कई बार शायद आपके साथ ऐसा हुआ हो या आपके किसी करीबी के साथ अक्सर ऐसा होता हो कि किसी भी तरह की आवाज़ से चिढ़ पैदा हो जाती हो। लोग जब खाना खाते हो तो उनके चबाने की आवाज़ भी नापसंद आती हो और ऐसा लगता हो जैसे कान में आवाज गूंज रही है। अगर ऐसा है तो आपको भी मिसोफोनिया (Misophonia) के बारे में जरूर जानना चाहिए ताकि जल्द से जल्द इस स्थिति को समझकर इससे बाहर आया जा सके। तो चलिए, आज आपको बताते हैं मिसोफोनिया बीमारी के बारे में।

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कानों में आवाज का गूंजना मिसोफोनिया कहलाता है जिसमें कान में अचानक घंटी बजने लगती है या कोई आवाज आने लगती है इसलिए इसे कान का बजना भी कह दिया जाता है।

इस बीमारी में खाने से होने वाली आवाज का ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसके साथ साँस लेने में होने वाली आवाज और पेन को क्लिक करने में होने वाली आवाज से भी परेशानी होती है। इन आवाजों से ग्रस्त व्यक्ति तनाव में आ जाता है और चिड़चिड़ापन और गुस्सा महसूस करने लगता है।

इसके लक्षण क्या होते हैं – इस फोबिया के बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। मिसोफोनिया से ग्रस्त होने पर व्यक्ति को चबाने, छींकने, निगलने, सांस लेने, खर्राटे लेने, खांसने, सीटी बजने, चाटने जैसी आवाजें परेशान कर देती है और वो गुस्से में आकर चिल्लाने लगता है। ऐसे व्यक्ति को अचानक पसीना आने लगता है और दिल की धड़कनें भी तेज हो जाती है।

इसका इलाज क्या है – इस फोबिया को सही करने के लिए मिसोफोनिया मैनेजमेंट प्रोटोकॉल की सर्विस ली जाती है जिसमें ग्रस्त व्यक्ति को 6-12 सप्ताह तक अलग-अलग आवाजों के संपर्क में रखकर जांच की जाती है कि व्यक्ति को सबसे ज्यादा समस्या किस आवाज से होती है।

इसके अलावा टिनिटस रिट्रेनिंग थेरेपी भी एक कारगर इलाज साबित हुआ है जिसमें इयर लेवल नॉइस जेनरेटर और काउंसलिंग का इस्तेमाल किया जाता है।

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