मार्शल अर्जन सिंह हमारे देश की आन, बान, शान

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कहा जाता है की युद्ध हथियारों से नहीं हौसलों से लड़ा जाता है और हारता वही है जिसके हौसले कमज़ोर पड़ गए। भारत की वीर भूमि ने भी ऐसे कई योद्धाओं को जन्म दिया उनमे से ही एक है मार्शल अर्जन सिंह जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता और युद्धनीति से कई बार दुश्मनो के छक्के छुड़ा दिए है। भारत में अभी तक इनसे ज़्यादा युद्ध किसी ने नहीं देखे है। मगर अर्जन सिंह की आँखों में आज भी वैसे ही चमक है, जैसी पहला युद्ध लड़ रहे युवा में होती है। अर्जन सिंह 97 साल के हो चुके है मगर बात अगर जज़्बे की हो तो अब भी वो किसी युवा जवान से कम नहीं है।

भारत पाकिस्तान के बीच हुए 1965 के युद्ध में भारत का नेतृत्व कर चुके अर्जन सिंह आज भी जब बात करते है तो उनकी आवाज़ में वो रौब दिखता है जो तब हुआ करता था। वह इस समय तीन फाइव स्टार सैन्य अधिकारियों में से इकलौते जीवित सैन्य अधिकारी हैं। आज भी वो अपना सारा काम खुद करते है और जीवन को उसी उत्साह से जी रहे है जैसे पहले जिया करते थे।

15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अभी फैसलाबाद, पाकिस्तान) में मार्शल अर्जन सिंह का जन्म हुआ था। उनके पिता किसान थे , यह भी एक वजह है की उन्हें अपनी मिटटी से बहुत प्यार है। मात्र 19 साल की छोटी सी उम्र में वो भारतीय वायुसेना में पॉयलट के रूप में जुड़े। उनकी सफलता का सिलसिला लगातार बढ़ता चला गया और 44 साल की उम्र में उत्तरी वायु सेना का प्रमुख बना दिया गया और आज़ादी के बाद पहली बार हुई लड़ाई में कमान उनके ही हाथ में थी।

भारत माता के ऐसे वीर सपूत और सच्चे देश भक्त को जागरूक की टीम सैल्यूट करता है। साथ ही हम यह कामना करते है की हमारे देश का हर युवा अर्जन सिंह से प्रेरणा लें और देश की सेवा में अपना योगदान दें।

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