Mutual Funds Schemes का नया Classification – अच्छा या बुरा

SEBI या AMFI द्वारा आजकल Mutual Funds की समस्त स्कीमों का Classification चल रहा है। काफी Mutual Funds Schemes के नाम Change हो गये हैं या स्कीम Merge हो गई है। कहीं-कहीं कुछ दुविधा भी हो रही है निवेशकों को। वो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि क्या हो रहा है। निवेशकों ने Scheme A में पैसा लगाया था परन्तु अब स्कीम का नाम बदलकर B हो गया है।

मेरा स्पष्ट मानना है कि निवेशकों व Advisor को कुछ दिक्कत तो हो रही है परन्तु निवेशकों के लिये यह SEBI का बहुत अच्छा कदम है। अब निवेशक आराम से आम को आम या केले को केले से Compare कर सकता है।

इसको विस्तार से इस प्रकार समझते हैं कि पहले A Mutual Fund की X स्कीम थी जो Large Cap Based थी। परन्तु स्पष्ट नियमों के अभाव में Fund Manager ने Large Cap के साथ Mid Cap व Small Cap में निवेश कर दिया था। वहीं दूसरी ओर B Mutual Fund की Y स्कीम थी वो भी Large Cap Based थी। उसने पूरा पैसा केवल Large Cap में ही लगा रखा था। दोनों के Returns में बहुत फर्क आ रहा था क्योंकि X स्कीम में Mid व Small Cap भी था। निवेशक उन दोनों स्कीमों का Compare करके X स्कीम में पैसा लगा रहा था। बाज़ार तेजी में X स्कीम ज्यादा Returns दे रही थी क्योंकि उसमें Mid व Small Cap था। परन्तु ज़रा सा Market Down आते ही X स्कीम बहुत ज्यादा Down हो गयी क्योंकि उसमें Mid व Small Cap काफी मात्रा में था।

SEBI ने अब इन सब स्कीमों को Classified कर दिया है। Large Cap स्कीमें 65% से 85% Large Cap में ही निवेश कर सकती हैं। Mid Cap या Small Cap भी इसी तरह 65% से 85% Mid Cap या Small Cap में ही निवेश कर सकती हैं। निवेशक अब अपने Risk Taking Capacity के हिसाब से व अपनी ज़रूरत के हिसाब से Schemes Select कर सकता है। सामान्यतः Large Cap Safe व Defensive माने जाते हैं वहीं दूसरी ओर Mid Cap व Small Cap Aggressive होते हैं। सो निवेशक अपने हिसाब से अपनी Risk व Time Duration के हिसाब से Schemes का Selection कर सकता है। खास बात ये है कि अब निवेशक 2 या 4 स्कीमों में आराम से Comparison कर सकता है। उसे अब नामों में भी Confusion की ज़रूरत नहीं है। जैसे कि सारे Balanced Funds का नाम अब EQUITY HYBRID Fund हो गया है पहले Balanced/Prudence/Hybrid कई सारे नाम थे।

दूसरी बात अब Mutual Funds Schemes की संख्या भी काफी कम हो जायेगी। एक-एक Mutual Fund House ने Large Cap या Mid Cap में 2-3 स्कीमें निकाल रखी थी। Mutual Funds Schemes की संख्या कम होने से निवेशक आराम से अपने Financial Doctor की राय से अपने Risk Capacity व Time Horizon के अनुसार Schemes का Selection कर सकता है। सो Changes are Always Good.

sodhani-1 Mutual Funds Schemes का नया Classification - अच्छा या बुराये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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