मैमोग्राफी क्या है?

अगस्त 15, 2018

आजकल ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है और इसके पीछे अहम कारण महिलाओं द्वारा अपने शरीर में होने वाले बदलावों की ओर ध्यान नहीं देना है जैसे कि अपने ब्रेस्ट में होने वाले चेंजेस की तरफ बहुत ही कम महिलाएं गौर करती है जिसके चलते ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्या बढ़ती चली जाती है। मैमोग्राफी या मैमोग्राम टेस्ट में ब्रेस्ट के कई एक्स-रे लिए जाते हैं और मैमोग्राफी ब्रेस्ट कैंसर की जांच करने का एक आसान तरीका है, जिसके बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज इसी के बारे में बात करते हैं-

राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, महिलाओं में स्किन कैंसर के बाद होने वाला सबसे आम कैंसर ब्रेस्ट कैंसर होता है। अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री में किसी को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो तो 40 साल की उम्र या उससे भी कम उम्र में इसकी स्क्रीनिंग शुरू करवा देनी चाहिए ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके और समय रहते इसका निदान संभव हो सके।

मैमोग्राफी करवाने से पहले-

मैमोग्राफी के दौरान-

मैमोग्राफी के रिजल्ट्स से क्या पता चलता है – मैमोग्राफी के दौरान मिले एक्स-रे को देखकर डॉक्टर ये जान पाते हैं कि ब्रेस्ट में कोई गांठ है या कैल्शियम का जमाव है। ये जरुरी नहीं है कि गांठ कैंसर की ही हो, ये अल्सर भी हो सकता है।

मैमोग्राफी से होने वाले खतरे – मैमोग्राम के दौरान निकलने वाली रेडिएशन का ख़तरा बहुत कम होता है और प्रेगनेंसी के दौरान अगर मैमोग्राफी करवाने की जरुरत पड़ती है तो एक्स-रे के दौरान लेड का एप्रिन पहनने को दिया जाता है ताकि बच्चे को कोई नुकसान ना पहुंचे।

दोस्तों, ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है। जरुरत है तो इस ओर जागरूक होने की! इसलिए हर 2 साल में महिलाओं को मैमोग्राफी करवानी चाहिए ताकि इस बीमारी से बचाव करना आसान हो जाये।

उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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