पढ़ाई के समय मेडिटेशन के ख़ास महत्व

पढ़ाई की उम्र में हर स्टूडेंट चाहता है कि उसकी मेमोरी अच्छी हो, उसकी एकाग्रता बनी रहे और चीज़ों को समझने में, सवालों को हल करने में उसे आसानी हो। कमज़ोर दिमाग और सुस्त शरीर कोई नहीं चाहता लेकिन फिर भी हर स्टूडेंट का तेज़ दिमाग नहीं होता और हर स्टूडेंट तन-मन से चुस्त और फुर्तीला भी नहीं होता। ऐसे में पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ना स्वाभाविक ही है लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप अपनी पढ़ाई में अव्वल बने रहे और तन-मन की चुस्ती आपको हर काम में एक्टिव बनाये रखे तो आप मेडिटेशन को अपना लीजिये। लेकिन ऐसा करने से पहले ये जानना जरुरी है कि मेडिटेशन पढ़ाई में किस तरह उपयोगी हो सकता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं पढ़ाई के समय मेडिटेशन –

शरीर स्वस्थ रहता है – ये तो आप भी जानते हैं कि किसी भी कार्य को करने के लिए शरीर का स्वस्थ और फुर्तीला होना ज़रूरी होता है। बिना अच्छी सेहत के किसी भी कार्य को अंजाम देना संभव नहीं हो सकता। ऐसे में मेडिटेशन करने से शरीर निरोगी बनता है और एक विद्यार्थी के लिए भी सबसे पहले अच्छी सेहत रखना ज़रूरी है जो मेडिटेशन के ज़रिये आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

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एकाग्रता बढ़ती है – वैसे तो हर कार्य में एकाग्रता की ज़रूरत होती है लेकिन पढ़ाई में इसका विशेष महत्व माना जाता है। पढ़ाई की इस उम्र में मन का भटकाव होने की सम्भावना भी ज़्यादा रहती है। ऐसे में पढ़ाई के समय मेडिटेशन करने से आपका ध्यान भटकता नहीं है बल्कि आप किसी एक बिंदु या विषय पर ध्यान केंद्रित कर पाने में सक्षम हो जाते हैं जिसके फलस्वरूप आप अपने हर विषय को पूरी एकाग्रता के साथ पढ़कर अच्छे परिणाम ला सकते हैं।

सहनशीलता बढ़ती है – आजकल प्रतियोगिता के इस दौर में सबसे कम सहनशीलता विद्यार्थी वर्ग में देखी जाती है जिन्हें लगातार प्रतियोगिताओं और अपेक्षाओं का बोझ उठाना पड़ता है जिसके कारण हारने की स्थिति बनने पर स्टूडेंट सहज प्रतिक्रिया देने की बजाए असहज महसूस करने लगते हैं। ऐसे में अगर आप पढ़ाई के समय मेडिटेशन करेंगे तो आपका मन मजबूत बनेगा और सहनशक्ति भी बढ़ेगी। ऐसा होने पर आपको हारने का डर नहीं सताएगा बल्कि अगली बार और अधिक प्रयास करने की क्षमता विकसित होगी।

दिमाग तेज़ होता है – पढ़ाई की उम्र में अक्सर विद्यार्थी दिमाग को तेज़ करने के टॉनिक लेने लगते हैं लेकिन अगर आप वाकई अपने दिमाग को तेज़ बनाना चाहते हैं तो मेडिटेशन करिये क्योंकि ऐसा करने से ना केवल आपका दिमाग तेज़ होगा बल्कि आप के दिमाग में अच्छी और सकारात्मक सोच का विकास भी होगा और आपका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ जाएगा।

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बुरी आदतों से छुटकारा – पढ़ाई की उम्र रचनात्मकता की उम्र होती है, इसी उम्र में बेहतर जीवन की नींव रखी जाती है लेकिन इसी उम्र में बहुत से विद्यार्थी ग़लत संगत का शिकार होकर नशीले और मादक पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं। मेडिटेशन ऐसी बुरी लतों से छुटकारा दिलाता है और लगातार मेडिटेशन करने वाले विद्यार्थी ऐसी बुरी लतों के प्रभाव में भी नहीं आते हैं।

पढ़ाई की उम्र में तेज़ दिमाग, स्वस्थ शरीर, शक्तिशाली मन और एकाग्रता की ज़रूरत होती है। ये सभी आवश्यकताएं मेडिटेशन करने से प्राप्त की जा सकती है इसलिए अगर आप भी अपनी पढ़ाई की उम्र में एक अव्वल दर्जे के विद्यार्थी बनना चाहते हैं और अपने जीवन को सही दिशा देना चाहते हैं तो आज से ही मेडिटेशन से जुड़ जाइये।

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