन में रहने से बचना चाहिए। अगर एक-दूसरे के प्रति महज अट्रैक्शन है या एकतरफा प्यार है तो भी लिव-इन रिलेशनशिप में न रहें। लिव-इन में रहने का डिसीजन आपका अपना है इसलिए उसके चुनौतियों से लड़ने को तैयार रहें।

यदि आपकी फेमिली आपके पार्टनर को एक्सेप्ट न करे – यदि आप अपनी पसंद के किसी ऐसे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं जिसे अंत में आपकी फेमिली स्वीकार नहीं करेगी तो ऐसे व्यक्ति के साथ लिव-इन में न रहें। अगर आप शादी से पहले अपने माता-पिता की रजामंदी चाहते हैं तो भी ऐसे व्यक्ति के साथ लिव-इन में न रहें जिन्हें वे पसंद न करते हों।

लंबे समय तक लिव-इन में न रहें – कहा जाता है कि किसी को जांचने-परखने के लिए जरूरी नहीं कि हम उसके साथ कई साल गुजारें। इसलिए यदि आप एक दूसरे के साथ लिव-इन में रहते हैं तो ज्यादा लंबा वक्त लगाने की बजाय ज्यादा से ज्यादा एक दूसरे को जानने-समझने की कोशिश करें और दोनों मिलकर कोई फाइनल डिसीजन ले लें।

दूसरों का देखकर यह रास्ता न चुनें – आजकल के युवाओं पर फिल्मों का ज्यादा असर होता है और वे लिव-इन में रहने का डिसीजन फौरन ले लेते हैं। इसके अलावा यदि आपका कोई दोस्त लिव-इन में रह रहा हो तो उसे देखकर भी आप जल्दी से यह निर्णय ले लेते हैं। आपको दूसरों की देखा-देखी करके नहीं बल्कि खुद सोच-विचार कर लिव-इन में रहने का फैसला करना चाहिए। क्योंकि जैसे ही आप लिव-इन में रहना शुरू करते हैं आपके सामने कई सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। इसलिए अगर आप दोनों जमाने से लड़ने के लिए तैयार हैं तभी लिव-इन रिलेशनशिप में रहें।

एक बार से ज्यादा लिव-इन में न रहें – यदि आप एक बार अपने पार्टनर के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हों तो दोबारा किसी और के साथ लिव-इन में न रहें। इसके क्या फायदे और नुकसान है आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता है क्योंकि आपके पास एक बार लिव-इन में रहने का अनुभव इकट्ठा हो चुका है।

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