भगवान शिव हैं हिन्दू धर्म का मूल

ओम नमः शिवाय।! यह बात तो हम सब जानते हैं की भगवान ही प्रारम्भ और शिव ही अंत है। शिव निर्विरुद्ध है शिव ही मोक्ष है और जिसने शिव भगवान की आराधना करी वो मोक्ष को प्राप्त हो गया। यह बात भी सदियों से प्रामाणिक है की जिसने शिव भगवान का अपमान जाने अनजाने किया है वो कभी भी सुखी नहीं रहा है। तो चलिए आज भगवान शिव की महिमा से आपको अवगत कराते हैं ।

शिव धरा का हर रूप को धारण करते हैं उनकी लंबी-लंबी जटाएँ हैं, उनके हाथ में ‘पिनाक’ धनुष है, जो सत्य का पहला रूप है, शिव ही दिगंबर है। शिव को पुराणो में शंकर और महेश भी कहा गया है। उनकी ललाट के बीच में तीसरा नेत्र है। वे सदा शांत और ध्यान में रहते हैं। इनके जन्म का कहीं भी ज़िक्र नहीं । शिव भगवान को स्वयंभू माना गया है।

कैलाश पर्वत को ही उनका निवास माना गया है। यह बात वैज्ञानिक भी मानते हैं की तिब्बत बहुत ही प्राचीन धरा है और पहले इसके चारों और समुद्र हुआ करता था। यह माना जाता है जहाँ शिव विराजमान है उसके ठीक नीचे पाताल लोक है ऐसा पुराण कहते हैं।

यह माना जाता है की ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की है । भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

शिव भगवान की आराधना हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग पर बिल्वपत्र अर्पित कर शिवलिंग के समीम मंत्र उच्चारण और ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।

महाशिवरात्रि हिन्दुओं के लिए एक मुख्य पर्व है। श्रावण मास में व्रत रखने के पश्चात्य इस पर्व को मनाया जाता है।

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