पादप हार्मोन क्या है?

ये तो आप जानते हैं कि हमारे शरीर में बहुत से हार्मोन पाए जाते हैं जिनका अपना अलग-अलग और महत्वपूर्ण काम होता है जिसे वो बखूबी पूरा भी करते हैं लेकिन क्या आप ये जानते हैं पौधों में भी हार्मोन पाए जाते हैं जो उनके विकास को बढ़ाने में मददगार होने के साथ-साथ आवश्यक भी होते हैं। ऐसे में पौधों के हार्मोनों के बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए। तो चलिए, आज जानते हैं पौधों में पाए जाने वाले पादप हार्मोन क्या है।

पादप हार्मोन ऐसे केमिकल्स होते हैं जो पौधों की ग्रोथ को रेगुलेट करते हैं। इन्हें फाइटोहार्मोन भी कहा जाता है। ये ऐसे सिग्नल मॉलिक्यूल्स होते हैं जिनकी बहुत कम मात्रा पौधों में बनती है और इनके निर्माण और सीक्रेशन के लिए ग्रंथियां भी नहीं होती हैं।

ये पादप हार्मोन पौधे को निश्चित आकार देते हैं। साथ ही बीज के विकास, पुष्पन का समय और फूलों के लिंग को निर्धारित करते हैं। इतना ही नहीं, ये हार्मोन पत्ती और तने का विकास, फल का विकास और पौधों की उम्र को भी प्रभावित करते हैं।

आइये, अब जानते हैं पौधों में मिलने वाले 5 मुख्य हार्मोनों के बारे में-

1. ऑक्सिन हार्मोन – ऑक्सिन ऐसे कार्बनिक यौगिकों का समूह है जो पौधों में कोशिका विभाजन और कोशिका दीर्घन में भाग लेता है। इसी हार्मोन के कारण तने की वृद्धि होती है और जड़ की वृद्धि नियंत्रित होती है। पत्तियों के झड़ने और फलों के गिरने की प्रक्रिया भी ऑक्सिन हार्मोन के नियंत्रण में होती है। इस हार्मोन से बीजरहित फल का उत्पादन भी किया जाता है। इण्डोल एसिटिक एसिड (I.A.A) और नैफ्थेलिन (N.A.A) इसके उदाहरण हैं।

2. जिबरेलिन – जिबरेलिन एक जटिल कार्बनिक यौगिक है जो सेल डिवीजन और सेल इलोंगेशन (कोशिका दीर्घन) के जरिये तने को लम्बा बनाते हैं जिससे पौधे का आकार बढ़ता है। ये हार्मोन बीजों की सुषुप्त अवस्था को भंग करके उनके अंकुरण में सहायक बनता है। जिबरेलिक एसिड इसका उदाहरण है।

3. साइटोकाइनिन – इस क्षारीय प्रकृति के हार्मोन का संश्लेषण पौधे की जड़ों के आगे के सिरों पर होता है, जहाँ सेल डिवीजन होता है। ये हार्मोन कोशिकाओं और ऊतकों का विभेदन करता है और बीजों के अंकुरण को प्रेरित करने के अलावा पार्श्व कलिकाओं (लेटरल बड्स) की ग्रोथ भी शुरू करता है। काइनेटिन एक संश्लेषित साइटोकाइनिन है।

4.एब्सिसिस एसिड – ये एक ग्रोथ इन्हीबिटर हार्मोन है यानी ये एसिड पौधों की ग्रोथ को रोकने का काम करता है। बीजों और कलिकाओं को सुषुप्त अवस्था (डॉर्मेंट स्टेज) में लाना और पत्तियों के झड़ने की क्रिया को कण्ट्रोल करने जैसे कार्य ये हार्मोन करता है। पौधों से फूलों और फलों के अलग होने की क्रिया को नियंत्रित करने के साथ वाष्पोत्सर्जन की क्रिया को कण्ट्रोल करने के लिए रंध्रों को बंद करने जैसे कार्य भी एब्सिसिस एसिड ही करता है।

5.एथिलीन – पौधों में गैसीय रूप में पाया जाने वाला ये हार्मोन पौधों की चौड़ाई में वृद्धि करता है। इस हार्मोन द्वारा पौधे के सुषुप्त भागों को अंकुरण के लिए तैयार किया जाता है और फलों के पकने में इस हार्मोन का विशेष योगदान होता है।

दोस्तों, उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमन्द भी साबित होगी।

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