माइग्रेन के कारण और लक्षण

आइये जानते हैं माइग्रेन के कारण और लक्षण। आधुनिक जीवनशैली ने हमें बहुत कुछ दिया है लेकिन सेहत को दाव पर रख के। जितनी तेजी से हम आधुनिकता में तरक्की कर रहे है उतनी ही तेजी से बीमारियाँ भी हमें सौगात में मिल रही है। इन्हीं में से एक बीमारी है माइग्रेन! जिसे आंधाशिशी या अधकपारी भी कहते है।

तनाव, अनियमित खान-पान, पोषक तत्वों की कमी और भागमभाग वाली जिंदगी इस बीमारी की देन है। अधिकांश इसके रोगी वे होते हैं जिनके घरों में यह बीमारी सालों से चली आ रही हो यानी आनुवंशिक। यह समस्या पुरुषों की तुलना में औरतों को अधिक होती है।

आज की नारी घर से लेकर बाहर तक के सभी काम बखुबी निभाती है तो स्वभाविक है तनाव तो होगा ही। दोहरी जिम्मेदारियाँ संभालने में औरतों को माइग्रेन जैसी समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।

पहले के जमाने में यह बीमारी उम्रदराज लोगों में होती थी लेकिन अब यह समस्या किसी भी आयु वर्ग के लोगों में हो जाती है। इसके मरीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे है। भारत में भी इसकी तादात निरंतर बढ़ रही है।

माइग्रेन के कारण और लक्षण 1

माइग्रेन क्या है?

यह एक आम रोग है जो सिर के आधे हिस्से में होता है। दिमाग की नर्व में जब सूजन आती है तब यह दर्द होने लगता है। जिस कारण इसे न्यूरोलॉजिकल समस्या कहा जाता है। माइग्रेन का दर्द पहले हल्का होता है फिर धीरे-धीरे तेज हो जाता है। इस दर्द की अवधि कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक भी रह सकती है।

माइग्रेन का दर्द आम सरदर्द से बहुत तेज होता है। दर्द इतना तेज होता है की मरीज ना तो आराम से बैठ पाता है और ना ही सो पाता है। शरीर की वो प्रक्रीयाएं जो नार्मल सरदर्द में होती हैं वो माइग्रेन में नहीं होती हैं।

फिज़िशियन के संपर्क में रहकर आपको समझना होगा की आपको माइग्रेन है या नहीं। क्योंकि अधिकांश मरीज समझा ही नहीं पाते की वो माइग्रेन के शिकार है। इसके उपचार में लापरवाही लकवा और ब्रेन हैमरेज जैसी समस्या का कारण भी बन सकती हैं।

माइग्रेन के लक्षण

  • सिर के आधे हिस्से में तेज दर्द की शिकायत. ललाट से लेकर सिर के पिछले हिस्से में भयंकर दर्द होता है।
  • माइग्रेन से ग्रस्त लोगों को कई वर्षो तक नियमित दौरे पड़ते है।
  • यह दर्द सामान्य से तीव्र तक हो सकता है।
  • जिस हिस्से में दर्द होता है उसमें भयानक चुभन भरी पीड़ा होती है की इंसान अपने बाकी शरीर के होने की मौजूदगी भी भूल जाता है।
  • इस दर्द के साथ-साथ गैस्टिक, चक्कर, उल्टी, थकान, कमजोरी, जी मिचलाना जैसी समस्या का होना आम बात है।
  • फोटोफोबिया यानी रोशनी से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से मुश्किल भी रोगी में आम बात है।
  • किसी भी काम में मन ना लगना, पसीना अधिक आना, भूख ना लगना व चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • आँखों में दर्द होना, पानी का बहना और धुंधला दिखाई देना।
  • दर्द के दौरान यह अहसास होना की सिर पर कोई मुक्के मार रहा हो।
  • दर्द के वक्त अत्यंत साधारण काम भी आपको मुश्किल लगना।
  • ऐसा महसूस करना की जैसे आप अंधेरी कोठरी में हो।
  • दर्द एक नियमित समय में होता है।
  • दर्द के समय किसी भी तरह की गंध बर्दास्त नहीं होती या सामने की सभी चीज़े कांपती हुई दिखाई देती है।
  • ज्यादातर लोगों को भावनात्मक वजहों से माइग्रेन की दिक्कत होती है।
  • ज्यादा चॉकलेट खाने का मन करना और बार-बार पेशाब आना।
  • हाथ-पैर में दर्द माइग्रेन का शुरुआती लक्षण है।

अगर इनमें से एक भी लक्षण आपको अपने अंदर दिखाई देते है तो लापरवाही ना करे। तुरंत उपचार ले। अधिकांश लोगो को तो माइग्रेन का पता भी नहीं चलता। लंबे समय तक तकलीफ झेलने के पश्चात वे इन लक्षणों से वाकिफ होते है।

माइग्रेन के कारण

  • अनियमित जीवनशैली, जिसमें उचित खान-पान का ध्यान नहीं रखा जाता।
  • भूखे पेट रहना या अधिक उपवास करना।
  • पर्याप्त पानी ना पीना।
  • सिर पर चोट, आंखों पर स्ट्रेस, हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, यकृत में समस्या, संक्रमण और शरीर में विषैले तत्वों का जमाव भी इसका कारण हो सकता है।
  • थकान, धूम्रपान, तेज गंध वाले परफ्यूम से, समय पर भोजन ना करने से, अधिक या कम नींद लेना इसका कारण हो सकता है।
  • अधिक तनाव या अधिक काम का दबाव।
  • अधिक दवाई का सेवन या कोई बीमारी भी इसका कारण हो सकती है।
  • तेज रोशनी, अधिक धूप, व्यायाम में कमी या मौसम में बदलाव भी माइग्रेन की समस्या उत्पन्न कर सकता है।
  • अधिक श्रम या विश्राम, आनुवांशिक, मासिक धर्म में अनियमितता, हार्मोनल बदलाव जैसे कारण भी हो सकते है माइग्रेन के।
  • कैफीन का अत्यधिक उपभोग या नियमित उपभोग में कटौती।

सही रूप से अभी तक माइग्रेन के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन सिर में दर्द के दौरो को पहचान कर आप इस समस्या का समय रहते उचित इलाज कर सकते है। एलर्जी के कारण भी माइग्रेन हो सकता है जैसे कइयों को दूध से बनी चीज़े, सब्जी, धूल, धुएं, गंध आदि कई कारण हो सकते है।

माइग्रेन का कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। यह आपको पहचान करनी पड़ती है की आपको किस चीज़ के उपयोग, मार्केटिंग के बाद, घर की सफाई के बाद या मानसिक तनाव के बाद दर्द की समस्या रहती है। पता चलते ही उस समस्या को अपने डॉक्टर से कहे और इलाज ले और ऐसी स्थिति से दूर रहे जिनसे माइग्रेन को झेलना पड़ता हो।

माइग्रेन से पीडि़त 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों को एसप्रिन नहीं लेनी चाहिये। माइग्रेन के रोगी को कभी भी इस दौरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आप सिरदर्द के दौरों से पूर्व कारणों की पहचान कर और डॉक्टरी सलाह से दौरे की तीव्रता को बहुत हद तक कम कर सकते है।

सबसे अच्छा होगा आप अपनी स्थिति को समझे और संतुलित आहार व दिनचर्या का पालन करे। क्योंकि संतुलित आहार और अच्छी दिनचर्या से माइग्रेन को कंट्रोल किया जा सकता है। भूखे कभी ना रहे। उचित समय पर भोजन जरूर करे और सिरदर्द की संभावना को कम करे।

हैल्थ रूल्स को अपनाने और डॉक्टर के सम्पर्क में रहने से माइग्रेन को आसानी से ठीक किया जा सकता हैं। दवा समय पर लें और ध्यान रखें दिये गये डोज़ से ज़्यादा दवाएं ना लें।

उम्मीद है जागरूक पर माइग्रेन के कारण और लक्षण कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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