पहिए का आविष्कार किसने किया?

आज जिन पहियों पर टिकी गाड़ियों में हम सफर करते हैं, उन पहियों का इतिहास बहुत पुराना और रोमांचक है। पहिया एक ऐसा यांत्रिक पुर्जा है जो चक्र के आकार का होता है और एक धुरी पर घूमता है। इस पहिये के इतिहास से जुड़ी दिलचस्प जानकारी आपके लिए भी फायदेमंद हो सकती है इसलिए आज बात करते हैं पहिए का आविष्कार किसने किया।

सबसे पुराने पहियों के सबूत 3500 ईसा पूर्व के हैं जो प्राचीन मेसोपोटामिया में पाए गए। इन पहियों का इस्तेमाल मिट्टी के बर्तन बनाने वाले किया करते थे।

पहिये के निर्माण का दौर वो समय था जब जानवरों को पालतू बनाकर रखा जाता था और खेती की जाती थी। इस दौरान इंसानों ने सुइयां, कपड़े, टोकरियां, बांसुरियां और नाव जैसी चीज़ें बनाना सीख लिया था।

इंसान द्वारा सबसे पहले प्रयोग में लिया जाने वाला पहिया हजारों सालों तक बर्तन बनाने की विधा में इस्तेमाल किया जाता रहा। पहले लेथ मशीनें बनायीं गयी जिन्हें बर्तन बनाने वाले हाथ या पैर से घुमाते थे।

इसकी कुछ सदियों बाद, बर्तन बनाने वालों ने लेथ या पहियों की मदद से चक्कों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और वो भारी पत्थरों का इस्तेमाल करने लगे ताकि घूमने से ज्यादा ऊर्जा तैयार हो सके।

पहियों को घुमाने के लिए घर्षण की समस्या ना हो, इसके लिए उन्होंने पहिये के बीच में गोल छेद करना जरुरी समझा। इसके अलावा जिस डंडे पर ये पहिया लगाना हो, उसका भी गोल और नरम होना जरुरी था।

पुरातात्विक सबूतों के अनुसार ये आविष्कार यूरेशिया और मध्य पूर्व में तेजी से फैला। 3400 ईसा पूर्व से पहिये के इस्तेमाल के असंख्य सबूत मिलते हैं जिनमें रथ और चौपहिया गाड़ियों के चित्र, छकड़ों के मॉडल, पहियों और उनके लकड़ी के एक्सलों के नमूने भी मिलते हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों से प्राप्त खिलौना हाथगाड़ी इस बात का प्रमाण है कि पहिये का अस्तित्व भारत में भी मौजूद था।

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