माइक्रोफोन का आविष्कार

माइक्रोफोन आज एक ऐसी कॉमन डिवाइस हो गयी है जिसके बारे में सभी जानते हैं और इसके महत्त्व को पहचानते भी हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि एक माइक्रोफोन कैसे काम करता है? ऐसे में क्यों ना जागरूक पर आज माइक्रोफोन के बारे में जानें। तो चलिए, आज बात करते हैं माइक्रोफोन के बारे में और जानते हैं माइक्रोफोन का आविष्कार किसने किया।

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माइक्रोफोन जिसे माइक भी कहा जाता है, एक ऐसी डिवाइस (ट्रांसड्यूसर) होती है जो आवाज को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदल देती है। इसका इस्तेमाल वॉइस रिकॉर्डर, ऑनलाइन चैटिंग, सिंगिंग जैसे बहुत से काम करने में किया जाता है।

Sir Charles Wheatstone ने 1827 में microphone वर्ड दिया लेकिन microphone का आविष्कार Emile Berliner ने 1876 में किया।

जब हम माइक्रोफोन में कुछ बोलते हैं तो हमारी आवाज से बनी साउंड वेव एक ऊर्जा में बदल जाती है और वो ऊर्जा फिर माइक्रोफोन के पास जाती है। इसके बाद आवाज माइक्रोफोन में एक छोटे डायफ्राम से टकराती है। ये डायफ्राम प्लास्टिक का बना होता है और इसका आकार इतना छोटा होता है कि इसे आसानी से देखा नहीं जा सकता। जब इससे आवाज टकराती है तो ये आगे-पीछे हिलने लगता है और इसके हिलने से कम्पन होने लगता है। इस डायफ्राम से एक कॉइल जुड़ी रहती है। जब डायफ्राम हिलता है तो ये कॉइल भी हिलने लगती है।

इसके बाद माइक्रोफोन में लगी हुयी स्थायी चुम्बक एक चुम्बकीय क्षेत्र बनाती है जो कॉइल से होकर गुजरती है। इस प्रकार जब कॉइल आगे पीछे घूमती है, उसी समय वो चुम्बकीय क्षेत्र में आ जाती है और ऐसा होने पर एक इलेक्ट्रिकल करंट पैदा होता है। ये इलेक्ट्रिकल करंट कॉइल से प्रवाहित होने लगता है।

ये करंट माइक्रोफोन में लगे एम्प्लीफायर या साउंड रिकॉर्डिंग डिवाइस से गुजरता हुआ बाहर आता है और आवाज की तीव्रता इतनी बढ़ जाती है कि दूर तक सुनाई देती है।

माइक्रोफोन को एम्पलीफायर/लाउड स्पीकर से जोड़कर आवाज को और ज्यादा ऊँचा किया जा सकता है ताकि आवाज ज्यादा दूर तक जा सके।

दोस्तों, उम्मीद है माइक्रोफोन का आविष्कार कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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