भारतीय सेना के सबसे खतरनाक हथियार

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आज हम आपको भारतीय सेना की शक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं। जो लोग यह मानते हैं कि भारतीय सेना शक्तिशाली है उनको यह पोस्ट जरूर पढ़नी चाहिए। इससे आपको यह अंदाजा हो जाएगा कि विश्व में अगर कोई भी देश भारत से लोहा लेने की सोचेगा तो उसे मुंहकी ही खानी पड़ेगी। तो चलिए भारतीय सेना के हत्यारों का अवलोकन करते हैं।

सुखोई एसयू-30 एमकेआई

यह एक ऐसा एयरक्राफ्ट है जो 21वीं सदी के लिहाज से बहुत नवीन है। यह जेट फाइटर दुनिया के सर्वोत्तम जस्ट फाइटर में से एक है। आपको बता दें कि इसकी लंबाई 21.93 मीटर है और इसकी चौड़ाई 14 दशमलव 7 मीटर है। इसका वजन करीबन 18400 किलो है और हथियार लगा देने के बाद उसका वजन 26000 किलो हो जाता है। यह 21000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान उड़ान भर सकता है। यह 3000 किलोमीटर तक की ऊंचाई में जाकर हमला कर सकता है। आपको बता दें कि इस विमान में दो इंजन लगे हुए हैं जो कि किसी भी मौसम में उड़ान भर सकते हैं और हवा से हवा या हवा से जमीन पर आसानी से हमला कर सकते हैं।

ब्रह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस एक मल्टी मशीन मिसाइल है इसकी क्षमता 290 किलोमीटर तक है। इसकी गति 208 मैक यानी ध्वनी की क्षमता से 3 गुना ज्यादा तेज है। आपको बता दें कि ब्रह्मोस का एयर फॉर्मेट भी तैयार किया जा रहा है। इसे भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 विमान पर लगाकर टेस्ट किया जाना बाकी है। जल सेना ने भी इस मिसाइल को अपने कई वॉर शिप्स पर तैनात किया हुआ है जिसमें रडार की पकड़ में ना आने वाले पोत भी शामिल है। भारतीय वायु सेना में इस क्रूज मिसाइल को अपने हैवी ड्यूटी फाइटर सुखोई-30 पर लगाया है और इस का सफलतापूर्वक प्रशिक्षण परीक्षण भी किया जा चुका है। यह मिसाइल जमीन समुद्र समुद्र आकाश या जमीन के किसी भी टारगेट को मार सकती है। यह मिसाइल पहाड़ी क्षेत्रों में पीछा कर कर टारगेट बेस्ट निशाना भी सकती है।

आई एन एस चक्र 2

यह पनडुब्बी परमाणु क्षमता से युक्त है और यह नौ सेना का एक बहुत बड़ा हथियार है। मूल रूप से इस पनडुब्बी का नाम के-152 नेरपा था। भारत में इस पनडुब्बी को रूस से करीबन एक खरब डॉलर के सौदे के तहत 10 साल के लिए खरीदा है। जब इस पनडुब्बी को नौसेना में शामिल किया गया तब इसका नाम बदलकर आइएनएस चक्कर 2 रख दिया गया। यह पनडुब्बी पानी के 600 मीटर तक अंदर रह सकती है। यह पनडुब्बी 3 महीने लगातार समुद्र के भीतर रह सकती है। यह पनडुब्बी 30 समुद्री मील की अधिकतम रफ्तार से चल सकती है।

अवाक्स

यह विमान एक खास प्रकार का विमान है जो कि 400 किलोमीटर पहले ही मिसाइलों के आगमन की ख़बर दे सकता है। यह विमान इजरायली तकनीक से लैस है इस प्रणाली के तहत यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाली चीजों का भी पता लगा सकता है जो सामान्य रडारों की पकड़ में नहीं आती है।

विक्रमादित्य

यह विमान वाहक पोत करीब 40500 टन वजन का है। इसे 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इस युद्धपोत की लंबाई 283.1 मीटर और चौड़ाई 60.0 मीटर है। इस पोत पर डेकों की संख्या 22 है। इस युद्ध पोत का कुल क्षेत्रफल 3 फुटबॉल के मैदान बराबर है। इस युद्धपोत में 22 तल है और 1600 लोग इस पर आसानी से सफर कर सकते हैं। यह करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है और यह 100 दिन लगातार समुद्र के भीतर रह सकता है।

भीष्म टैंक

अगर दुश्मन से सीधी लड़ाई के बारे में बात की जाए तो भारत के टैंक किसी से कम नहीं है। यह टैंक 5 किलोमीटर के दायरे तक प्रहार कर सकता है। इस टैंक की खास बात यह है कि इस टैंक पर किसी भी केमिकल और बायोलॉजिकल हमले या फिर रेडियो एक्टिव हमले का असर नहीं होता। इस टैंक को इस हिसाब से डिजाइन किया गया है कि इस पर बम का हमला अगर हो भी जाए तो वह कमजोर पड़ जाता है। यह टैंक 48 टन का है और इसके ऊपर 125 mm की बोर गन लगी हुई है। इस पर 12.7 mm की मशीन गन भी है जो मैनवली ऑपरेट की जा सकती है। इसकी खासियत यह है कि कमांडर इसको अंदर से बैठ कर रिमोट से भी इस्तेमाल कर सकता है।

पी 81

आपको बता दें कि भारत की तटरेखा करीबन 7500 किलोमीटर लंबी है जिसमें सैकड़ों द्वीप हैं जिन की हिफाजत करना बहुत जरूरी है और भारतीय जलसेना इसको करने में पूर्ण रूप से सक्षम है। यह सब करने के लिए उनकी मदद करता है पी 81, यह करीबन 2000 किलोमीटर तक मिशन पर 4 घंटे तक उड़ान भर सकता है। इसे कमर्शल एयरलाइन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका रखरखाव बेहद आसान है यह अपने साथ कई मिसाइलें ले जा सकता है।

हेलिना ‘नाग’

यह मिसाइल हेलीकॉप्टर के द्वारा भी दागी जा सकती है। इसका निर्माण DRDO के तहत किया गया है। इस मिसाइल की विशेषता यह है कि यह फायर एंड फॉरगेट और सभी प्रकार के मौसम में फायर करने की क्षमता रखती है। 42 किलो की इस मिसाइल को हवा से जमीन पर मार करने के लिए हल्के वजन के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इंफेंट्री combat के अंदर इस मिसाइल का बहुत अहम योगदान है।

बीएमडी प्रोग्राम

यह प्रोग्राम उस समय चर्चा में आया जब यह घोषणा की गई थी एक शार्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के द्वारा इसका परीक्षण किया गया है। आपको बता दें कि इन मिसाइल को शार्ट नोटिस में किसी भी शहर पर तैनात किया जा सकता है।

पिनाका

डीआरडीओ द्वारा निर्मित यह मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर मिसाइल अपने आप में अनेक विशेषताएं रखती हैं। यह एक ऐसी हत्यार प्रणाली है जिसका लक्ष्य मौजूदा तोपों के लिए 30 किलोमीटर के दायरे के बाहर व्यवस्था स्थापित करना है।

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