महिला उत्पीड़न क्या है?

समय में बदलाव के साथ भले ही समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार आया हो लेकिन आज भी ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो अपने घर और ऑफिस जैसी जगहों पर भी सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं क्योंकि उन्हें नाजुक और कमजोर समझकर उन पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार किये जाते हैं। महिलाओं को इस तरह पहुंचाई जाने वाली क्षति ही महिला उत्पीड़न है। इससे महिलाओं को बचाने के लिए बहुत से कानून बनाये गए हैं ताकि महिला स्वयं को कमजोर ना समझे बल्कि अपनी आवाज़ उठा सके और कानून की मदद से गुनहगार को सजा दिला सके।

ऐसे में महिला उत्पीड़न से जुड़े कानूनों की थोड़ी जानकारी आपको भी जरूर लेनी चाहिए। तो चलिए, आज जानते हैं महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कुछ कानूनों के बारे में।

घरेलू हिंसा से सुरक्षा – महिलाएं अपने पिता के घर या अपने ससुराल में सुरक्षित रह सके इसलिए डीवी एक्ट (डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट) का प्रावधान किया गया है ताकि महिला को मारपीट जैसी शारीरिक हिंसा और मानसिक प्रताड़ना से बचाया जा सके।

वर्क प्लेस पर प्रोटेक्शन – सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन जारी की है जो सभी सरकारी और प्राइवेट ऑफिसों पर लागू होती है। ऑफिस में सेक्सुअल हैरेसमेंट को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 12 गाइडलाइन बनायीं हैं जिसके तहत महिला कर्मी ग़लत व्यवहार के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकती है।

दहेज निरोधक कानून – दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामलों से निपटने के लिए कानून में सख्त प्रावधान किये गए हैं ताकि महिला को ससुराल में सुरक्षित माहौल मिल सके। आईपीसी की धारा 498-ए में दहेज निरोधक कानून का ब्यौरा दिया गया है। दहेज के लिए मानसिक, शारीरिक या किस अन्य तरीके से प्रताड़ित महिला केस दर्ज करवा सकती है और आरोपियों को सजा दिला सकती है।

महिला सुरक्षा के लिए बहुत से नियम, कानूनों का प्रावधान किया गया है लेकिन सबसे पहले जरुरत है महिला के स्वयं के प्रति जागरुक होने की।

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