म्यूच्यूअल फण्ड क्या है और हमारे लिए कैसे फायदेमंद है?

जनवरी 6, 2018

अभी पिछले अंक में हमने पढ़ा कि इंवेस्टमेंट्स के कौनसे विकल्प मौजूद हैं और सबके बारे में जाना। सारे विकल्पों के बारे में विस्तार से चर्चा की। आज हम बात करेंगें निवेश के सबसे सही विकल्प यानि म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में। म्यूच्यूअल फण्ड निवेश करने का बहुत आसान, पारदर्शी व श्रेष्ठ विकल्प है। म्यूच्यूअल फण्ड कम्पनियाँ निवेशकों के पैसों को निवेशकों द्वारा चुनी गयी स्कीम के अंतर्गत स्कीम के मापदण्ड व निवेशकों के गोल (Target) के अनुसार निवेश करती है। हर म्यूच्यूअल फण्ड कम्पनी में विशेषज्ञ फण्ड मैनेजर की टीम होती है जो मार्केट के अनुसार सही विकल्प चुनकर पैसा निवेश करती है।

लोगों में बिल्कुल यह गलत धारणा है कि म्यूच्यूअल फण्ड सट्टा बाज़ार है या केवल शेयर्स मार्केट है। यह सब केवल अफवाह मात्र है। वास्तविकता यह है कि म्यूच्यूअल फण्ड अपने आप में निवेश का पूर्ण विकल्प है। इसमें निवेशकों के धैर्य व समय के अनुसार हर तरह का इक्विटी, बैलेंस्ड, डिफेंसिव बैलेंस्ड और डेब्ट फण्ड होता है। म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशक एक दिन के लिए भी पैसा लगा सकता है और 10-20-30 वर्षों के लिए भी। आप अपने निवेश पर कितना प्रतिफल कमा रहे हैं आपको रोज़ मालूम चल सकता है। बिना जोखिम लिए सुरक्षित निवेश करने का भी शानदार विकल्प मौजूद है। 10-20 दिनों के लिए पैसा फ्री हो तो भी उसे निवेश करने का आसान विकल्प मौजूद है।

सबसे खास बात यह है कि समय के साथ-साथ रकम की भी कोई लिमिट नहीं है। निवेशक बहुत छोटी मात्र 500 रूपये की भी धनराशि निवेश कर सकता है। इसी कारण म्यूच्यूअल फण्ड में हर तरह का निवेशक निवेश कर सकता है। हम सब व्यक्तियों की लालसा, रिस्क टेकिंग कैपेसिटी, समय व गोल अलग-अलग होते हैं। उनको देखते हुए हमारा फाइनेंशियल एडवाइजर (डॉक्टर) हमको सही स्कीम चुनने में मदद करता है।

म्यूच्यूअल फण्ड में सबसे खास बात यह है कि इसमें लिक्विडिटी बहुत अच्छी है। पैसा निकालने का विकल्प (Closed Ended व ELSS को छोडकर) सबमें प्रायः मौजूद रहता है जिससे निवेशकों को ज़रूरत पडने पर पैसा एकदम (1 से 4 दिन) से मिल जाता है। साधारण भाषा में निवेशकों के लिएं हर प्रकार के लक्ष्यों के लिए बहुत ही सुविधाजनक तरीके से, बहुत कम खर्चे मे, टेक्स की बचत व फायदे के साथ हर प्रकार के विकल्प मौजूद हैं। डेली इनकम, मंथली इनकम और क्वार्टरली इनकम का भी विकल्प मौजूद है। सब इंवेस्टमेंट्स सरकार द्वारा निर्धारित किए गए मापदण्डों के अनुसार ही होता है।

सिर्फ निवेशक को अपना लक्ष्य निश्चित करके अपनी रिस्क टेकिंग कैपेसिटी व समय – टेक्स आदि निश्चित करके अपने फाइनेंशियल डॉक्टर की राय से पैसा लगाना चाहिये। निवेशकों के तथ्यों के अनुसार ही स्कीम का निर्धारण होगा। चूँकि म्यूच्यूअल फण्ड में 40-50 कम्पनियाँ व 800 से ज्यादा स्कीम हैं अतः आपके फाइनेंशियल एडवाइजर का बहुत महत्वपूर्ण रोल है। सही फाइनेंशियल एडवाइजर आपके फाइनेंशियल गोल के रास्ते का ड्राइवर होता है। अगर ड्राइवर अच्छा है तो वो आपको बिना किसी तकलीफ के, निर्धारित समय मे , आराम से मंजिल पर पहुँचा देता है। सो आप अपने फाइनेंशियल एडवाइजर का चुनाव बहुत सोच समझकर करे।

आजकल निवेश करने का सीधा विकल्प भी मौजूद है जो एडवाइजर के मुकाबले कुछ सस्ता होता है। लेकिन निवेशक को अगर बाज़ार की जानकारी नहीं है तो यह बहुत नुकसानदेय भी साबित हो सकता है। अतः लेखक की राय में अपने फाइनेंशियल एडवाइजर के अनुसार ही निवेश करना चाहिये क्योंकि टी.वी पर लाइव सर्वे देखकर भी आम आदमी ऑपरेशन नहीं कर सकता है – कुशल डॉक्टर की ज़रूरत पडती ही है। म्यूच्यूअल फण्ड में कई तरह के फण्ड व स्कीम हैं। आगामी अंकों में हम जानने का प्रयत्न करेंगे कि किस तरह की स्कीम किन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है और किनको किन स्कीम में लगाना चाहिये।

ये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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