इस शहर में कोई भी गरीब नहीं है

पूरे विश्व में कई ऐसे देश है जो गरीबी से जूझ रहे हैं और गरीबी आज के समय की एक बहुत बड़ी समस्याओं में से एक है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां कोई भी इंसान गरीब नहीं है।

ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न शहर दुनिया का सबसे बड़ा और पुराना शहर है यहां की करीबन 38 प्रतिशत आबादी विदेशी है। यह दुनिया का सबसे धनी शहर है यह माना जाता है साल 1880 में मेलबॉर्न दुनिया का सबसे धनी शहर बन गया था और यहां का कोई भी शख्स गरीब नहीं रहा।

इतना ही नहीं पूरे विश्व में कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां पर मेलबॉर्न जितनी फैसिलिटीज हो। पूरे विश्व में लोग ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ दो ही बड़ी वजहों से जानते हैं एक तो क्रिकेट और दूसरा यहां का रहन-सहन यह।

माना जाता है कि ऑस्ट्रेलिया रहन-सहन के हिसाब से बहुत ही उच्च कोटि का देश है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है और यहां की अर्थव्यवस्था विश्व में 12 वे स्थान पर आती है। ऑस्ट्रेलिया की स्थापना 30 अगस्त 1835 में हुई थी। मेलबोर्न ऑस्ट्रेलिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। मेलबोर्न को ऑस्ट्रेलिया की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में देखा जाता है।

आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे कि ऑस्ट्रेलिया की आधी मेलबोर्न की आधी आबादी ऑस्ट्रेलियन है ही नहीं यानी के 38 प्रतिशत आबादी विदेशी है। यहां के अधिकांश लोग ब्रिटेन इटली वियतनाम चीन और ग्रीस के हैं। इसी वजह से यहां पर सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है। जिसका ऑस्ट्रेलिया को आश्चर्यजनक लाभ हुआ है। यह माना जाता है कि साल 1901 से 1927 तक मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया की राजधानी था। मेलबोर्न में एक कानून यह भी है कि अगर किसी का सामान खो जाए तो उसे लौट आने के लिए इनाम की घोषणा करना कानूनी है।

मेलबॉर्न को फॉक्स कैपिटल भी कहा जाता है ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां पर लोमड़ियों की आबादी बहुत है। हर स्क्वायर किलोमीटर में करीबन 10 लोमड़ियां आसानी से पाई जा सकती हैं कई बार यहां के आम लोग इस वजह से काफी परेशान भी रहते हैं। मेलबोर्न में अभद्र गीत गाने पर सजा का प्रावधान है हलाकि उसके अंदर शर्त यह है कि इसके लिए गवाह होना जरूरी है। इस कानून के अंतर्गत 6 महीने की सजा हो सकती है।

पूरे विश्व में इस्तेमाल किए जाने वाला फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स का आविष्कार भी मेलबर्न में ही हुआ था। डेविड फॉरेन नामक व्यक्ति ने इसे एरोनॉटिकल रिसर्च लेबोरेटरी में 1958 में बनाया गया था। आपको बता दें कि वारेन के पिता की मौत एक प्लेन क्रैश में ही हुई थी इसके बाद उन्होंने यह तय किया कि वह एक ऐसा डिवाइस बनाएंगे जिससे प्लेन के आखिरी वक्त की जानकारी सामने आ सके।

शेयर करें

रोचक जानकारियों के लिए सब्सक्राइब करें

Add a comment