न्यूरोपैथी क्या है?

क्या आप जानते हैं न्यूरोपैथी क्या है। न्यूरोपैथी पेरिफेरल नर्वस सिस्टम से सम्बंधित है। पेरिफेरल नर्वस सिस्टम तंत्रिकाओं का एक ऐसा जाल है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बाकी शरीर से जोड़ता है। न्यूरोपैथी एक ऐसी समस्या है जो शरीर के कई हिस्सों के सुन्न हो जाने और उनमें दर्द होने, सूजन आने और मांसपेशियों में कमजोरी आने का कारण बनती है। ये तकलीफ अधितकर मामलों में हाथ और पैर से शुरू होती है और समय के साथ बढ़ती चली जाती है।

न्यूरोपैथी के प्रकार-

  • न्यूरोपैथी जब एक तंत्रिका को प्रभावित करती है तो इसे मोनोन्यूरोपैथी कहते हैं।
  • जब न्यूरोपैथी शरीर के अलग अलग हिस्सों में, दो या दो से ज्यादा नसों को प्रभावित करती है तो इसे मल्टीपल मोनोन्यूरोपैथी कहते हैं।
  • कई नसों को एकसाथ प्रभावित करने की स्थिति में इसे पॉली न्यूरोपैथी कहा जाता है।

ज्यादातर मामलों में मरीज पॉलीन्यूरोपैथी से ही ग्रस्त पाए होते हैं।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी के कारण-

  • वंशानुगत न्यूरोपैथी – इसका कोई इलाज नहीं है।
  • इन्फेक्शन और ऑटोइम्यून विकार – एचआईवी, हर्पिस वायरस और सिफलिस के बैक्टीरिया तंत्रिका फाइबर को नुकसान पहुँचाते है। इसके अलावा कुछ ऑटो इम्यून डिजीज भी तंत्रिका ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे – गिलेन-बैरे सिंड्रोम और रूमेटोइड गठिया।
  • डिजीज – डायबिटीज,किडनी डिजीज,कैंसर के कुछ प्रकार और हार्मोन असंतुलन भी न्यूरोपैथी का कारण बनता है।
  • मेडिसिन – कीमोथैरेपी में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं पेरिफेरल नसों को नुकसान पहुँचा सकती है।
  • दुर्घटना – गिरने, एक्सीडेंट होने या खेल के दौरान चोट लगने से नसें दब जाती है जिससे पेरिफेरल तंत्रिकाओं को क्षति पहुँच सकती है।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण-

  • स्पर्श के प्रति बहुत अधिक संवेदनशीलता
  • मांसपेशियों में कमजोरी या लकवा आना
  • पैर के पंजों और हाथों में संवेदनशून्यता
  • तीखा, चुभने वाला या ठंडा दर्द होना

इनमें से किसी भी तरह का लक्षण ज्यादा समय तक दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी से बचाव-

  • हेल्दी डाइट लें
  • रेगुलर एक्सरसाइज करें
  • शराब और सिगरेट से दूरी बनाकर रखें
  • खेल के दौरान अपने पैरों की सुरक्षा करें

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