मैमोग्राफी क्या है?

आइये जानते हैं मैमोग्राफी क्या है। आजकल ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है और इसके पीछे अहम कारण महिलाओं द्वारा अपने शरीर में होने वाले बदलावों की ओर ध्यान नहीं देना है जैसे कि अपने ब्रेस्ट में होने वाले चेंजेस की तरफ बहुत ही कम महिलाएं गौर करती है जिसके चलते ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्या बढ़ती चली जाती है।

मैमोग्राफी क्या है?

मैमोग्राफी या मैमोग्राम टेस्ट में ब्रेस्ट के कई एक्स-रे लिए जाते हैं और मैमोग्राफी ब्रेस्ट कैंसर की जांच करने का एक आसान तरीका है, जिसके बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज इसी के बारे में बात करते हैं।

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राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, महिलाओं में स्किन कैंसर के बाद होने वाला सबसे आम कैंसर ब्रेस्ट कैंसर होता है। अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री में किसी को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो तो 40 साल की उम्र या उससे भी कम उम्र में इसकी स्क्रीनिंग शुरू करवा देनी चाहिए ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके और समय रहते इसका निदान संभव हो सके।

मैमोग्राफी करवाने से पहले-

  • अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं।
  • टेस्ट से पहले कोई क्रीम, लोशन, डिओडोरेंट जैसी चीज़ ब्रेस्ट और अंडरआर्म्स पर ना लगाएं।

मैमोग्राफी के दौरान-

  • इस प्रक्रिया से गुजरने के लिए कागज़ का गाउन पहना जाता है।
  • मशीन के द्वारा हर ब्रेस्ट के कम से कम दो एक्स-रे लिए जाते हैं।
  • निप्पल्स एक्स-रे में स्पष्ट दिखाई दें, इसके लिए उन पर चिपकने वाले छोटे-छोटे बिंदु लगाए जा सकते हैं।
  • ब्रेस्ट को दो समतल जगहों के बीच दबाया जाता है जिससे थोड़ी तकलीफ हो सकती है लेकिन ब्रेस्ट को कोई नुकसान नहीं होता है।
  • एक्स-रे लेने के समय आपको गहरी सांस लेकर, साँस रोकने के लिए कहा जाता है।
  • इसमें लगने वाला समय 30 सेकंड से भी कम होता है।
  • ब्रेस्ट इम्प्लांट की स्थिति में एक्स-रे लेने में लगने वाला समय ज्यादा हो सकता है।

मैमोग्राफी के रिजल्ट्स से क्या पता चलता है – मैमोग्राफी के दौरान मिले एक्स-रे को देखकर डॉक्टर ये जान पाते हैं कि ब्रेस्ट में कोई गांठ है या कैल्शियम का जमाव है। ये जरुरी नहीं है कि गांठ कैंसर की ही हो, ये अल्सर भी हो सकता है।

मैमोग्राफी से होने वाले खतरे – मैमोग्राम के दौरान निकलने वाली रेडिएशन का ख़तरा बहुत कम होता है और प्रेगनेंसी के दौरान अगर मैमोग्राफी करवाने की जरुरत पड़ती है तो एक्स-रे के दौरान लेड का एप्रिन पहनने को दिया जाता है ताकि बच्चे को कोई नुकसान ना पहुंचे।

ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है। जरुरत है तो इस ओर जागरूक होने की! इसलिए हर 2 साल में महिलाओं को मैमोग्राफी करवानी चाहिए ताकि इस बीमारी से बचाव करना आसान हो जाये।

उम्मीद है जागरूक पर मैमोग्राफी क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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