आइये जानते हैं पेन की खोज किसने की। भले ही आज पेन का इस्तेमाल कम होने लगा है लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी बरकरार है। ऐसे में क्यों ना आज, पेन की खोज से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारी ली जाए।

तो चलिए, जागरूक पर आज आपको पेन का किस्सा सुनाते हैं और बताते हैं पेन की खोज किसने की।

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पेन की खोज किसने की?

आज से लगभग 24000 साल पहले ऐसी वस्तु का डिजाइन बनाया गया जिसके जरिये लिखा जा सके। 4000 बी.सी. में मिस्र के लोगों ने पेड़ पौधों से कागज बनाया और उस पर लिखने के लिए बांस के पौधे से पेन बनाया और इस तरह पेन बनाने का सिलसिला शुरू हो गया और लगातार चलता रहा।

साल 1827 में Petrache Poenaru ने फाउंटेन पेन का आविष्कार कर दिया जो एक बहुत बड़ी खोज थी। इसके बाद लिखना बहुत आसान हो गया था लेकिन इस पेन से लिखने पर इसकी इंक बहुत देर से सूखा करती थी।

इस परेशानी को हल करने के लिए फिर से पेन बनाने के प्रयास तेज हुए और 1888 में बॉल पेन की खोज ने इस समस्या का हल निकाल दिया। बॉल पेन का आविष्कार John. J. Loud ने किया था।

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बॉल पेन के आविष्कार ने लिखने का कार्य पहले से कहीं आसान कर दिया लेकिन हर आविष्कार में सुधार की गुंजाईश बनी रही है। ऐसा ही बॉल पेन के साथ भी हुआ। इस पेन की इंक जब पतली होती तो लीक हो जाती और ज्यादा गाढ़ी होती तो पेन के अंदर ही अटक जाती।

इन आविष्कारों के 50 साल बाद हंगरी के Laszlo Biro और उनके भाई George ने मिलकर प्रिटिंग प्रेस में इस्तेमाल होने वाली इंक का इस्तेमाल करके बॉल पेन बनाना शुरू किया क्योंकि ऐसी इंक बहुत जल्दी सूख जाती थी।

उनका ये प्रयोग सफल रहा और दोनों भाइयों ने अर्जेंटीना जाकर एक कंपनी के साथ अपना ये प्रयोग साझा किया, जिससे उस कंपनी ने इस आइडिया पर काम करते हुए बॉल पेन बनाना शुरू कर दिया।

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बढ़िया मार्केटिंग ने बहुत जल्द इस बॉल पेन की पहुँच दूर तक बना दी और इस तरह पेन भी प्रतिस्पर्धा की दुनिया में शामिल हो गया और देखते ही देखते बहुत सी कंपनियों ने एक से बढ़कर एक पेन मार्केट में उतारना शुरू कर दिया।

ये प्रतिस्पर्धा लम्बे समय तक चली जिसके चलते पेन हर वर्ग के व्यक्ति तक पहुंचा और एक बहुत जरुरी चीज़ के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा।

उम्मीद है कि पेन की खोज और पेन के सफर से जुड़ा ये किस्सा आपको जरुर पसंद आया होगा और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगा।

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