पान खाने की शुरुआत कब और कैसे हुयी?

सितम्बर 2, 2018

हो सकता है कि आप भी पान खाने के शौकीनों में से एक हो और अलग-अलग स्वाद वाले पान खाने का लुत्फ उठाया करते हों। इसी शौक के चलते ही आज मार्केट में ढ़ेरों बेहतरीन वैरायटी वाले पान आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में आप भी इस पान के इतिहास और इसके जायके से जुड़ी जानकारी लेना जरूर पसंद करेंगे। तो चलिए, आज बात करते हैं इसी स्वादिष्ट पान के बारे में-

पान का उद्भव मलाया द्वीप से हुआ माना जाता है और इसका सम्बन्ध भारत की परम्पराओं के साथ सदियों से रहा है। भारत और बर्मा जैसे देशों में पान की पैदाइश ज्यादा होती है। पान को संस्कृत में ताम्बूल, तेलुगू में पक्कू, तमिल और मलयालम में वेटिलाई और गुजराती में नागुरवेल कहा जाता है।

पान ताम्बूली या नागवल्ली नामक लता का पत्ता होता है। चूना, खैर और सुपारी मिलाकर इसका बीड़ा बनाया जाता है और चबा-चबाकर खाया जाता है। जहाँ सीमित मात्रा में खाया गया पान मुँह की दुर्गन्ध को दूर करके, पूरे मुँह को महका देता है वहीं पान खाने की लत दांतों को ख़राब भी करने लगती है और मुँह से बदबू आना भी शुरू हो जाता है।

पान खाने से केवल स्वाद में ही बढ़ोतरी नहीं होती है बल्कि सेहत को भी फायदा मिलता है। खाना खाने के बाद पान खाने से पाचन बेहतर होता है। पान के अपने विशेष औषधीय गुण भी होते हैं जैसे बलगम को हटाना, मुँह को साफ करना, अपच, सूखी खांसी और साँस सम्बन्धी बीमारियों को दूर करना।

पान का भारत में सांस्कृतिक महत्त्व भी बहुत ज्यादा है। एक और पूजा-आराधना में धूप, दीप और नैवेद्य के साथ पान को भी शामिल किया जाता है वहीं पान का महत्त्व शृंगार में भी बहुत अधिक होता है।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि जिस पसंदीदा पान को खाने के लिए आप लम्बी कतारों में लगने को भी तैयार हो जाते हैं, उस पान का अपना औषधीय महत्त्व भी है और सांस्कृतिक महत्त्व भी है। इसके अलावा पान का भारत से सम्बन्ध भी बहुत पुराना है।

पान के बारे में इतनी रोचक जानकारी हासिल करने के बाद अब आप पूरे शौक से पान खाइये, बस इतना जरूर याद रखिये कि ये आपकी लत ना बन जाये।

उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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