महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा

जनवरी 5, 2018

“संसार के अल्पविकसित और गरीब देश तब तक आधुनिक औद्योगिक विकास से दूर रहेंगे जब तक वे परमाणु शक्ति और ऊर्जा का उपयोग नहीं करते हैं।” जेनेवा में ‘अणुशक्ति और शांति’ विषय पर भाषण में ये विचार रखने वाले महान शख्स थे डॉ. होमी जहाँगीर भाभा जिन्हें भारत को परमाणु संपन्न देश की राह पर लाने का श्रेय जाता है।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को बम्बई के एक संपन्न और पढ़े-लिखे परिवार में हुआ। उनके पिता जहांगीर भाभा एक जाने माने वकील थे और उनकी माँ भी ऊँचे घराने से थी।

बचपन में बालक होमी को नींद बहुत कम आया करती थी। डॉ. के अनुसार इसका कारण कोई बीमारी नहीं था बल्कि उनकी कुशाग्र बुद्धि होने के कारण विचारों का प्रवाह इतना तेज़ होता था कि होमी जहाँगीर सो नहीं पाते थे। उनके घर में ही उनके लिए एक लाइब्रेरी बनवा दी गयी जहाँ वो विज्ञान जैसे विषयों की किताबें पढ़ा करते थे।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा बम्बई के जॉन केनन स्कूल से पूरी की और एलीफेस्टन कॉलेज से बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद कैंब्रिज से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री हासिल की। 1934 में पीएचडी की डिग्री लेने वाले होमी जहांगीर की बुद्धि इतनी कुशाग्र थी कि अपनी शिक्षा के दौरान उन्हें स्कॉलरशिप मिलती चली गयी।

फिजिक्स और मैथमेटिक्स में उनकी विशेष रूचि थी। उन्हें आइजेक न्यूटन फेलोशिप मिलने के अलावा रुदरफोर्ड, डेराक, तथा नील्सबेग जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के साथ काम करने का मौका भी मिला । नोबल पुरस्कार विजेता प्रो. सी.वी. रमन भी डॉ. होमी जहाँगीर भाभा से प्रभावित थे।

“कॉस्मिक किरण की बौछार के क्रम प्रपात के सिद्धांत” का प्रतिपादन करने वाले डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने यूरोप के देशों में जाकर ‘विद्युत एवं चुम्बकत्व’ विषयों के साथ-साथ कॉस्मिक किरणों की मौलिक खोजों के सम्बन्ध में भाषण दिए, जिसका ये प्रभाव हुआ कि डॉ. होमी जहांगीर की ख्याति महान वैज्ञानिकों में होने लग गयी।

वे 1941 में बंगलौर के ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ में भौतिकी के प्राध्यापक नियुक्त हुए और इसी वर्ष रॉयल सोसाइटी के फैलो चुने जाने के कारण वे लन्दन चले गए।

वर्ष 1948 में उन्होंने स्वतंत्र भारत में ‘परमाणु शक्ति आयोग’ की स्थापना की, जिसके अध्यक्ष पद के लिए उन्हीं का चुनाव किया गया। वर्ष 1955 में उन्होंने ‘परमाणु शक्ति केंद्र’ की स्थापना की।

उनका सपना था कि भारत में अणुशक्ति से बिजली का उत्पादन हो सके और उसका लाभ गरीब वर्ग को भी मिल सके और अपने प्रयासों और सच्ची नीयत से उन्होंने अपने इस सपने को सार्थक रूप दिया और साथ ही भारत में अप्सरा तथा जरलीना नामक परमाणु भट्टियों की स्थापना भी की ताकि भारत की वैज्ञानिक क्षमता विश्व में स्थापित हो सके।

उनका मानना था कि सिर्फ विज्ञान ही भारत देश को उन्नति की राह पर आगे बढ़ा सकता है। भारत देश को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने वाले इस महान वैज्ञानिक का 24 फरवरी 1966 को, बंबई से जेनेवा जाते समय एक विमान दुर्घटना में देहांत हो गया।

व्यवहार में मानवीयता और उदार विचारधारा रखने वाले डॉ. होमी जहांगीर भाभा को उच्च पद को कोई लालच नहीं था इसलिए जब उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया तो उन्होंने नम्रतापूर्वक इंकार कर दिया क्योंकि उनका केवल एक ही लक्ष्य था – ‘वैज्ञानिक प्रगति के ज़रिये भारत की उन्नति’ और उन्होंने अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत से अपने इस महान सपने को साकार रूप दे ही दिया और भारत 1974 में पूर्ण परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बन गया।

भारत देश की उन्नति के लिए किये गए निश्छल, अथक प्रयासों के लिए मानवसेवी चरित्र के स्वामी डॉ. होमी जहांगीर भाभा को हमारा शत्-शत् नमन !

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