पति-पत्नी के बीच अनबन दूर करने के उपाय

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पति-पत्नी का रिश्ता जीवन के कई दौर से गुज़रता है। शुरुआती सफ़र में दोनों एक दूसरे के ख़ास मित्र और हमराही होते हैं, जिसके साथ लाइफ शेयर करने का ख़्याल ही दिल को खुशी से भर देता है लेकिन वक़्त के गुजरने के साथ-साथ दोनों की आपसी समझ और प्यार की जगह तनाव और आये दिन होने वाले झगड़े ले लेते हैं। ऐसे में दो हमसफर एक दूजे के साथ रहने में बेहद मुश्किल महसूस करते है। ऐसे में पति पत्नी के बीच की लड़ाइयों, अनबन और असहमति को दूर करने के लिए क्या प्रयास किये जा सकते हैं, आइये आज आपको उन्हीं के बारे में बताते हैं –

साथ बैठने के लिए वक़्त निकालिये –
शादी के कुछ वक़्त बाद आप अपनी लाइफ को पुराने ढ़ंग से जीने की चाहत रखने लगते हैं यानी जब आप सिंगल थे, उस समय की आज़ादी और खुद के निर्णय खुद ही लेने की आपकी आदतें आपके पार्टनर को अकेला महसूस कराती हैं जबकि होना ये चाहिए कि शादी के बाद हर फैसले में आप उनकी सलाह ले और दोनों की रज़ामंदी के बाद हर छोटा बड़ा निर्णय लें।

उन्हें बताइये कि वो ख़ास हैं –
अक्सर आपके पार्टनर के सामने आप अपने दोस्तों और ऑफिस के साथियों की तारीफें करते नहीं थकते। उनकी हर छोटी से छोटी अच्छाई के बारे में अपने पार्टनर को बताते हैं और इसी के चलते आपके जीवनसाथी के मन में असुरक्षा की भावना विकसित होने लगती है क्योंकि आप ये बताने में तो चूक ही जाते हैं कि वो कितने ख़ास हैं, जिनके साथ आपके जीवन की डोर बंधी है। इसलिए अपने दोस्तों और साथियों की तारीफें करते समय थोड़ी प्रशंसा उनके लिए भी बचा कर रखिये।

पुरानी यादें ताज़ा कीजिए –
शादी के कुछ ही समय बाद दोनों साथी महसूस करने लगते हैं कि उनके रिश्ते में वो पहले वाली बात नहीं रही और इस बात की निराशा अक्सर अनबन का कारण बनती है। लेकिन ये वास्तविकता होने की बजाए आपका भ्रम है, क्योंकि समय के साथ रिश्ता और ज्यादा मजबूत होता है न की बोझिल। रिश्ते में नया रंग भरने में पुरानी यादें काफी मददगार साबित हो सकती हैं। आप अपनी शादी के एलबम्स देख सकते हैं और साथ बैठकर पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग्स देखने पर आपकी सारी पुरानी यादें ताज़ा हो जाएंगी और आप महसूस करेंगे कि आपका रिश्ता फिर से नया हो गया है।

क्या वो आपके दोस्त हैं –
दोस्ती का रिश्ता जितना पुराना होता है उतना ही मजबूत और भरोसेमंद होता है, तो फिर शादी का रिश्ता इतनी जल्दी पुराना होने का क्या कारण हो सकता है। क्या अपने जीवनसाथी को आपने हमसफ़र बनाने के साथ एक अच्छा दोस्त भी बनाया है। अगर ऐसा होता तो आपके बीच अनबन तो होती लेकिन दूरियां नहीं होती, क्योंकि दोस्त भले ही कितने भी नाराज़ हो जाये, बहुत जल्द आपके पास लौट कर भी आ जाते हैं। इसी पल उनकी तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाइए और देखिये आपके रिश्ते में कितना हल्कापन आता है।

जीवनसाथी को बदलने की कोशिश तो नहीं करते आप –
शादी के समय अपने साथी की ढेरों तारीफें करके आपने उनका दिल जीत लिया होगा लेकिन कुछ समय बाद आपको लगा कि उनमें बहुत सारी ऐसी आदतें हैँ जो आपके बिल्कुल पसंद नहीं। इस स्थिति में बिना कुछ सोचे समझे आप उन पर बरस पड़ते हैं और उनसे ये अपेक्षा करते हैं कि वो आपके लिए खुद को बदल लें। ऐसा भी तो हो सकता है कि आपमें भी ऐसी बहुत सी आदतें हो जो उन्हें नापसंद हो। तो क्यों न सुधार की शुरुआत आप ही कर दे, उनसे उम्मीद लगाने से बेहतर तो यही होगा न कि आप अपने प्रयासों से उन्हें भी सुधार के लिए प्रेरित करें।

उनमें सिर्फ कमियां ही नहीं है-
किसी की भी कमी निकालना बेहद आसान होता है लेकिन उसकी कमियों को सुधारने में मदद करना हर किसी के बस की बात नहीं। आपके जीवनसाथी में भले ही कमियां हो, जो कि हर इंसान में होती है। लेकिन इसके अलावा उनकी कुछ ख़ासियतें भी तो होंगी जिन पर आपने शायद ही कभी गौर किया हो और यही बात उन्हें तकलीफ देती है जो आपस में अनबन का कारण बन जाती है।

तारीफ़ भी है ज़रूरी –
अक्सर आप ये सोचकर उनकी तारीफ़ नहीं करते है कि आप पहले ही उन्हें इस बारे में बता चुके है कि वो किन किन कामों में अच्छे है और बार बार एक ही बात कहना आपको पसंद नहीं। लेकिन आप ये तो जानते है ना कि तारीफ़ कितनी ही बार की जाए, सामने वाले को बहुत अच्छी लगती है। तो बताने में कंजूसी कैसी ? उन्हें बताइये कि जो उनमें है वो किसी में भी नहीं और वो आपके जीवन के सच्चे साथी साबित हुए हैं। फिर देखिये, अनबन आपके रिश्ते के दरमियाँ आ ही नहीं सकेगी।

परफेक्ट कोई भी नहीं होता –
कई बार अकेले में बैठकर आप ये अफ़सोस करते होंगे कि आपका पार्टनर परफेक्ट नहीं है। उसमें वो सारे गुण नहीं है जो आप ने चाहे थे और इस विचार के बाद जब आप अपने पार्टनर से मिलते हैं तो आपकी ये असंतुष्टि, अनबन का कोई न कोई कारण ढूंढ़ ही लेती है। लेकिन अगर आप ये जान ले कि परफेक्ट कोई होता भी नहीं है और आप भी अपने जीवनसाथी की सारी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए है तो आपको उनकी ख़ामियां दिखना कम हो जायेगा और आप अपने आप को बेहतर बनाने में जुट जाएंगे। आपकी ये कोशिश आपके रिश्ते को कितना खुशनुमा बना सकती है, ये आपको पहले कदम पर ही पता लग जाएगा।

आज की लड़ाई को कल तक ना खींचे –
किसी दिन आपके और आपके जीवनसाथी के विचार नहीं मिलने की वजह से आप दोनों में अनबन हो गयी है तो उसका निपटारा उसी दिन कर ले। उसे अगले कई दिनों तक खींचते रहने से आपके रिश्ते में भी खिंचाव आ सकता है।

असहमति होना स्वाभाविक है –
कई बार आप ये सोचकर निराश हो जाते हैँ कि आपके और आपके साथी के विचार आपस में मेल नहीं खाते और इसी बात पर अक्सर आप दोनों एक दूसरे को दोषी साबित करने में जुट जाते हैं। शायद आप ये नहीं जानते कि दो अलग विचारों के लोग भी साथ में खुश रह सकते है, जरुरत है तो सिर्फ एक दूसरे के विचारों का सम्मान करने की और एक दूसरे की असहमति को स्वीकारने की।

संवाद बंद ना करें –
किसी भी रिश्ते में सबसे जरुरी होता है संवाद। जीवनसाथी के संग रिश्ता बहुत नाजुक भी होता है और बहुत मजबूत भी। किसी बात पर असहमति के चलते आप दोनों एक दूसरे से बात करना ही बंद कर देते है। यही आपकी सबसे बड़ी भूल साबित होती है। समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, बात करना न छोड़े। ये संवाद ही है जो असहमति के बीच से सुलह का नया रास्ता निकाल लेता है।

जीवनसाथी का मतलब होता है जीवन भर साथ निभाने वाला साथी। हालात और परिस्थितियां जैसी भी हो, हर ख़ुशी-गम में आपका हमराही होता है आपका जीवनसाथी। जिसके बिना आपके जीवन की गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती। तो फिर, रोज़ होने वाली छोटी छोटी अनबन और जीवन के उतार चढ़ाव से आपका रिश्ता प्रभावित होना चाहिए या और ज़्यादा मजबूत … ये चुनाव आपका है।

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