मेंढक में कितनी हड्डियां होती है?

मेंढक एक ऐसा जंतु है जिसका बाहरी आकार भले ही इंसान से मेल ना खाता हो लेकिन उसकी आंतरिक बनावट काफी हद तक इंसान की आतंरिक बनावट से मिलती-जुलती होती है। ऐसे में मेंढ़क को उसकी टर्र-टर्र से पहचानने के अलावा भी उसकी बहुत सी खासियतें जानी जा सकती हैं। तो चलिए, आज जानते हैं मेंढक में कितनी हड्डियां होती है और मेंढक से जुड़ी ख़ास बातें।

  • मेंढक उभयचर जंतु होते हैं यानी पानी और जमीन दोनों जगह रह सकते हैं।
  • मेंढ़क की 5000 से भी ज्यादा प्रजातियां पायी जाती हैं और वर्षा वनों में इनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है।
  • आने वाले मौसम को सबसे पहले भांप लेने वाले मेंढक, लगभग सारे रंगों में पाए जाते हैं।
  • मेंढक शीतरक्ती प्राणी होता है यानी उसके शरीर का तापमान वातावरण के ताप के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है।
  • इस प्राणी में शीत सुषुप्त अवस्था / शीतनिद्रा पायी जाती है यानी सर्दी के दिनों में ठंडक से बचने के लिए मेंढक पोखर जैसे स्थान की मिट्टी को खोदकर, पूरी सर्दी बिना कुछ खाये उसी में रहता है। इस अवस्था में उसके शरीर पर हड्डियों की नयी परत बन जाती है जिसे गिनकर उसकी उम्र का पता लगाया जा सकता है।
  • इसी तरह की क्रिया मेंढ़क गर्मी के दिनों में भी दोहराता है जिसे ग्रीष्म सुषुप्तावस्था कहा जाता है।
  • मेंढक अपनी लम्बाई से 20 गुना ज्यादा लम्बी छलांग मार सकता है क्योंकि उसके चार पैरों में से पिछले दो पैर अगले पैरों से बड़े होते हैं।
  • मेंढक आसानी से तैर सकते हैं क्योंकि उनके आगे के पैरों में चार-चार और पिछले पैरों में पांच-पांच झिल्लीदार उँगलियाँ होती हैं जो तैरने में सहायता करती हैं।
  • मेंढक के कान देखकर उसके लिंग का पता लगाया जा सकता है। मेंढक के कान टिम्पेनम कहलाते हैं जो उसकी आँखों के ठीक पीछे होते हैं। अगर टिम्पेनम आँख से बड़ा हो तो वो नर मेंढक है और अगर टिम्पेनम आँख से छोटा है तो वो मादा मेंढक है।
  • मेंढक की कुछ प्रजातियां हर दिन अपनी केंचुली छोड़ती हैं और अपनी उतरी हुयी केंचुली खा जाते हैं जबकि ज्यादातर प्रजातियां सप्ताह में एक बार ऐसा करती हैं।
  • मेंढक की टर्राहट का भी विशेष महत्व होता है और ये टर्राहट भी हर प्रजाति में अलग-अलग होती है। इस टर्राहट का मकसद मादा मेंढक को अपनी ओर आकर्षित करना होता है। इसके लिए मेंढक अपनी गर्दन के पास गुब्बारे की तरह हवा भर लेते हैं और टर्राते हैं। उनकी ये आवाज मीलों दूर तक सुनी जा सकती है।
  • मेंढक के ऊपरी जबड़े में मौजूद दांतों की मदद से वो अपने शिकार को धीरे-धीरे निगल जाते हैं।
  • मेंढक अपने मुँह से पानी नहीं पीते हैं बल्कि अपनी स्किन के जरिये पानी को सोख लेते हैं क्योंकि उसके शरीर में द्रव और वाष्प आसानी से जा सकते हैं।
  • मेंढक के आगे के पैरों की हड्डियां भी इंसानों की तरह होती है जिनमें ह्यूमरस, रेडियस और अलना होती है और इंसान के पैरों की तरह मेंढक में भी फीमर, टिबिया और फिबुला हड्डियां पायी जाती हैं।
  • मेंढक की त्वचा में विष ग्रंथियाँ तो पायी जाती हैं लेकिन उनमें इतना जहर नहीं होता है कि वो अपने शिकारियों को नुकसान पंहुचा सके।

दोस्तों, उम्मीद है कि ये जानकारी आपको रोचक लगी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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