पैडमैन अरुणाचलम मुरुगनाथम कौन है?

0

अगर आप फिल्मों के शौकीन है और अक्षय कुमार की फ़िल्में ज़रूर देखा करते हैं तो अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ‘पैडमैन’ के बारे में भी आपने ज़रूर सुना होगा। वैसे तो अक्षय कुमार की हर फिल्म अपनी एक अलग खासियत लिए आती है लेकिन इस फिल्म की ख़ास बात ये भी है कि ये फिल्म एक रियल लाइफ स्टोरी पर आधारित है यानी अक्षय कुमार फिल्म पैडमैन में जिस शख्स का किरदार निभा रहे हैं, वो है रियल लाइफ हीरो अरुणाचलम मुरुगनाथम, जिन्हें पैड मैन भी कहा जाता है।

ऐसे में आप भी ये ज़रूर जानना चाहेंगे कि आखिर अरुणाचलम मुरुगनाथम को पैडमैन क्यों कहा जाता है और उन्होंने ऐसा कौनसा काम किया है, जिसके चलते उन पर फिल्म भी बनायी जा रही है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं रियल लाइफ हीरो पैडमैन की कहानी –

एक समय ऐसा था जब हमारे देश में महिलाओं के पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान देना तो दूर, इस बारे में बात करना भी ज़रूरी नहीं समझा जाता था। समय के साथ इस दिशा में काफी सुधार तो हुआ लेकिन गाँवों तक मासिकधर्म के दौरान साफ़-सफाई का ध्यान रखने सम्बन्धी जागरूकता अभी भी पूरी तरह नहीं पहुँच पायी है और सैनेटरी पैड्स के महंगे होने के कारण ज़्यादातर गरीब घरों की महिलाएं, चाहकर भी इतने महंगे सेनेटरी नैपकिन्स नहीं खरीद पाती हैं।

ऐसे में मुरुगनाथम ने महिलाओं की इस मुश्किल को समझा और लगातार प्रयास करके ऐसे सेनेटरी पैड्स बनाये, जो ना केवल सस्ते थे बल्कि उनका इस्तेमाल करके महिलाएं हाइजीन का भी पूरा ख्याल रख सकती थी।

1962 में तमिलनाडु में जन्मे मुरुगनाथम की ये राह आसान नहीं थी। जिस समय मुरुगनाथम ने अपनी पत्नी की पीरियड्स से जुडी परेशानी को समझा, तभी ये ठान लिया कि महिलाओं को होने वाली इस मुश्किल का हल वो ज़रूर निकालकर रहेंगे। अपने इन प्रयासों के दौरान उन्हें सोसाइटी और गाँव में काफी अपमान भी सहना पड़ा और जब उनके बनाये सेनेटरी पैड्स की क्वालिटी को जांचने के लिए कोई महिला वोलेंटियर नहीं मिली तो उन्होंने खुद ही सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करके देखना शुरू कर दिया कि उनका बनाया हुआ पैड, पीरियड्स की जरुरत के लिए कितना उपयुक्त है।

इसके लिए उन्होंने एक ‘गर्भाशय’ बनाया, जिसमें बकरी का खून भरकर उसे जमने से रोकने के लिए उसमें कुछ मिलाया। इसके बाद पैडमैन मुरुगनाथम, सेनेटरी नैपकिन को अपने कपड़ों के अंदर पहनकर दिनभर यहाँ-वहाँ घूमने लगे। ऐसा करने में उन्हें काफी मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा लेकिन वो ये देखना चाहते थे कि उनके बनाये सेनेटरी नैपकिन कितना सोख पाने में सक्षम हैं।

मुरुगनाथम को ये पता लगाने में 2 साल से भी ज़्यादा का समय लग गया कि सेनेटरी पैड्स किन चीजों से बने होते हैं और आख़िरकार साढ़े चार साल बाद उन्होंने पैड बनाने के लिए सस्ती मशीन बना ली और उनसे बने सेनेटरी पैड्स को गाँव-गाँव में पहुंचाया।

मुरुगनाथम ने विरोधों से अप्रभावित रहते हुए, निरंतर प्रयास के दम पर समाज में जो बदलाव लाने की कोशिश की, उसे ना केवल देश बल्कि दुनिया में भी सराहा गया है। उनकी बनायी मशीन को नेशनल इनोवेशन अवॉर्ड की 943 एन्ट्रीज में पहला स्थान मिला है। 18 महीनों में ऐसी 250 मशीनें बनाने वाले पैडमैन मुरुगनाथम को, टाइम्स मैगजीन ने साल 2014 के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में भी चुना और साल 2016 में उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा गया है।

आज पैडमैन अरुणाचलम मुरुगनाथम, जयश्री इंडस्ट्रीज के नाम से नैपकिन बिजनेस चला रहे हैं जिसकी पूरे भारत में 2003 यूनिट्स है और 21,000 से भी ज़्यादा महिलाएं यहाँ काम करती हैं।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि अरुणाचलम मुरुगनाथम को पैडमैन क्यों कहा जाता है। उम्मीद है कि पैडमैन मुरुगनाथम के जज़्बे ने आपको भी ये सोचने के लिए ज़रूर प्रेरित किया होगा कि अगर हम समाज में कोई बेहतर बदलाव देखना चाहते हैं तो उसकी शुरुआत हमें खुद से करनी चाहिए क्योंकि नामुमकिन तो कुछ भी नहीं है।

“महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा”

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here