मैग्लेव ट्रेन के बारे में जानकारी

अक्टूबर 3, 2018

मैग्लेव यानी मैग्नेटिक लैविटेशन और इस भौतिक सिद्धांत पर बनी ट्रेन है मैग्लेव ट्रेन। इस सिद्धांत के अनुसार सुपरकंडक्टर का इस्तेमाल करने से किसी वस्तु को हवा में अटकाया जा सकता है और इसी सिद्धांत पर आधारित ये मैग्लेव ट्रेन जब चलती है तो हवा में तैरते रहने के कारण इसकी सतह और पटरियों के बीच घर्षण नहीं होता है।

मैग्लेव ट्रेन जब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है तब ट्रेन के पहियों और पटरियों के बीच चुम्बकीय शक्ति के जरिये, ट्रेन पटरियों से लगभग 10 सेंटीमीटर ऊपर उठकर चलने लगती है।

ये ट्रेन पटरी से ऊपर चलती है इसलिए रोलिंग घर्षण खत्म हो जाता है जिससे ट्रेन में किसी तरह की टूट-फूट होने की सम्भावना काफी कम हो जाती है।

मैग्लेव ट्रेन में किसी तरह के ईंधन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है बल्कि चुम्बकीय शक्ति उत्पन्न करने के लिए बिजली का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए इस ट्रेन के चलने से किसी तरह का वायु प्रदूषण नहीं होता है।

इतनी तेज़ गति से दौड़ने वाली ये ट्रेन सामान्य ट्रेनों की तुलना में 30% कम ऊर्जा का उपयोग करती है।

कम समय में ज्यादा दूरी तय करने वाली इस ट्रेन की लागत बहुत ज्यादा आती है क्योंकि इसे बनाने के लिए कई दुर्लभ तत्वों की जरुरत पड़ती है।

सामान्य तौर पर ये ट्रेन 305 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलती है लेकिन जापान की मैग्लेव ट्रेन ने इस हाई स्पीड को पीछे छोड़ते हुए 603 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलने का रिकॉर्ड बनाया है। अब आप इस ट्रेन की गति की कल्पना करके देखिये।

जापान की ये हाई स्पीड मैग्लेव ट्रेन इलेक्ट्रो-डायनेमिक सस्पेंशन प्रणाली पर आधारित है।

अगर मैग्लेव ट्रेन भारत में चले तो बिहार से दिल्ली तक का सफर सिर्फ डेढ़ घंटे में ही पूरा कर ले।

भारत में इस ट्रेन के आने की संभावना भी बनी है।

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