पढ़ाई की उम्र में अपने समय का इस तरह करें सदुपयोग, नहीं तो बाद में पछतायेंगे

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पढ़ाई की उम्र यानि स्कूल और कॉलेज के वो दिन, जिनमें की गयी मेहनत और सीखी हुई स्किल्स ज़िंदगीभर काम आती हैं और एक बेहतर भविष्य बनाने में सहायक होती हैं। बड़े हो जाने और नौकरी करने के दौर में हम सभी उन दिनों को याद करके उदास हो जाया करते हैं जो हमारे पढ़ने के दिन हुआ करते थे। उस समय की पढ़ाई, परीक्षाएं, चुनौतियां और अच्छे रिजल्ट्स के अनुभवों से हम आज भी उतने ही खुश हो जाते हैं जितने उस समय में रहा करते थे। लेकिन अगर आप अभी भी उसी दौर का हिस्सा हैं यानि पढ़ाई से जुड़े हुए हैं तो आपके लिए ये जानना और समझना काफी फायदेमन्द साबित हो सकता है कि वो दौर कितना महत्वपूर्ण होता है जो अभी तक आपके हाथों से निकला नहीं है, अभी अपने जीवन को दिशा देने का समय आपके अपने पास है। ऐसे में कई बार ऐसे अवसर और हालात बनते हैं जब पढ़ाई के उस सबसे ज़रूरी समय को आप जाने-अनजाने यूँ ही बेकार जाने देते हैं।

पढ़ने-लिखने की ये उम्र असल में आपके जीवन की नींव रखती है, यानि अगर इस समय को सही तरीके से काम में लिया जाए तो इस पर टिकने वाली आपकी पूरी लाइफ एकदम मज़बूत, सुरक्षित और आरामदेह हो सकती है लेकिन अक्सर इस उम्र में बच्चों के स्वभाव में कुछ ऐसे बदलाव आने लगते हैं जो उन्हें अपने लक्ष्य से भटकाते हैं जैसे अपने साथियों से तुलना करने, खुद को बेहतर साबित करने, अच्छा दिखने और सबको इम्प्रेस करने जैसे बदलाव।

जिस उम्र में लाइफ का टारगेट केवल पढ़ाई में मन लगाना होता है, उस उम्र में ग़लत संगत और बुरे शौक आपको ना केवल अपने लक्ष्य से भटका देते हैं बल्कि बुरी संगत के कारण नशे जैसी लतें मिलकर पूरा जीवन ही ख़राब कर देती है। ये समय अनमोल है जिसे व्यर्थ गंवाने पर पूरा जीवन ही तहस-नहस हो सकता है। इसलिए इस सुनहरे दौर को ग़लत दिशा में जाने से रोकिये और ज़रा इन बातों पर गौर कीजिये –

ये समय जीवन का सबसे सुनहरा दौर है, इसका पूरा आनंद लीजिये और इसके लिए ज़रूरी है कि इस दौर में आप अपने अंदर सारे गुण और अच्छी बातें समाहित कर लें जो आगे जीवन के हर कदम पर आपको सम्बल प्रदान करेंगी।

याद रखिये कि किसी को भी नीचे गिराकर, ऊँचा नहीं उठा जा सकता इसलिए जीतने के लिए अपने प्रयासों में तेज़ी लाइए, ना कि किसी ग़लत ज़रिये से दूसरों को नीचे गिराने या नीचा दिखाने का सोचिये।

अगर कोई आपसे बेहतर प्रदर्शन करता है तो उससे ईर्ष्या करने और उसे चोट पहुंचाने के बारे में सोचने की बजाए ये जानने की कोशिश कीजिये कि उसके प्रयास आपसे किस प्रकार अलग और बेहतर हैं। दो बुद्धिमान विद्यार्थी प्रतिद्वंदी ही हो, ये ज़रूरी नहीं, वो दोस्त भी हो सकते हैं।
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समय की ताकत को समझिये और इसका सही और पूरा उपयोग कर पाने के लिए मोबाइल और इंटरनेट को सीमित समय ही दीजिये और इस समय को अपनी एजुकेशनल स्किल्स को विकसित करने में लगाइये।

इस बात का ख्याल रखिये कि दोस्तों की संख्या का ज़्यादा होना ज़रूरी नहीं होता है, बल्कि कुछ अच्छे दोस्त ही काफी होते हैं जिनके साथ आप अच्छी आदतें सीखते हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित रहते हैं इसलिए दोस्तों का चुनाव सोच समझकर करिये क्योंकि ये चुनाव आपकी आने वाली लाइफ को काफी हद तक प्रभावित करता है।

एक ही काम को लगातार करने से उसमें ऊबना स्वाभाविक ही है लेकिन पढ़ाई के दौर जब आप ऐसा महसूस करने लगें तो एक अच्छा ब्रेक लीजिये जिससे आपको कुछ अच्छा सीखने- समझने को मिले, अपनी इस बोरियत का हल बुरी लतों और ग़लत संगत में मत ढूंढिए।

आप वास्तविक रूप में जैसे हैं, बहुत अच्छे और समझदार हैं। अब आप ये भी जान चुके हैं कि अगर लाइफ को सही दिशा में मोड़ना हैं तो उसका सही समय और दौर यही है और अब आपको ये भी पता है कि अपनी लाइफ की दिशा तय करना भी आप ही के हाथ में हैं। ऐसे में इस समय के महत्व को समझिये और इस समय को किसी की होड़, नकल या इधर-उधर की बातों में बेकार गंवाने की बजाए अपने टारगेट पर फोकस करिये, ऐसा करके आप अपने लिए एक बेहतर आज और बेहतरीन कल बना लेंगे और ऐसा करके आपको खुद पर नाज़ भी होगा। तो बस, देर किस बात की। इसी समय से जुट जाइये अपने आज और कल को संवारने के लिए। शुभकामनाएं।

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