जानिये नींद में क्यों बातें करते हैं लोग

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हममें से कई लोगों को नींद में बातें करने की आदत होती है। रात में सोने के बाद वे कुछ न कुछ बड़बड़ाने लगते हैं। मेडिकल टर्म में नींद में बात करने की आदत को पैरासोम्निया कहा जाता है। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है लेकिन जब भी आप नींद में बातें करते हैं तो आपके बगल में सोए व्यक्ति को परेशानी जरूर होती है। नींद में बड़बड़ाने वाला व्यक्ति नींद में ही अजीब तरह का बिहेव करता है और उसकी बातें स्पष्ट तरीके से समझ में नहीं आती हैं। हालांकि ऐसे व्यक्ति ज्यादा समय तक नहीं बड़बड़ाते हैं। ऐसे लोग बमुश्किल 20 से 30 सेकेंड तक ही कुछ न कुछ बड़बड़ाते रहेंगे या खुद से बातें करते रहेंगे फिर अपने आप चुप हो जाते हैं।

स्कूल जाने वाले बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि तीन से दस साल के ज्यादातर बच्चों को नींद में बड़बड़ाने की आदत होती है। जबकि दस प्रतिशत से कम बच्चे रोज रात को नींद में बात करते हैं। जैसे ही आप बड़े होते हैं यह समस्या खत्म हो जाती है और इसके लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ती।

अगर आपको नींद में बड़बड़ाने की समस्या है तो यह आपके स्वास्थ के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

आइए जानें नींद में बातें क्यों करते हैं लोग-
नींद में बातें करने की आदत कई वजह से हो सकती है। अगर आप ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं, डिप्रेशन के शिकार है, शराब पीते है और भरपूर नींद नहीं लेते तो आपको नींद में बड़बड़ाने की समस्या हो सकती है।

आनुवांशिक लक्षण : यदि आपके परिवार में किसी व्यक्ति को नींद में बात करने की समस्या है तो आप भी इस समस्या से ग्रसित हो सकते हैं। इसके साथ ही यदि आपके माता-पिता में से किसी को भी अपने बचपन में नींद में बात करने की समस्या रही हो तो आपमें भी यह समस्या होने की संभावना ज्यादा होती है।

नींद की बीमारी : अगर आप स्लीप एप्निया और कन्फ्यूजन एराउजल जैसी नींद की बीमारी से ग्रसित हैं तो आपको नींद में बड़बड़ाने की आदत लग सकती है। बेहतर होगा कि डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

मानसिक बीमारी : अगर आपकी उम्र 25 वर्ष से ज्यादा है तो नींद में बड़बड़ाने का एक कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है।अगर आपको यह समस्या है तो यह कोई सामान्य बात नहीं है बल्कि इसका समय रहते उचित इलाज कराएं।

दवाइयों की वजह से : अगर आप पहले से कोई दवा खा रहे हैं तो नींद में बात करने की समस्या इसकी वजह से भी हो सकती है। इसका कारण यह है कि कुछ दवाएं ऐसी भी होती हैं जो नींद को कम कर देती हैं। अगर आप अस्थमा के मरीज हैं और मोन्टेल्यूकास्ट नाम की दवा खा रहे हों तो यह नींद में बड़बड़ाने की समस्या को बढ़ा सकती है।

अन्य कारण : यदि आपको स्ट्रेस, डिप्रेशन, बुखार और नींद की कमी की समस्या है तो आपको नींद में बड़बड़ाने की आदत लग सकती है।

क्या है इसका इलाज :
जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। लेकिन अगर नींद में बड़बड़ाने की समस्या दिनों दिन बढ़ रही हो तो आप साइकोथैरेपिस्ट के पास जाएं। डॉक्टर के सुझाए उपायों को अपनाकर आप अपनी इस समस्या को कम कर सकते हैं।

अपने आप से सवाल पूछें कि कहीं आप मानसिक तनाव के शिकार तो नहीं या आपको ज्यादा सोचने की आदत तो नहीं। इससे आपको काफी हद तक इस समस्या का समाधान मिल सकता है। अगर आपको लगता है कि आप इनमें से किसी से भी प्रभावित हैं तो अपने मन को शांत रखने के लिए नियमित योगा और मेडिटेशन करें। इससे आपको काफी फर्क दिखेगा। इसके अलावा जब भी आप सोएं अपने बगल वाले व्यक्ति को बोल दें कि जब आप बड़बड़ाने लगें वो आपको तुरंत जगा दे।

अगर आपको नींद में बात करने की परेशानी लगातार हो रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता क्योंकि आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है। हमने यह लेख प्रैक्टिकल अनुभव व जानकारी के आधार पर आपसे साझा किया है। अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल करे। आपको यह लेख कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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