लीवर को मजबूत बनाने के उपाय

मानव शरीर के अंगों में लीवर दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण अंग है। देखा जाए तो शरीर के सभी अंगों का सुचारू रूप से चलना बहुत ही आवश्यक है। अगर शरीर का एक अंग भी अपना कार्य ठीक से ना करे तो शरीर को बिगड़ने में देर नहीं लगती। शरीर के सभी अंगों में अगर लीवर की कार्यप्रणाली बिगड़ जाए तो शरीर बीमारियों का घर हो जाता है। लीवर के अस्वस्थ होने का मुख्य कारण वर्तमान जीवनशैली को पूर्णरूप से जाता है। ऐसी जीवनशैली में लीवर को मजबूत कैसे रखें उसका ख्याल हमें जरूर रखना चाहिए।

लीवर क्या है? – लीवर को हिन्दी में जिगर या यकृत के नाम से जाना जाता है। यह मानवीय शरीर के अंदरूनी अंगों में सबसे विशाल और महत्वपूर्ण अंग है। इसका भार 1500 ग्राम से 2000 ग्राम तक हो सकता है। यह लाल और भूरे रंग का होता है। हाथ लगाने पर यह रबड़ की तरह महसूस होता है। लीवर पेट के दाहिने हिस्से की पसलियों के पीछे होता है।

लीवर का कार्य क्या है? – लीवर का संबंध सीधे तौर पर पाचन क्रिया से होता है इस जानकारी से तो सभी अवगत है। लेकिन लीवर का कार्य सिर्फ पाचन क्रिया तक ही सीमित नहीं है। यह शरीर की लगभग 500 क्रियाओं को अपने नियंत्रण में रखता है। ऐसे में अगर लीवर की सेहत पर जरा भी असर पड़ता है तो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली की क्षमता भी नष्ट होने लगती है। आइए लीवर के मुख्य कार्य को सरल भाषा में समझे।

  • पित्त का निर्माण और इसका स्राव करता है। पित्त वसा और विटामिन के अवशोषण के लिए अनिवार्य है।
  • पाचन तंत्र से खून को फिल्टर करता है।
  • जहरीले पदार्थ को लीवर निष्क्रिय कर प्रोटीन का निर्माण करता है जिससे शरीर संक्रमण से बचा रहे।
  • एल्कोहल, दवा, अन्य पदार्थों आदि को अवशोषित करके खून में मिलाता है। साथ में कोलेस्ट्रॉल, हार्मोन आदि का निस्तारण भी करता है।
  • कई प्रकार के एंजाइम को कार्यरत करने के साथ ही पाचन क्रिया के लिए जरूरी एंजाइम्स का निर्माण करता है।
  • ग्लाइकोजेन, विटामिन, खनिज, विटामिन बी12, ग्लूकोज और आयरन आदि का संग्रहण करता है।
  • शरीर से विषाक्त टोक्सिन को बाहर निकालने यानी मलत्याग का मुख्य कार्य करता है।
  • बहते रक्त को रोकने वाले तत्वों का निर्माण करता है।
  • चयापचय को मजबूत बनाता है।
  • कई प्रकार के महत्वपूर्ण रसायन का निर्माण व स्राव करता है जो अन्य अंगों के लिए अति आवश्यक होते है।

लीवर द्वारा निर्मित पित्त एक तरह का क्षारीय पदार्थ अल्कलाइन होता है जो पेट के एसिड को कम करके एसिड से होने वाले नुकसान से शरीर की रक्षा करता है। पित्त के बिना वसा का पाचन संभव नही और ना ही शरीर भोजन से विटामिन ग्रहण कर पाता है जो वसा में घुलनशील होते है जैसे – विटामिन A, विटामिन D, विटामिन E, विटामिन K आदि। पित्ताशय को अपना काम सही ढंग से करने के लिए लीवर द्वारा निर्मित पित्त की आवश्यकता पड़ती है। पित्ताशय में जैसे ही कुछ मात्रा पित्त की जाती है पित्त गाढ़ा होने लगता है उसके बाद पित्ताशय आवश्यकता अनुसार इसका स्राव करता है। यह प्रणाली पाचन की क्रिया को सही तरीके से चलाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

भोजन के पचने के समय शरीर में अमोनिया बनने लगती है जो शरीर के लिए विषाक्त हो सकती है लेकिन लीवर इसे यूरिया में बदल कर गुर्दे के माध्यम से पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है। शरीर जब भी बीमार होता है या शरीर को जरूरत के वक्त भोजन नही मिलता तब शरीर को ऊर्जा यानी ग्लूकोज की जरूरत पड़ती है तब इस कमी की पूर्ति लीवर करता है यह ग्लूकोज ग्लाइकोजेन के रूप में लीवर में संगृहीत रहता है।

लीवर के रोग ग्रस्त होने के क्या कारण है?

  • अधिक देर तक बैठने की आदत से लीवर में फैट जमा होने लगता है जिससे लीवर का आकार असामान्य हो जाता है। जिसे फैटी लीवर कहते है इसका मुख्य कारण मोटापा, अधिक धूम्रपान, मधुमेह, शराब का अधिक सेवन, खून में अधिक फैट, अनुवांशिकता, तैलीय पदार्थ का अधिक सेवन, पेरासिटामोल का अधिक सेवन या किसी भी दवा के दुष्परिणाम।
  • लीवर को नुकसान पहुँचने पर यह अपनी मरम्मत करने में स्वंय सक्षम है। आपको शायद ही यह पता हो मानव शरीर में लीवर एकमात्र ऐसा अंग है जो अपने आप ही स्वंय बन जाता है। अगर लीवर का चौथाई हिस्सा भी बचा हो और सुचारू रूप से अपना कार्य कर रहा हो तो यह अपने आप ही स्वंय को पूर्ण रूप से बना लेता है। लेकिन अगर बार-बार लीवर को क्षति पहुँचती है तो इसमें घाव हो जाता है जो ठीक नही हो पाता और इस अवस्था को सिरोसिस कहते है यह अवस्था लीवर फेल होने का मुख्य कारण बनती है। सिरोसिस जैसी समस्या अधिक शराब के सेवन से होती है।
  • हेपेटाइटस लीवर में होने वाला ऐसा संक्रमण है जिससे लिवर में सूजन या जलन पैदा हो जाती है। इनमे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई आदि होते है। ये संक्रमण वायरस, गन्दगी, दूषित रक्त चढ़ाने के कारण हो सकते है और भी कई संक्रमण होते है जिसके कारण भी लिवर को क्षति पहुँच सकती है। हेपेटाइटिस बी और सी लीवर कैंसर का मुख्य कारण है। आपको जानकार यह आश्चर्य होगा आज के समय में होने वाले कैंसर में से लीवर कैंसर पांचवे स्थान पर है। सतर्कता और नियमित स्वास्थ्य जाँच से लीवर कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जा सकता है। हेपेटाइटिस बी और सी की जाँच और सही तरीके के उपचार व देखभाल से इस गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है।
  • किसी भी तरह के कैंसर के उपचार में प्रयोग होने वाली दवा से भी लीवर को क्षति पहुँचती है। पेरासिटामोल या एंटीबायोटिक का अधिक इस्तेमाल भी लीवर को प्रभावित करता है। कुछ विषैले तत्वों के कारण भी जैसे अधिक समय से अधिक मात्रा में शराब का सेवन करना भी लीवर को नुकसान पहुँचाता है।
  • लीवर शरीर में कई तरह के काम करता है जिस कारण इस पर दबाव बना रहता है या यूँ कहे की मानवीय शरीर में लीवर एक बंद ताले की चाबी की तरह कार्य करता है। हमारे खाने-पीने से लेकर दवा तक को शरीर में अच्छे से पहुँचाने के काम में लीवर की अहम भूमिका होती है। आसान शब्दों में यह कहना उचित होगा लीवर एक ऐसा अंग है जो पूरे शरीर को बांध के रखता है। इसलिए इसके क्षतिग्रस्त होने या संक्रमित होने की संभावना भी कई गुणा होती है। लेकिन फिर भी लोग जागरूक नहीं है इसकी महत्ता को देखते हुए इसका ख्याल रखे और एक उचित जीवनशैली का पालन करे।

क्या लक्षण होते है लीवर खराब होने के?

  • शरीर पर तेज खुजली का होना
  • गहरे पीले रंग का पेशाब आना। यह पीलिया का एक लक्षण है।
  • अधिक समय से असामान्य पीले रंग के दस्त लगना
  • टखने, पेट और पैरों में सूजन, पेट में पानी भर जाना
  • पेट में ऊपर दाएँ हिस्से में दर्द
  • अधिक थकान। जरूरत के समय शरीर को पोषक तत्व, विटामिन या ग्लूकोज का ना मिलने के कारण होता है और ऐसा तभी संभव है जब लीवर खराब होता है और वो इन जरूरी तत्वों का अवशोषण कर शरीर को नहीं दे पा रहा।
  • खून का बहना जल्द बंद ना होना
  • हेपेटाइटिस की समस्या है तो लीवर में दर्द, उल्टी या घबराहट जैसी समस्या हो सकती है
  • सांस में तकलीफ, कमजोरी, अचानक वजन का कम होना जैसी समस्या तब होती है जब लीवर में पर्याप्त प्रोटीन नहीं बनता
  • खराब लीवर अमोनिया का निस्तारण नहीं कर पाता जिससे दिमाग असंतुलित हो सकता है

लीवर को मजबूत कैसे रखा जाए?

1. चीनी और टोटल फैट्स पदार्थ कम लें – मोटापे से बचना है तो यह तो करना ही पड़ेगा। असंतुलित आहार ना ले। अगर आप ऐसा नही करते है तो आगे जाकर आपको फॅटी लिवर के कारण लिवर डॅमेज का सामना भी करना पड़ सकता है।

2. फल और पत्तेदार सब्जियां – नियमित फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर सेब, फलों की स्मूदी या जूस, गाजर, टमाटर, तरबूज, पपीता, अंगूर, मूंगफली, अमरूद, धनिया, चुकंदर, लहसुन, अखरोट और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक करे। इससे लीवर हेल्दि रहेगा। अंगूर और मूंगफली में रिस्वेराट्रोल नामक यौगिक पाया जाता है जिससे लीवर कैंसर को दूर रखा जा सकता है। पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकोली जैसी सब्जियों को आहार में नियमित सामिल करे। क्योंकि इनमें सल्फर अधिक होता है जो टोक्सिन को तेजी से बाहर निकालकर लीवर को साफ रखता है।

3. नींबू – दिन में एक बार नींबू की चाय, सलाद या पानी में निम्बू लें। निम्बू शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायक होता है। यह अग्नाशय की पथरी (गॉलस्टोन्स) को विकसित नही होने देता। इतना ही नही यह आपके हाजमे को भी बढ़ाता है।

4. हल्दी – यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार हैं, जो शरीर से टोक्सिन बाहर निकालने में सहायक है।

5. ग्रीन टी – इसमें प्रचुर मात्रा में केटेकाइन्स और एंटीऑक्सीडेंट होता है जो लिवर की कार्यप्रणाली की क्षमता बढ़ाकर लिवर में वसा के जमाव को कम करने में सहायक बनता है।

6. ओलिव ऑयल – भोजन को बनाने में इस तेल का प्रयोग करें और मीठे से परहेज जरूर रखे। ओलिव ऑयल से लीवर के रोगों का खतरा कम हो जाता है।

7. ज्वार और बाजरा – इनमें मौजूद फाइबर शरीर से टोक्सिन बाहर करने में सहायक है जिससे लीवर की सफाई होती है।

8. व्यायाम – लीवर की सेहत के लिए जहाँ उसकी सफाई जरूरी है वही इसकी कार्यप्रणाली को दुरुस्त बनाने के लिए थोड़ा व्यायाम या कसरत भी जरूरी है। रोजाना नियमित 30 मिनिट की कसरत से लीवर की आयु बढ़ाई जा सकती है। साथ ही पर्याप्त नींद लें। भोजन के बाद 10 – 15 मिनिट टहलने जाए। शराब, तले हुए भोजन और माँसाहारी भोजन आदि के सेवन से बचें।

9. जूस उपवास – व्रत करना लीवर को साफ रखने का एक बेहतरीन तरीका है। व्रत के समय किसी तरह का ठोस आहार नहीं लिया जाता। जिस कारण लीवर को आराम मिलता है और एक निश्चित समय पर फल, जूस या कुछ सब्जियाँ ली जाती है जिसे लीवर बहुत कम समय में आसानी से पचा लेता है। लीवर की सफाई के हमने कई तरीके आपको उपलब्ध करवाए है अपने शरीर की क्षमतानुसार किसी एक का चुनाव करे जो आपके शरीर के लिए सही हो। अगर आपको पहले से कोई समस्या है या मधुमेह है तो अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

10. ध्यान रखे – अपने आस-पास सफाई का विशेष ध्यान रखे। बाहर खुले में मिलने वाली चीजों के सेवन से बचे। कभी भी खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़े तो प्रमाणित जगह से खून ले, जिससे संक्रमण का खतरा ना रहे। हेपेटाइटिस ए तथा बी के टीके लगवाए। सबसे जरूरी बात वजन को कंट्रोल में रखे और हमेशा पोष्टिक आहार का चयन करे और हाँ पानी खूब पिए।

लीवर अपनी कार्यप्रणाली के वक्त कई बार बहुत ही जहरीले पर्दाथों के संपर्क में आ जाता है जिससे कारण लीवर की सेहत और कार्य क्षमता पर सीधे तौर पर असर पड़ता है। जानकारों की माने तो लीवर पर कार्य भार इतना होता है की इसे संक्रमण का खतरा बना रहता है जिससे बीमारियों का डर भी लाजमी है। इसलिए लीवर की सेहत को जरा भी नज़रअंदाज़ ना करे। क्योंकि स्वस्थ लीवर पर ही स्वस्थ शरीर निर्भर है। लीवर को कई प्राकृतिक और सीधी-सादी दिनचर्या में जरा से बदलाव से स्वस्थ और साफ लीवर की शत प्रतिशत कामना कर सकते है।

लीवर के दो मुख्य शत्रु है मोटापा और शराब। अगर आपने इन पर काबू पा लिया तो समझ लीजिए आप लीवर संबंधित समस्या पर भी काबू पा लिए। मोटापा बढ़ने पर अल्ट्रासाउंड, लीवर फंक्शन टेस्ट तथा रक्त की जाँच करवाए। जब जाँच गहराई से होगी तभी तो उपचार सही होगा। संपूर्ण स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी लीवर पर ही टिकी होती है इसलिए सही ख़ान-पान और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर इसे सुरक्षित रखे तभी तो यह आपको सुरक्षित रखेगा। किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करे दर्द निवारक दवा लेकर स्वयं कभी डॉक्टर ना बने यह घातक हो सकता है। सही समय पर सही उपचार लेने से जीवन की रक्षा की जा सकती है।

किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। क्योंकि आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। हमने यह लेख प्रैक्टिकल अनुभव व जानकारी के आधार पर आपसे साझा किया है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करे। आपको यह लेख कैसा लगा। अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है। हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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