पैनक्रियाज (अग्न्याशय) क्या है?

मार्च 17, 2018

हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन और कुछ मात्रा में विटामिन और खनिज भी मौजूद होते हैं जिन्हें पचाने के लिए हमारा पाचन तंत्र बहुत मेहनत करता है और भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर उसे पचाता है जिससे मिलने वाली ऊर्जा से ही हमारा शरीर सही तरीके से काम करने की शक्ति जुटा पाता है। हमारे शरीर के इसी महत्वपूर्ण पाचन तंत्र का एक अहम हिस्सा होता है पैनक्रियाज (अग्न्याशय), ये मछली के आकार की 6-10 इंच लम्बी ग्रंथि होती है जो आमाशय के पीछे पेट में पायी जाती है। ये ग्लैंड खाने को आसानी से पचाने के लिए हार्मोन और एंजाइम का स्राव करती है।

पैनक्रियाज का आगे का हिस्सा बड़ा और पीछे का हिस्सा छोटा होता है। ये ग्रंथि आहार को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने का काम करती है ताकि उसका पाचन आसानी से हो जाए।

इस ग्रंथि की ये विशेषता है कि ये आंतरिक रूप से एंडोक्राइन हार्मोन निकालती है जबकि बाहरी रूप से एक्सोक्राइन हार्मोन का स्राव करती है। इसमें पाए जाने वाले एंजाइम ऐसे पाचक रसों को मुक्त करते हैं जो खाने को आसानी से पचाने के लिए जरुरी होते हैं।

अग्न्याशय अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में – अग्न्याशय के हार्मोनों का स्राव इसमें मौजूद गुच्छों में पायी जाने वाली लैंगरहैंस द्वीपिकाओं यानी आइलेट्स ऑफ लैंगरहैंस के द्वारा होता है। इसमें मुख्य रूप से 3 तरह की कोशिकाएं पायी जाती हैं जिनमें से एल्फा कोशिकाएं ग्लूकागॉन का रिसाव करती है जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाने में सहायक होता है जबकि बीटा कोशिकाएं इन्सुलिन स्रावित करती हैं और ये इन्सुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो ब्लड ग्लूकोज के स्तरों को कम करता है और प्रोटीन निर्माण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

अग्न्याशय में मौजूद तीसरी कोशिकाएं डेल्टा कोशिकाएं होती हैं जो सोमेटोस्टेटिनन हार्मोन का स्राव करती है और ये हार्मोन इन्सुलिन और ग्लूकागॉन हार्मोन्स के बीच संतुलन बनाये रखने का काम करता है।

अग्न्याशय बहिःस्रावी ग्रंथि के रूप में – बहिःस्रावी ग्रंथि के रूप में कार्य करते हुए अग्न्याशयी रस तीन तरह के एंजाइम स्रावित करता है जो कार्बोहाइड्रेट्स, वसा और प्रोटीन का अंतिम पाचन करते हैं जिनमें से लाइपेज एंजाइम वसा का पाचन सुगम बनाता है और एमाइलेज एंजाइम कार्बोहाइड्रेट्स का पाचन करके उसे ग्लूकोस में बदल देता है। इसी तरह प्रोटीन के पाचन का कार्य प्रोटीएज एंजाइम करता है।

अग्न्याशय से जुड़े रोग – पैनक्रियाज का सही तरीके से कार्य करना कितना ज़रूरी है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अग्न्याशयी हार्मोन और एन्जाइम्स के सही तरीके से स्रावित नहीं होने की स्थिति में बहुत सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं जैसे पाचन सम्बन्धी समस्या, मधुमेह और अग्न्याशय का कैंसर जो सबसे घातक स्थिति होती है।

कैसे करें अग्न्याशय की देखभाल – जिस तरह शरीर के हर अंग का विशेष महत्व और कार्य होता है उसी तरह पैनक्रियाज भी पाचन क्रिया से जुड़ी एक प्रमुख ग्रंथि है जिसके स्वस्थ रहने पर ही आहार का सही पाचन और शरीर को ऊर्जा की सही मात्रा मिल सकती है इसलिए ये आवश्यक है कि हम इस ग्रंथि का भी विशेष ध्यान रखें और इसके लिए अपने आहार को संतुलित करना बेहद ज़रूरी है, साथ ही धूम्रपान और शराब के सेवन जैसी बुरी लतों से दूरी बनाए रखना भी बहुत ज़रूरी है।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि पैनक्रियाज या अग्न्याशय क्या है, ये कहाँ स्थित होता है और किस तरह कार्य करता है। साथ ही इसके महत्व और इसकी देखभाल का तरीका भी आप जान चुके हैं। ऐसे में स्वस्थ और पौष्टिक आहार लीजिये और इस अंग से जुड़ी किसी भी तरह की तकलीफ महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लीजिये।

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