मिर्गी क्या है और मिर्गी का दौरा पड़ने पर क्या करना चाहिए

मिर्गी या अपस्मार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित विकार है। इसमें ब्रेन में नर्व सेल की गतिविधि में बाधा आने लगती है जिसकी वजह से दौरे आना, व्यवहार का असामान्य होना और कभी-कभी बेहोशी आने जैसे हालात बन जाते हैं। मिर्गी के बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसके बारे में जानकारी लेने के बाद आप अपने आसपास किसी साथी को मिर्गी का दौरा पड़ने मदद का हाथ बढ़ा सकेंगे। तो चलिए, आज मिर्गी के बारे में करीब से जानते हैं ताकि ये कोई उलझन या रहस्य बनकर ना रहे-

मिर्गी ना तो कोई संक्रामक बीमारी होती है और ना ही इसका कारण मानसिक कमजोरी होती है। ये बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है।

मिर्गी के कारण –

सिर में चोट – किसी एक्सीडेंट में सिर में लगी चोट मिर्गी का कारण बन सकती है।

जेनेटिक कारण – पीढ़ियों से अगर मिर्गी का प्रभाव चला आ रहा हो तो आने वाली पीढ़ियां भी इससे प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।

ब्रेन स्ट्रोक – 35 साल से अधिक उम्र के लोगों में ब्रेन स्ट्रोक आना मिर्गी का कारण बनता है।

जन्म से पूर्व लगी चोट – जन्म से पूर्व पोषण की कमी, ऑक्सीजन की कमी या माँ को होने वाले किसी संक्रमण के कारण बच्चे के मस्तिष्क में लगी चोट मिर्गी का कारण बन सकती है।

मिर्गी के लक्षण –

मिर्गी के लक्षण हर मरीज में अलग अलग हो सकते हैं जो मिर्गी के प्रकार पर निर्भर करते हैं कि मिर्गी का दौरा आंशिक है या सामान्यीकृत दौरा है लेकिन मिर्गी के कुछ आम लक्षण भी होते हैं जो दौरा पड़ने पर दिखाई देते हैं –

  • मरीज का आंशिक या पूरी तरह से बेहोश हो जाना।
  • जीभ काटना और असंयम की स्थिति में रहना।
  • आँखों की पुतलियों और सिर में लगातार गति होना।
  • हाथ, पैर और चेहरे की मांसपेशियों में अचानक खिंचाव उत्पन्न होना।
  • दौरे के बाद उलझन की स्थिति में रहना और थकान महसूस करना।

मिर्गी से बचाव –

  • मिर्गी से बचाव के लिए सबसे पहले सिर को चोट से बचाना जरुरी है इसलिए गाड़ी चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का आवश्यकता के अनुसार उपयोग करिये।
  • पहले या दूसरे दौरे को नजरअंदाज किये बिना डॉक्टर से तुरंत दवाएं लें ताकि मिर्गी को बढ़ने से रोका जा सके।
  • प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी और इन्फेक्शन से सुरक्षा की जाए ताकि नवजात शिशु के मस्तिष्क को कोई क्षति ना पहुंचें और उसे मिर्गी से बचाया जा सके।
  • पर्याप्त और अच्छी नींद ली जाये।
  • नशीले पदार्थो के सेवन पर रोक लगाएं।
  • तनाव, चिंता जैसी मानसिक समस्याओं का आसानी से निपटारा करना सीखें।

मिर्गी में परहेज –

  • शराब और ड्रग्स जैसे पदार्थों से दूरी बनायें।
  • तेज चमकती रोशनी से दूर रहें।
  • टीवी और कंप्यूटर के सामने ज्यादा देर बैठे रहने से बचें।
  • वीडियो गेम ना खेलें।
  • तनाव को बढ़ने ना दें।

मिर्गी में आहार –

  • पानी ज़्यादा पीएं ताकि डिहाइड्रेशन के कारण आने वाले दौरों से बचा जा सके।
  • भोजन को तलकर बनाने की बजाये भांप में पकाकर, बेक या ग्रिल करके खाएं।
  • हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज युक्त पौष्टिक भोजन करें जिसमें कार्बोहायड्रेट, फैट, प्रोटीन के अलावा विटामिन और मिनरल्स भी प्रचुरता में मौजूद हों ताकि शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहे और शरीर को किसी तरह की क्षति ना पहुंचें।

मिर्गी की बीमारी सुकरात, अलेक्ज़ेंडर, नेपोलियन बोनापार्ट, अल्फ्रेड नोबेल, आइजेक न्यूटन जैसे महान लोगों को भी रही है  लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ना केवल एक सामान्य जीवन जिया बल्कि अपने जीवन को सभी के लिए मिसाल भी बना दिया।

अचानक किसी को मिर्गी का दौरा पड़ने पर आपको क्या करना चाहिए –

  • दौरा पड़ने के दौरान मरीज के चारों तरफ भीड़ इकट्ठी ना करें।
  • मरीज के मुँह में ज़बरदस्ती कोई भी चीज़ ना डालें।
  • जूता या प्याज ना सुँघायें।
  • दौरे को पूरा होने दें।
  • मरीज को एक तरफ करवट दिलाकर लिटा दें ताकि वो आसानी से सांस ले सके।
  • रोगी को ट्रैफिक, आग और बिजली के ख़तरे जैसी जगहों से दूर सुरक्षित स्थान पर लिटाएं।
  • दौरा पूरा होने के बाद मरीज उलझन में पड़ सकता है, उसकी हर संभव सहायता करें।

दोस्तों, अब आप मिर्गी से जुड़ी सामान्य जानकारी हासिल कर चुके हैं इसलिए कभी भी किसी को मिर्गी का दौरा आते देखें तो हर संभव सहायता करें क्योंकि इंसानियत इसी को कहते है ना !

किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर ले। हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। कोई भी प्रयोग आजमाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल जरूर करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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