पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए?

मार्च 26, 2018

‘जल ही जीवन है’ का नारा तो आपने ज़रूर सुना होगा और इसके अनुसार पानी की हर बून्द बचाने के प्रयास आप भी किया करते होंगे और आप ये भी जानते होंगे कि हमारे शरीर के लिए पानी कितना जरुरी होता है। हमारे शरीर में 60 से 70% पानी है यानि हमारे हर अंग और हड्डियों में पानी मौजूद है। पानी हमारे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है और हमें स्वस्थ बनाये रखता है लेकिन पानी पीने से पहले ये जानना बहुत जरुरी होता है कि हम किस तरह का पानी पी रहे हैं। क्या वो पानी शुद्ध है या उसे पीकर हमारे शरीर को नुकसान पहुँच रहा है? ऐसे में क्यों ना आज, इसी बारे में बात करें ताकि हमें पीने के पानी के बारे में एकदम सही और सुरक्षित जानकारी मिल सके और इसके लिए हमें पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए ये जानना होगा। तो चलिए, आज जानते हैं कि पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए–

पानी एक अच्छा विलायक होता है और इसमें गन्दगी भी आसानी से घुल जाती है। शुद्ध पानी को यूनिवर्सल सॉलवेंट कहा जाता है। ऐसा पानी बेस्वाद, बेरंग और बिना किसी गंध का होता है।

TDS (Total Dissolved Solids) का का मतलब होता है पूर्णत: घुले हुए ठोस पदार्थ। टीडीएस पानी में घुले हूए सभी कार्बनिक और अकार्बनिक ठोस पदार्थों का माप है। पानी में अकार्बनिक पदार्थ जैसे कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, सोडियम, क्लोराइड और सल्फेट्स आदि पाए जाते हैं और कुछ मात्रा में कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं। पानी में इन खनिजों की एक निश्चित मात्रा तक उपस्थिति स्वास्थ के लिए आवश्यक है। लेकिन एक स्तर से ज़्यादा ये नुक़सानदायक है।

टीडीएस का उपयोग पानी की शुद्धता को जांचने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पता लगाया जाता है कि पानी शुद्ध है या नहीं और पीने योग्य है या नहीं।

टीडीएस को एमजी प्रति इकाई मात्रा (मिलीग्राम/लीटर) की यूनिट्स में लिखा जाता है या इसे Parts Per Miillion (PPM) के रूप में भी व्यक्त किया जाता है।

टीडीएस पानी की शुद्धता जांचने का एक मापक होता है। अगर आप पानी की कठोरता का मापन करना चाहें तो टीडीएस मीटर उपकरण लाकर इसकी जांच कर सकते हैं। 500 ppm पानी की टीडीएस वैल्यू को बहुत कठोर माना जाता है। पानी का टीडीएस कम करने के लिए कार्बन फिल्टर और आरओ जैसी प्योरिफाइंग तकनीकें काम में ली जाती हैं। आरओ यानी रिवर्स ओस्मोसिस कठोर पानी को नरम पानी में कन्वर्ट कर देता है और पानी में मौजूद टीडीएस समाप्त हो जाते हैं।

इस सम्बन्ध में WHO ने मानक तय किये हैं जिसके अनुसार 100 से 150 टीडीएस के पानी को पीने के लिए सही बताया गया है। इसके अलावा ये भी ध्यान रखें कि 300 टीडीएस से कम लेवल वाला पानी स्वाद में सबसे अच्छा होता है और 900 टीडीएस से ज़्यादा वाला पानी स्वाद में ख़राब होता है।

दोस्तों, जीरो टीडीएस को सही मानने की भूल ना करें क्योंकि पानी में कुछ खनिजों का मौजूद होना भी हमारे शरीर के लिए जरुरी होता है इसलिए अपने घर में आरओ या यूवी सिस्टम लगवाने से पहले पानी के टीडीएस लेवल की जांच कर लें और पानी का टीडीएस सामान्य स्तर से ज़्यादा होने पर ही पानी साफ करने के ऐसे सिस्टम को लगवाएं।

साथ ही हम आपको ये भी बता दें की केवल TDS ही पानी की शुद्धता का मापक नहीं है। TDS सही होने के बावजूद कठोर पानी (Hard Water) हो सकता है और उसमें आर्सेनिक जैसी भारी धातुएँ हो सकती है, जो की पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

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