म्यूच्यूअल फंड्स में मीडियम टर्म इंवेस्टमेंट्स क्या होते हैं और इसके लाभ

अभी हमने पिछले अंक में जाना कि शार्ट टर्म इन्वेस्टमेंट्स कौन से होते हैं। आज हम जानने की कोशिश करेंगें कि म्यूच्यूअल फंड्स में मीडियम टर्म इंवेस्टमेंट्स कौन से होते हैं।

मीडियम टर्म से मेरा तात्पर्य 3-7 वर्ष है। जो निवेशक कम रिस्क लेना चाहते हैं और साथ में इक्विटी फ्लेवर भी चाहते हैं उनके लिये ये आइडियल टाइम हॉरिजोन होता है। इसमें निवेशक को बैलेंस फंड्स या कॉण्ट्रा फण्ड में निवेश करना चाहिये।

बैलेंस फंड जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि बैलेंस्ड होता है। यानि 65% इक्विटी व 35% डेब्ट। खास बात यह है कि फण्ड मैनेजर बैलेंस फंड में साधारणतः मंथली बेसिस पर री-बैलेंस करता रहता है। इसे आम निवेशक इस निम्न उदाहरण से समझ सकते हैं।

माना कि निवेशक ने 100 रूपये बैलेंस फंड में निवेश किया तो फण्ड मैनेजर 65 रूपये इक्विटी व 35 रूपये डेब्ट फंड (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) में निवेश करता है। एक महीने के बाद इक्विटी फंड में निवेशित 65 रूपये या तो 55 रूपये हो जायेगा या 75 रूपये। डाउन होने की स्थिति में फण्ड मैनेजर डेब्ट फंड को रीडीम करके इक्विटी खरीद लेता है और बाजार तेज होने की स्थिति में इक्विटी सेल करके डेब्ट फण्ड में निवेश बढ़ा देता है। अर्थात हर हालात में वो 65% इक्विटी व 35% डेब्ट रेश्यो मेन्टेन रखता है।

इसका सबसे बडा फायदा यह होता है कि निवेशक को मंदी का बाजार हो तो इक्विटी सस्ते में एंट्री व तेजी का बाजार हो तो इक्विटी ऊँचे में एग्जिट हो जाता है। यह पैसिव इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है। 365 दिन के बाद इसका प्रॉफिट/मैच्योरिटी टैक्स फ्री होता है।

यह रिटायर्ड लोगों के लिए भी अच्छा तरीका है। इसमें वो 365 दिनों के बाद मंथली विड्रॉल (पेंशन के रूप में) (वो भी बिल्कुल टैक्स फ्री) भी ले सकते हैं। अगर निवेशक 10% सालाना विड्रॉल (मंथली मोड में भी) लें तो विड्रॉल के बाद भी 5-10 वर्ष में काफी ग्रोथ आने की संभावना रहती है। पिछले 15 वर्षों का बैलेंस्ड फण्ड का एवरेज रिटर्न 17-18% वार्षिक है।

दूसरा तरीका कॉण्ट्रा फण्ड में निवेश करने का होता है। कॉण्ट्रा फण्ड जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि मार्केट के विपरीत निवेश करता है। जैसा वर्तमान में आईटी व फार्मा डाउन है तो फण्ड मैनेजर वर्तमान समय में कॉण्ट्रा फण्ड में आईटी सॉफ्टवेयर व फार्मा में निवेश कर रहे हैं। 3 से 7 वर्ष के समय में ये बहुत अच्छा रिर्टन्स देते हैं। क्योंकि बाजार की आम तौर पर 8-10 वर्ष की साइकिल होती है। प्रत्येक 8 से 10 साल में बाजार प्रायः तीन से चार साल तेज रहते हैं व पाँच से छः साल मंदे या एक्युमुलेशन जोन में रहते हैं। हर 18-24 महीनों में तेजी का सेक्टर बदलता रहता है। कॉण्ट्रा कॉल लेने की बजह से रिस्क बहुत कम होता है। टोटल आय टैक्स फ्री होती है। सो मध्यम अवधि के लिए निवेशक को अपने फाइनेंशियल डॉक्टर की राय से (ये बहुत महत्वपूर्ण है) बैलेंस फण्ड या कॉण्ट्रा फण्ड में निवेश करना चाहिये।

अगले अंक में हम लॉन्ग टर्म निवेश के तरीके के बारे में बात करेंगें।

sodhani-1 म्यूच्यूअल फंड्स में मीडियम टर्म इंवेस्टमेंट्स क्या होते हैं और इसके लाभये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“म्युचूअल फंड में निवेश करने के तरीके”

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