माइग्रेन के कारण और लक्षण

जून 28, 2017

आधुनिक जीवनशैली ने हमें बहुत कुछ दिया है लेकिन सेहत को दाव पर रख के। जितनी तेजी से हम आधुनिकता में तरक्की कर रहे है उतनी ही तेजी से बीमारियाँ भी हमें सौगात में मिल रही है। इन्हीं में से एक बीमारी है माइग्रेन! जिसे आंधाशिशी या अधकपारी भी कहते है। तनाव, अनियमित खान-पान, पोषक तत्वों की कमी और भागमभाग वाली जिंदगी इस बीमारी की देन है। अधिकांश इसके रोगी वे होते हैं जिनके घरों में यह बीमारी सालों से चली आ रही हो यानी आनुवंशिक। यह समस्या पुरुषों की तुलना में औरतों को अधिक होती है। आज की नारी घर से लेकर बाहर तक के सभी काम बखुबी निभाती है तो स्वभाविक है तनाव तो होगा ही। दोहरी जिम्मेदारियाँ संभालने में औरतों को माइग्रेन जैसी समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। पहले के जमाने में यह बीमारी उम्रदराज लोगों में होती थी लेकिन अब यह समस्या किसी भी आयु वर्ग के लोगों में हो जाती है। इसके मरीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे है। भारत में भी इसकी तादात निरंतर बढ़ रही है।

आइये जानें माइग्रेन क्या है – यह एक आम रोग है जो सिर के आधे हिस्से में होता है। दिमाग की नर्व में जब सूजन आती है तब यह दर्द होने लगता है। जिस कारण इसे न्यूरोलॉजिकल समस्या कहा जाता है। माइग्रेन का दर्द पहले हल्का होता है फिर धीरे-धीरे तेज हो जाता है। इस दर्द की अवधि कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक भी रह सकती है। माइग्रेन का दर्द आम सरदर्द से बहुत तेज होता है। दर्द इतना तेज होता है की मरीज ना तो आराम से बैठ पाता है और ना ही सो पाता है। शरीर की वो प्रक्रीयाएं जो नार्मल सरदर्द में होती हैं वो माइग्रेन में नहीं होती हैं। फिज़िशियन के संपर्क में रहकर आपको समझना होगा की आपको माइग्रेन है या नहीं। क्योंकि अधिकांश मरीज समझा ही नहीं पाते की वो माइग्रेन के शिकार है। इसके उपचार में लापरवाही लकवा और ब्रेन हैमरेज जैसी समस्या का कारण भी बन सकती हैं।

माइग्रेन के लक्षण क्या-क्या है-

अगर इनमें से एक भी लक्षण आपको अपने अंदर दिखाई देते है तो लापरवाही ना करे. तुरंत उपचार ले। अधिकांश लोगो को तो माइग्रेन का पता भी नहीं चलता। लंबे समय तक तकलीफ झेलने के पश्चात वे इन लक्षणों से वाकिफ होते है।

माइग्रेन के कारण-

सही रूप से अभी तक माइग्रेन के कारणों का पता नहीं चला है लेकिन सिर में दर्द के दौरो को पहचान कर आप इस समस्या का समय रहते उचित इलाज कर सकते है। एलर्जी के कारण भी माइग्रेन हो सकता है जैसे कइयों को दूध से बनी चीज़े, सब्जी, धूल, धुएं, गंध आदि कई कारण हो सकते है। माइग्रेन का कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। यह आपको पहचान करनी पड़ती है की आपको किस चीज़ के उपयोग, मार्केटिंग के बाद, घर की सफाई के बाद या मानसिक तनाव के बाद दर्द की समस्या रहती है। पता चलते ही उस समस्या को अपने डॉक्टर से कहे और इलाज ले और ऐसी स्थिति से दूर रहे जिनसे माइग्रेन को झेलना पड़ता हो।

माइग्रेन से पीडि़त 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों को एसप्रिन नहीं लेनी चाहिये। माइग्रेन के रोगी को कभी भी इस दौरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आप सिरदर्द के दौरों से पूर्व कारणों की पहचान कर और डॉक्टरी सलाह से दौरे की तीव्रता को बहुत हद तक कम कर सकते है। सबसे अच्छा होगा आप अपनी स्थिति को समझे और संतुलित आहार व दिनचर्या का पालन करे। क्योंकि संतुलित आहार और अच्छी दिनचर्या से माइग्रेन को कंट्रोल किया जा सकता है। भूखे कभी ना रहे। उचित समय पर भोजन जरूर करे और सिरदर्द की संभावना को कम करे। हैल्थ रूल्स को अपनाने और डॉक्टर के सम्पर्क में रहने से माइग्रेन को आसानी से ठीक किया जा सकता हैं। दवा समय पर लें और ध्यान रखें दिये गये डोज़ से ज़्यादा दवाएं ना लें।

माइग्रेन का उचित इलाज हो सके उसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूर ले। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता। हमने जानकारी के आधार पर यह लेख लिखा है। हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल हमेशा करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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