नशा आजकल लोगों के लिए खासकर युवाओं के लिए फैशन बन गया है और ये फैशन कब लत में बदल जाता है ये नशा करने वाले लोगों को खुद पता नहीं चलता। पहले ये नशा फैशन बनता है धीरे धीरे इससे लोगों को मजा आने लगता है और फिर ये उनकी ललक बन जाता है और फिर आखिर में ऐसी स्थिति आती है जब नशे के बिना रहा ही जाता और नशा ना मिले तो शरीर में तड़प सी होने लगती है। लोग हमेशा ये सोचकर नशा शुरू करते हैं की ये सिर्फ मजे के लिए ले रहे हैं लेकिन आगे चलकर नशा उन्हें लत के रूप में जकड लेता है। लेकिन आपने कभी ये सोचा है की आखिर नशे की लत लगती कैसे है?

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दरअसल जब भी हम किसी नशीली चीज़ का सेवन करते हैं तो वो सीधे हमारे दिमाग पर असर डालती है और फिर वो दिमाग के कुछ हिस्सों को प्रभावित करने लगते हैं और फिर हमारा दिमाग वैसी ही भावनाएं जगाता है जैसी हमे दूसरी मनपसंद चीज़ों की इच्छा होती है। लेकिन नशे की ये भावना बाकी चीज़ों की तुलना में ज्यादा प्रबल होती है।

नशे की ये भावना हमारे दिमाग की कोशिकाओं के जरिये डोपामीन हॉर्मोन के रूप में कुछ रासायनिक संदेश का विस्तार करते हैं और इसी कारण नशीले चीज़ें लेने की प्रबल इच्छा जागृत होती है। धीरे धीरे ये डोपामीन हमारे दिमाग में नशे की चीज़ों की ऐसी जबरदस्त इच्छा जागृत करता है की जो लोग नशा छोड़ना भी चाह रहे हों वो इसे छोड़ नहीं पाते और फिर उनमे नशे की तलब बढ़ने लगती है।

नशीली चीज़ें दिमाग पर ऐसे हावी हो जाती हैं की फिर नशा करने वालों का खुद के शरीर और मन पर काबू नहीं रहता और उनकी सांसें धीमी होने लगती हैं और फिर व्यक्ति की ऐसी हालत हो जाती है की जब वह नशा नहीं करता तो वह अक्सर चिड़चिड़ा और परेशान हो जाता है और नशा करने के बाद वह खुद को सामान्य और हल्का महसूस करने लगता है इसे ही नशे की लत कहा जाता है।

इसलिए अक्सर कहा जाता है कि नशे की चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए अगर एक बार इनकी शुरुआत हो गई तो फिर व्यक्ति को खुद पता नहीं चलता वो नशे की तरफ कब खिंचा चला जाता है और फिर अपने शरीर और जिंदगी को बर्बाद कर लेता है जिससे वापस बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

“जानिए कौनसा नशा कितना खतरनाक है ?”