म्युचूअल फंड में निवेश करने के तरीके

अभी पिछले अंक में हमने पढ़ा कि निवेष का सर्वोतम तरीका म्युचूअल फंड है। परन्तु म्युचूअल फंड में 800 से ज्यादा स्कीम हैं। हर व्यक्ति के अपने-अपने फाइनेंशियल गोल्स हैं। ऐसे में निवेषक उलझन में रहता है कि वह कौनसी स्कीम में पैसा लगाये। आज हम यह सब जानने की कोशिश करेंगें।

मेरा स्पष्ट मानना है कि हर निवेष लक्ष्य आधारित ही होना चाहिये। बिना लक्ष्य के निवेश करने का मतलब है कि बिना किसी स्टेशन या डेस्टिनेशन को सोचे बिना किसी भी ट्रेन में बैठ जाना। हम कहीं भी बाहर जाते हैं तो जाने का साधन, गन्तव्य पर पहुंचने का अनुमानित खर्चा, अनुमानित समय आदि निश्चित करते हैं। इसी तरह से आपको म्युचूअल फंड में निवेश करने से पहले भी सोचना है।

हम म्युचूअल फंड की विभिन्न स्कीमों को समय के अनुसार तीन हिस्सों में बाँट देते हैं।

1. शॉर्ट टर्म – 1 दिन से सामान्यतः तीन वर्ष
2. मीडियम टर्म – तीन वर्ष से सामान्यतः सात वर्ष
3. लॉन्ग टर्म – सात वर्ष से ऊपर

उपरोक्त अनुसार ही हम विभिन्न स्कीमों के बारे में जानेंगें।

A) शॉर्ट टर्म इंवेस्टमेंट्स: शॉर्ट टर्म इंवेस्टमेंट्स को हम सामान्यतः तीन हिस्सों में बाँट सकते हैं।

1. बहुत कम समय के लिये (लिक्विड फंड्स): जब भी पैसा केवल कुछ दिनों के लिये स्पेयर होता है तो यह बहुत अच्छा तरीका है। इसको लिक्विड फंड या मनी मैनेजर फण्ड कहते हैं। नो एंट्री नो एग्जिट फण्ड होता है। निवेशक 24 घण्टे के बाद कभी भी इसको निकाल सकता है। यह बहुत ही सुरक्षित निवेश होता है। शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव से इसका कोई मतलब नहीं होता। लेकिन यह इन्वेस्टमेंट टूल नहीं है, यह केवल पार्किंग टूल है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आम आदमी का बैंकों में जो पैसा लगता है उसका बहुत बडा हिस्सा बैंक लिक्विड फंड्स में निवेश करता है। केन्दीय व राज्य सरकारें, कॉपरेटिव बैंक, बड़ी बड़ी कम्पनियाँ आदि इसमें अपना फण्ड पार्क करती हैं। 24 घण्टे के अन्दर इसका रिडेम्पशन अपने खाते में आ जाता है। ब्याज सामान्यतः 6 से 7.5 प्रतिशत की दर से दैनिक आधार पर जुडता रहता है। ब्याज टैक्सेबल होता है।

2. डेब्ट फंड्स: इसमें पैसा कॉर्पोरेट बॉन्ड – गोवेर्मेंट बॉन्ड आदि में निवेश होता है। यह भी बहुत सुरक्षित तरीका है। 7 से 8 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न आता रहता है। तीन वर्ष से कम समय पर रकम निकालने पर इंटरेस्ट टैक्सेबल होता है। तीन वर्ष के बाद इंडेक्श्न का लाभ मिल जाता है। इनकम टैक्स के हाई स्लैब वालों के लिए यह निवेश का अच्छा साधन है। उन व्यक्तियों के लिए जो बिल्कुल भी इक्विटी का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं और इंडेक्श्न में बेनिफिट के साथ 7% के आसपास टैक्स फ्री रिटर्न चाहते हैं उनके लिये निवेश का यह बहुत अच्छा साधन है। इसमें सामान्यतः 1 वर्ष से पहले रकम निकालने पर 1% एग्जिट लोड लगता है।

3. इक्विटी सेविंग्स: यह सुरक्षित निवेश का नया आधुनिक तरीका है। जो निवेशक सुरक्षित निवेश के साथ कुछ इक्विटी का फ्लेवर भी चाहते हैं तो यह बेस्ट तरीका है। यह बैलेंस फण्ड होता है बल्कि यह कहना चाहिये कि डिफेंसिव बैलेंस्ड फण्ड होता है। प्रॉफिट सारा टैक्स फ्री होता है, अगर निवेशक 365 दिनों के बाद निकालता है। Equity Portion 65% होने पर ही सारा प्रॉफिट टैक्स फ्री होता है। तो इसमें भी ऑफिशियली 65% इक्विटी होती है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। इसमें इक्विटी 25-30% रहता है व 35-40% कॉल पुट में हेजिंग रहता है। सो इक्विटी + कॉल पूत टोटल 65% हो जाता है। कॉल पुट में लीडिंग की वजह से बहुत सुरक्षित हो जाता है। इसमें निवेशक सामान्यतः 9 से 11% टैक्स फ्री रिटर्न्स की अपेक्षा कर सकते हैं। हालाँकि पिछले दिनों 11 से 40% टैक्स फ्री रिटर्न्स आया है। कॉल पुट लीडिंग की वजह से लगभग सुरक्षित रहता है, नुकसान की संभावना कम रहती है। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि आइडियल टाइम हॉरिजोन इस तरह के फण्डस् के लिये कम से कम 2 से 3 वर्ष रहना चाहिये हालाँकि निवेशक 8 वर्ष के बाद कभी भी टैक्स फ्री निकासी कर सकते हैं।

सो आज हमने जानने की कोशिश करी की कम समय के लिये निवेश करके या अपनी idol पडी रकम को लिक्विड फंड्स में जमा करके भी हम अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

लिक्विड फण्ड व डेब्ट फण्ड लगभग रिस्क बैग होते हैं। जबकि इक्विटी सेविंग्स में 25 से 35% Equity Portion रहता है। लेकिन चूंकि ये कॉल पुट से हेज रहते हैं तो इनमें भी रिस्क बहुत कम हो जाता है। इक्विटी की वजह से कुछ रिटर्न्स ज्यादा और वो भी टैक्स फ्री आ जाता है। निष्कर्ष एफडी में पैसा लगाने वालों के लिए इक्विटी सेविंग्स सबसे बेस्ट तरीका है।

आगामी अंक में हम मीडियम टर्म में निवेश के ऑप्शंस के बारे में चर्चा करेंगें।

sodhani-1 म्युचूअल फंड में निवेश करने के तरीकेये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“म्यूच्यूअल फण्ड क्या है और हमारे लिए कैसे फायदेमंद है?”

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